परंपरा से प्रीमियम ब्रांड तक, Svastika कैसे बना रहा है ब्रास डेकोर का नया बाजार
संयम छुट्टानी और अजिंक्य मिश्रा ने Svastika के जरिए भारतीय ब्रास शिल्प को प्रीमियम D2C ब्रांड में बदला. बिना फंडिंग, मजबूत कारीगर नेटवर्क और 50% रिपीट ग्राहक वृद्धि के साथ यह स्टार्टअप परंपरा, आध्यात्म और आधुनिक डिजाइन का अनोखा संगम पेश कर रहा है.
भारत में घर सिर्फ रहने की जगह नहीं होते. वे भावनाओं का केंद्र होते हैं. दीवारों पर लगी तस्वीरें, पूजा घर की मूर्तियां, पीतल के दीपक और सजावट की छोटी चीजें घर का माहौल तय करती हैं. हर वस्तु में एक याद छिपी होती है. एक संस्कार जुड़ा होता है.
आज की नई पीढ़ी अपने घर को आधुनिक भी रखना चाहती है और जड़ों से जुड़ा भी. यही बदलती सोच एक नए तरह के बाजार को जन्म दे रही है. ऐसा बाजार जो सुंदरता के साथ अर्थ भी चाहता है.
इसी बदलाव को समझा मुंबई के युवा उद्यमी संयम छुट्टानी (Saiyam Chutani) ने. उन्होंने देखा कि लोग आध्यात्म से जुड़े डेकोर खरीदना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर दोहराए हुए डिजाइन मिलते हैं. उनमें नई सोच की कमी होती है.
संयम कहते हैं, “मैंने हमेशा महसूस किया कि प्रोडक्ट सिर्फ सजावट नहीं होता. वह माहौल बनाता है. वह भावना पैदा करता है.”
यहीं से Svastika की शुरुआत हुई. एक ऐसा ब्रांड जो परंपरा को आधुनिक नजरिए से पेश करता है.
बचपन की सीख और डिजिटल अनुभव
संयम का बचपन मुंबई में बीता. यह शहर उन्हें आधुनिकता का अनुभव देता रहा. लेकिन घर का माहौल संस्कृति और आध्यात्म से भरा था.
वे कहते हैं, “घर में रखी हर चीज की एक कहानी होती थी. मैंने वहीं से सीखा कि डिजाइन का मतलब सिर्फ सुंदर दिखना नहीं है, बल्कि अर्थ भी होना चाहिए.”
पढ़ाई ने उन्हें विश्लेषण करना सिखाया. बाजार को समझना सिखाया. आगे चलकर उन्होंने डिजिटल एसेट्स और वेबसाइट्स बनाने का काम किया.
इस दौरान उन्होंने उपभोक्ताओं के व्यवहार को गहराई से समझा. यह जाना कि ब्रांडिंग में कहानी और भरोसा सबसे जरूरी है.
संयम बताते हैं, “डिजिटल दुनिया ने मुझे सिखाया कि लोग सिर्फ प्रोडक्ट नहीं खरीदते. वे उस प्रोडक्ट के पीछे की सोच खरीदते हैं.”
जब उन्होंने होम डेकोर बाजार को देखा तो उन्हें एक गैप नजर आया. बाजार बिखरा हुआ था. डिजाइन दोहराए जाते थे. आध्यात्मिक उत्पाद या तो बहुत पारंपरिक दिखते थे या बहुत साधारण.
तभी उन्होंने अजिंक्य मिश्रा (Ajinkya Mishra) के साथ मिलकर डिजिटल फर्स्ट D2C ब्रांड Svastika की शुरुआत की.
ब्रास, कारीगर और अर्थपूर्ण डिजाइन
भारत में पीतल यानी ब्रास का इतिहास सदियों पुराना है. मंदिरों, घरों और त्योहारों में इसका खास महत्व रहा है.
Svastika ने इसी परंपरा को अपनी ताकत बनाया.
संयम कहते हैं, “ब्रास हमारे लिए सिर्फ धातु नहीं है. यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है. हमने तय किया कि इसे आधुनिक रूप देंगे, लेकिन उसकी आत्मा को बचाए रखेंगे.”
कंपनी हर डिजाइन को सोच समझकर तैयार करती है. प्रतीकों का चयन सावधानी से होता है. फिनिशिंग पर खास ध्यान दिया जाता है.
कारीगरों के साथ मिलकर काम किया जाता है. कच्चे माल की गुणवत्ता पर समझौता नहीं किया जाता.
आज Svastika के उत्पाद गिफ्टिंग में भी लोकप्रिय हो रहे हैं. लोग ऐसे उपहार चाहते हैं जो दिखने में प्रीमियम हों और भावनात्मक जुड़ाव भी दें.
संयम मानते हैं कि आज का ग्राहक प्रामाणिकता चाहता है. वह कहानी जानना चाहता है. वह यह समझना चाहता है कि उसका प्रोडक्ट क्यों खास है.

Svastika की टीम
बूटस्ट्रैप ग्रोथ और भविष्य की दिशा
Svastika की शुरुआत सीमित निवेश से हुई. कंपनी ने बाहरी फंडिंग नहीं ली.
संयम बताते हैं, “हमने जो कमाया, उसे वापस बिजनेस में लगाया. हमें जल्दी अमीर नहीं बनना था. हमें मजबूत ब्रांड बनाना था.”
राजस्व का मुख्य स्रोत डायरेक्ट सेल्स है. कुछ चुनिंदा मार्केटप्लेस के जरिए भी पहुंच बढ़ाई गई है. कंपनी ने करीब पचास प्रतिशत सालाना वृद्धि रिपीट ग्राहकों में दर्ज की है.
यह ग्रोथ दिखाती है कि ग्राहक संतुष्ट हैं और दोबारा खरीद रहे हैं.
हालांकि रास्ता आसान नहीं था. सही कारीगर ढूंढना चुनौती था. गुणवत्ता बनाए रखना मुश्किल था. शुरुआत में तेजी से बढ़ने की कोशिश ने कुछ सबक भी दिए.
संयम कहते हैं, “हमने सीखा कि तेजी से बढ़ना जरूरी नहीं. सही तरीके से बढ़ना जरूरी है.”
आने वाले समय में कंपनी दीवार सजावट और पर्सनल लाइफस्टाइल सेगमेंट में विस्तार करना चाहती है. डिजिटल उपस्थिति को और मजबूत किया जाएगा. सीमित ऑफलाइन विस्तार पर भी विचार हो रहा है.
संयम का विजन साफ है. वे चाहते हैं कि Svastika सांस्कृतिक और आध्यात्मिक डेकोर का भरोसेमंद नाम बने.
वे कहते हैं, “अगर आप भारतीय शिल्प पर आधारित ब्रांड बना रहे हैं तो गुणवत्ता से समझौता मत कीजिए. भरोसा बनाइए. रिश्ते बनाइए. यही लंबी दौड़ की असली ताकत है.”
Svastika की कहानी बताती है कि जब परंपरा और तकनीक साथ चलते हैं, तो एक नया रास्ता बनता है. एक ऐसा रास्ता जो जड़ों से जुड़ा है, लेकिन नजर भविष्य पर रखता है.


