वाराणसी की शिवानी पटेल ने मधुमक्खी पालन से गांव में खड़ा किया हनी बिजनेस
वाराणसी के ओदार गांव की शिवानी पटेल ने बचपन में सीखे मधुमक्खी पालन को कारोबार में बदलकर ‘बनारसी हनी’ शुरू किया. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिले ब्याजमुक्त लोन ने उन्हें उत्पादन बढ़ाने और स्थिर आय बनाने में मदद की. यह कहानी आत्मनिर्भरता और हिम्मत की मिसाल है.
वाराणसी जिले के ओदार गांव में रहने वाली शिवानी पटेल की कहानी किसी बड़े निवेश या अचानक मिले मौके की नहीं है. यह कहानी धीरे धीरे सीखी गई समझ और अपने अनुभव पर भरोसा करने की है. बचपन से ही उन्होंने घर के आसपास मधुमक्खी पालन देखा था. उस समय यह सिर्फ एक पारंपरिक काम लगता था, लेकिन समय के साथ उन्होंने समझा कि यही काम कमाई का स्थिर जरिया बन सकता है.
शिवानी ने कुछ समय तक प्राइवेट नौकरी भी की. वहां 12 घंटे की ड्यूटी और सीमित सैलरी थी. हर महीने 12 से 15 हजार रुपये मिलते थे, लेकिन काम का दबाव ज्यादा था और स्वतंत्रता कम. धीरे धीरे उन्होंने महसूस किया कि नौकरी से ज्यादा संतोष अपने काम में मिलेगा. इसी सोच ने उन्हें खुद का कारोबार शुरू करने की हिम्मत दी.
वह कहती हैं, “पहले नौकरी में कई दिक्कतें थीं, लेकिन अब मैं खुद अपने काम की मालिक हूं.”
पांच बॉक्स से शुरू हुआ ‘बनारसी हनी’
शिवानी ने अपने हनी बिजनेस की शुरुआत बहुत छोटे स्तर से की. उन्होंने सिर्फ पांच मधुमक्खी बॉक्स से काम शुरू किया. हर बॉक्स में चार फ्रेम होते हैं और करीब 24 हजार मधुमक्खियां रहती हैं. करीब 30 दिनों में कॉलोनी मजबूत होने लगती है और 40 से 45 दिनों में एक बॉक्स से दूसरे बॉक्स तक विस्तार संभव हो जाता है.
मधुमक्खियां लगभग तीन किलोमीटर तक जाकर फूलों से रस इकट्ठा करती हैं. सही मौसम और निगरानी के साथ कुछ ही दिनों में शहद निकालने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. शिवानी बताती हैं कि इस काम में धैर्य सबसे जरूरी है. मधुमक्खियों को परेशान नहीं करना चाहिए और तापमान भी संतुलित रहना चाहिए.
शहद निकालने के बाद उसे साफ किया जाता है. फिर छानकर पैक किया जाता है. अलग अलग फूलों से मिलने वाला शहद रंग और स्वाद में अलग होता है. सरसों का शहद हल्का पीला दिखता है, जबकि पुराना शहद समय के साथ गहरा हो जाता है. स्थानीय बाजार में कई लोग दो से तीन साल पुराने शहद को ज्यादा पसंद करते हैं.
CM YUVA Yojana से मिला सहारा
कारोबार शुरू करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी पूंजी की. शिवानी को समझ आ गया था कि बिना आर्थिक सहयोग के काम को बढ़ाना आसान नहीं होगा. इसी दौरान उन्हें यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में जानकारी मिली.
उन्होंने लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और जरूरी प्रक्रिया पूरी की. योजना के तहत उन्हें बिना ब्याज का लोन मिला, जिसकी अवधि चार साल तक की थी. इससे शुरुआती आर्थिक दबाव काफी कम हो गया. अगर वह निजी कर्ज लेतीं तो 10 से 12 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता.
इस मदद ने उन्हें उत्पादन स्थिर करने और धीरे धीरे कारोबार को मजबूत बनाने का मौका दिया. अब वह बिना जल्दबाजी के काम को आगे बढ़ा रही हैं और गांव की कुछ महिलाओं को भी रोजगार देने की कोशिश कर रही हैं.
नौकरी से उद्यमिता तक का सफर
आज ‘बनारसी हनी’ कोई बहुत बड़ा ब्रांड नहीं है, लेकिन यह एक स्थिर और सोच समझकर खड़ा किया गया उद्यम जरूर है. शिवानी के लिए यह सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का रास्ता भी है. नौकरी की अनिश्चितता से निकलकर अपने काम की जिम्मेदारी लेना उनके लिए बड़ा बदलाव रहा.
उनकी कहानी बताती है कि कभी कभी बचपन में देखी गई चीजें ही आगे चलकर जीवन की दिशा बन जाती हैं. छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी धीरे धीरे मजबूत आधार बन सकता है, अगर उसमें धैर्य, मेहनत और सही निर्णय शामिल हों.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



