स्नैक ब्रांड Indian Snack House को मिली 2.14 करोड़ रु की फंडिंग
स्नैक ब्रांड Indian Snack House ने 2.14 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है. इसके साथ ही कंपनी की वैल्यूएशन बढ़कर 33 करोड़ रुपये हो गई है. अब यह ब्रांड 10 नए शहरों में 100 से ज्यादा आउटलेट खोलने की तैयारी कर रहा है.
स्नैक ब्रांड Indian Snack House (ISH) ने 2.14 करोड़ रुपये की अंतरिम फंडिंग जुटाई है. इस फंडिंग राउंड में निवेश सलाहकार की भूमिका Niveshagya ने निभाई है.
इस राउंड में इंदौर, पुणे, नासिक, भोपाल और कोटा जैसे शहरों के निवेशकों ने हिस्सा लिया. यह संकेत देता है कि अब स्टार्टअप्स में निवेश सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा है. इस फंडिंग के बाद कंपनी की वैल्यूएशन 33 करोड़ रुपये हो गई है, जोकि 18 महीने पहले 7.5 करोड़ रुपये थी.
इससे पहले मई 2024 में कंपनी ने एंजेल राउंड में फंडिंग हासिल की थी. उस समय भी Niveshagya ने समर्थन दिया था. उससे पहले कंपनी 2.2 करोड़ रुपये की सीड फंडिंग जुटा चुकी है. उस राउंड की अगुवाई Titan Capital ने की थी.
कंपनी की स्थापना चैन्नई में हुई थी. Indian Snack House पारंपरिक कारीगरों के साथ सीधे काम करता है. ये कारीगर पीढ़ियों से अपने खास पारंपरिक व्यंजनों को बनाते आ रहे हैं. कंपनी का दावा है कि यह बिना पाम ऑयल, बिना प्रिजर्वेटिव और बिना किसी केमिकल के स्नैक्स तैयार करती है.
ब्रांड केला चिप्स और कोविलपट्टी कडलई मिठाई (मूंगफली चिक्की) जैसे पारंपरिक दक्षिण भारतीय स्नैक्स के लिए जाना जाता है. कंपनी तमिलनाडु और केरल के 17 क्लस्टर से सीधे प्रोडक्ट्स खरीदती है. इनमें से कई जगहें अब तक राष्ट्रीय ब्रांड्स की पहुंच से बाहर थीं.
फिलहाल कंपनी केवल बेंगलुरु और चेन्नई में काम कर रही है. ऑर्डर इसकी वेबसाइट, Swiggy और Zomato के जरिए मिलते हैं. कंपनी हर महीने करीब 25 हजार ऑर्डर पूरे कर रही है.
ISH के फाउंडर राजकुमारन ने कहा कि वे क्वालिटी के साथ कोई समझौता न करने वाला ब्रांड बना रहे हैं. सीमित शहरों में मौजूदगी के बावजूद ग्राहकों का भरोसा मजबूत है. इस फंडिंग से कंपनी अगले तीन महीने में दस बड़े भारतीय शहरों में एंट्री करेगी. इसके साथ ही 100 से ज्यादा नए आउटलेट भी खोले जाएंगे.
Niveshagya के को-फाउंडर अभिषेक जैन ने कहा कि ISH सिर्फ एक बिजनेस नहीं है. यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को आज के उपभोक्ताओं तक नए तरीके से पहुंचा रहा है. उन्होंने कहा कि मजबूत फाउंडर और साफ विजन वाले स्टार्टअप में निवेश करना ही उनकी रणनीति है.
Edited by Ravi Pareek



