HS Keerthana: कभी विजय के साथ की थी Acting, आज हैं IAS अफसर
कभी अभिनेता विजय के साथ फिल्मों में नजर आईं बाल कलाकार एच.एस. कीर्थना ने फिल्मी दुनिया छोड़ IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया. पांच असफल प्रयासों के बाद उन्होंने UPSC में सफलता पाई और आज समाज सेवा का प्रतीक बन चुकी हैं. उनकी कहानी हर सपने को दिशा देती है.
कभी सिनेमा के पर्दे पर मासूमियत से मुस्कुराने वाली छोटी बच्ची, आज देश की सेवा में जुटी एक IAS अधिकारी है. दक्षिण भारतीय अभिनेत्री (South Indian Actress) एच.एस. कीर्थना (IAS HS Keerthana) की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं लगती. इसमें संघर्ष है, असफलता है और अंत में सफलता की एक चमकदार मिसाल भी है.
कीर्थना ने बहुत छोटी उम्र में साउथ फिल्म इंडस्ट्री (South Film Industry) में पहचान बनाई थी. उन्होंने मशहूर अभिनेता थलापति विजय (Thalapathy Vijay) के साथ भी अभिनय किया. लेकिन जब ज़िंदगी ने उन्हें एक और रास्ता दिखाया, तो उन्होंने उस दिशा में कदम बढ़ाया.
उन्होंने यह तय किया कि वह सिर्फ पर्दे पर किरदार नहीं निभाएंगी, बल्कि असली ज़िंदगी में भी कुछ ऐसा करेंगी जिससे लोगों का जीवन बेहतर हो सके. जहाँ ज्यादातर लोग नाम और शोहरत के पीछे भागते हैं, कीर्थना ने उस चमक को पीछे छोड़ दिया.
उन्होंने अपने लिए एक कठिन लेकिन सच्चा रास्ता चुना. यह राह थी सेवा, संघर्ष और आत्मविश्वास की. आज वह हर उस सपने की मिसाल हैं जो मेहनत और धैर्य से सच होता है.
बचपन और फिल्मी करियर
कीर्थना ने महज चार साल की उम्र में ही अभिनय शुरू कर दिया था. वह दक्षिण भारतीय फिल्मों और टीवी सीरियलों की लोकप्रिय बाल कलाकार बनीं. 'कर्पूरदा गोम्बे', 'गंगा-यमुना', 'उपेन्द्र', 'हब्बा', 'लेडी कमिश्नर' जैसी तमाम कन्नड़ फिल्मों और धारावाहिकों में उनकी मासूम अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया.
उनकी पहचान बनी 1992 की तमिल फिल्म ‘नालैया थीरपू’ (Naalaiya Theerpu) से. इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता विजय के साथ काम किया. यह विजय की पहली फिल्म थी. कीर्थना की मासूम अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया और उन्हें कई अवार्ड दिलाए.
उन्होंने करीब 32 फिल्मों और 48 टीवी शो में काम किया. कर्नाटक में उन्हें लोकप्रिय बाल कलाकार के रूप में देखा जाने लगा.
लेकिन जहाँ अधिकतर बच्चे अभिनय में ही आगे बढ़ते हैं, कीर्थना ने एक अलग राह चुनी.
Acting से IAS तक
जैसे-जैसे वे बड़ी हुईं, कीर्थना ने महसूस किया कि अभिनय से बढ़कर उन्हें पढ़ाई और समाज सेवा की ओर खिंचाव महसूस हो रहा है. उन्होंने अपनी शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया. वे हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहीं और उन्होंने यह ठान लिया कि वे सिविल सेवा परीक्षा (UPSC exam) में सफल होकर समाज के लिए कुछ बड़ा करेंगी.
उनके परिवार ने भी उनके इस फैसले में पूरा साथ दिया. फिल्मों की चमक-दमक छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन कीर्थना ने अपने सपनों की कीमत समझी.
करीब 15 साल की उम्र में कीर्थना ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दीं. उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया. उनके पिता चाहते थे कि वह एक दिन सरकारी अधिकारी बनें. कीर्थना ने उस सपने को अपना लक्ष्य बना लिया.
उन्होंने मेहनत से पढ़ाई की और कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (KAS) परीक्षा पास की. दो साल तक उन्होंने अधिकारी के रूप में काम किया. इस दौरान उन्होंने लोगों की परेशानियाँ नज़दीक से देखीं. यहीं से उन्हें समाज की सेवा करने की प्रेरणा मिली.
इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा देने का फैसला किया. यह सफर आसान नहीं था.
छठे प्रयास में मिली सफलता
UPSC परीक्षा की तैयारी आसान नहीं होती. लाखों छात्र हर साल कोशिश करते हैं, पर सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है. कीर्थना को भी संघर्ष करना पड़ा. पाँच बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. साल 2020 में, छठे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 167 हासिल की और IAS अधिकारी बनीं.
IAS बनने के बाद कीर्थना को कर्नाटक के मंड्या जिले में असिस्टेंट कमिश्नर की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने वहाँ कई जनहित कार्य किए. बाद में उन्हें चिकमंगलूर जिले की जिला पंचायत की CEO बनाया गया.
आज वह निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रही हैं. वह चाहती हैं कि उनके काम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए. उनका मानना है कि सच्ची सफलता वही है जो समाज को आगे बढ़ाए.
फिल्मी सितारा, अब देश की सेवा में उजियारा
एच.एस. कीर्थना की कहानी संघर्ष से सफलता तक की सच्ची यात्रा है. हर युवा को प्रेरित करती है. वह कहतीं हैं कि सफलता का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता, लेकिन हर मोड़ हमें कुछ सिखाता है. उन्होंने दिखाया कि इंसान अपने जीवन की दिशा खुद तय कर सकता है. फिल्मी दुनिया छोड़कर उन्होंने वह रास्ता चुना जो समाज की भलाई से जुड़ा था.
उन्होंने यह साबित किया कि सपने किसी भी दिशा में हों, मेहनत और विश्वास से उन्हें पूरा किया जा सकता है. खासकर महिलाओं के लिए वह एक उदाहरण हैं कि अगर मन में हिम्मत हो तो कोई मंजिल दूर नहीं रहती. याद रखें असली जीत वही है जो दूसरों के जीवन में रोशनी लाए.



