स्टार्टअप्स के लिए बड़ी राहत! अब 20 करोड़ रु तक मिलेगा बिना गारंटी लोन, CGSS स्कीम में हुए ये बड़े बदलाव
CGSS को पहली बार 6 अक्टूबर 2022 को लॉन्च किया गया था, ताकि स्टार्टअप्स को बिना किसी गिरवी (collateral-free) लोन मिल सके. इस स्कीम के अंतर्गत शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक, AIFI, NBFCs और SEBI-पंजीकृत AIFs द्वारा स्टार्टअप्स को दिए गए लोन पर सरकार गारंटी देती है.
भारत सरकार ने इनोवेशन और स्टार्टअप्स को नई उड़ान देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS) का विस्तार कर दिया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) द्वारा अधिसूचित इस संशोधित योजना के तहत अब प्रति स्टार्टअप गारंटी कवर की सीमा ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़ कर दी गई है. यानि कि इस स्कीम के तहत अब स्टार्टअप्स को अधिक लोन पर ज्यादा गारंटी कवर मिलेगा, जिससे फंडिंग की राह आसान होगी.
क्या है CGSS स्कीम और इसमें क्या बदला गया है?
CGSS को पहली बार 6 अक्टूबर 2022 को लॉन्च किया गया था, ताकि स्टार्टअप्स को बिना किसी गिरवी (collateral-free) लोन मिल सके. इस स्कीम के अंतर्गत शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक, AIFI, NBFCs और SEBI-पंजीकृत AIFs द्वारा स्टार्टअप्स को दिए गए लोन पर सरकार गारंटी देती है.
अब इस स्कीम में प्रमुख बदलाव करते हुए:
- गारंटी कवर की सीमा ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़ कर दी गई है.
- ₹10 करोड़ तक के लोन पर 85% तक गारंटी दी जाएगी.
- ₹10 करोड़ से ऊपर के लोन पर 75% तक गारंटी मिलेगी.
इसके अलावा, सरकार ने 27 Champion Sectors के लिए बड़ी राहत देते हुए वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) को 2% से घटाकर सिर्फ 1% कर दिया है. ये सेक्टर्स 'Make in India' के अंतर्गत चिन्हित किए गए हैं और देश की निर्माण और सेवा क्षमताओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
स्टार्टअप्स को क्या होगा फायदा?
इस स्कीम का उद्देश्य न केवल स्टार्टअप्स को पूंजी देना है, बल्कि उन्हें अनुसंधान एवं विकास (R&D), नवाचार (Innovation), और तकनीकी प्रगति के लिए जरूरी फाइनेंशियल रनवे देना भी है. अक्सर स्टार्टअप्स को शुरुआती चरणों में बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन मिलना मुश्किल होता है क्योंकि उनके पास पर्याप्त संपत्ति नहीं होती. लेकिन अब सरकार की इस गारंटी स्कीम से ऋणदाता संस्थानों के लिए जोखिम कम होगा, जिससे वे स्टार्टअप्स को लोन देने के लिए अधिक इच्छुक होंगे.
इस कदम से फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स को स्टार्टअप्स को ऋण देने में अब कम जोखिम महसूस होगा. इससे न केवल ऋण प्रवाह में वृद्धि होगी, बल्कि इनोवेशन, रिसर्च और डेवलपमेंट को भी गति मिलेगी.
‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2016 में शुरू की गई Startup India पहल का मकसद भारत को एक ग्लोबल इनोवेशन हब बनाना है. CGSS उसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि नवोन्मेषी विचार और तकनीकी समाधान पैसों की कमी के कारण न रुकें.
2025-26 के केंद्रीय बजट में इस स्कीम के विस्तार की घोषणा की गई थी, ताकि स्टार्टअप्स को और अधिक वित्तीय सहयोग मिल सके. DPIIT ने इस स्कीम को और आकर्षक बनाने के लिए स्टार्टअप समुदाय से परामर्श कर कई ऑपरेशनल सुधार भी किए हैं, जिससे स्कीम में आवेदन, स्वीकृति और वितरण प्रक्रियाएं आसान हो सकें.
इस संशोधित स्कीम से न केवल स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिलेगी, बल्कि यह पूरे इकोसिस्टम के लिए एक सकारात्मक चक्र शुरू करेगा—जहां फंडिंग बढ़ेगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, और देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा.



