House of Student को मिली $2 मिलियन की फंडिंग, 25 देशों में 25 लाख स्टूडेंट रूम्स का नेटवर्क
House of Student ने सीड फंडिंग राउंड में $2 मिलियन जुटाए हैं. वैभव वर्मा द्वारा स्थापित कंपनी 25 से ज्यादा देशों में 25 लाख से अधिक वेरिफाइड स्टूडेंट रूम्स का मार्केटप्लेस चलाती है. नई फंडिंग का इस्तेमाल प्रोडक्ट इनोवेशन, AI क्षमताओं, सप्लाई और दुनिया भर में विस्तार में किया जाएगा.
House of Student ने सीड फंडिंग राउंड में 2 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की है. यह फंडिंग इक्विटी और डेट (debt) इन्वेस्टमेंट के जरिए जुटाई गई है. कंपनी इस नई फंडिंग का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट को बेहतर बनाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमताओं को मजबूत करने और दुनिया के नए बाजारों में विस्तार के लिए करेगी.
कंपनी का दावा है कि वह दुनिया का सबसे बड़ा स्टूडेंट हाउसिंग मार्केटप्लेस ऑपरेट करती है. इसके प्लेटफॉर्म पर 25 से ज्यादा देशों में 25 लाख से अधिक वेरिफाइड स्टूडेंट रूम उपलब्ध हैं.
इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व न्यूयॉर्क और मुंबई में काम करने वाले इन्वेस्टमेंट बैंकिंग ग्रुप Saltwater Sutra और Nirmitsu Inspirational Ventures ने किया है.
राउंड में Saltwater Venture Sparks के को फाउंडर गौतम वर्लेकर, Bank of New York Mellon के मैनेजिंग डायरेक्टर ग्लेन फर्नांडिस, UK India Business Council के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO रिचर्ड मैक्कलम और Singapore Gulf Bank के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन अली मूसा समेत कई स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर्स ने हिस्सा लिया है.
इसके अलावा Unilodgers के मौजूदा निवेशकों ने भी इस राउंड में अपना समर्थन जारी रखा है.
House of Student का मुख्यालय अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में है. इसकी ऑपरेटिंग टीमें भारत, यूनाइटेड किंगडम और मिडिल ईस्ट में मौजूद हैं. कंपनी के पास यूनाइटेड किंगडम (UK), अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूएई और सिंगापुर जैसे प्रमुख एजुकेशन डेस्टिनेशन में स्टूडेंट हाउसिंग उपलब्ध है. कंपनी 18 यूरोपीय देशों में भी मौजूद है.
House of Student की कहानी इसके फाउंडर वैभव वर्मा के निजी अनुभव से शुरू होती है. लंदन में अंडरग्रेजुएशन और नॉटिंघम में पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान उन्हें रहने के लिए सही जगह खोजने में काफी परेशानी हुई.
उस समय छात्रों को रहने की जगह तलाशने के लिए क्लासिफाइड्स, नोटिस बोर्ड और निजी संपर्कों पर निर्भर रहना पड़ता था. इस अनुभव ने वैभव को स्टूडेंट हाउसिंग की समस्या का टेक्नोलॉजी के जरिए समाधान बनाने के लिए प्रेरित किया.
इसी सोच के साथ उन्होंने Unilodgers की शुरुआत की. कंपनी के मुताबिक, यह दुनिया का पहला स्टूडेंट हाउसिंग मार्केटप्लेस था. इसका मकसद छात्रों के लिए दूसरे शहर या देश में रहने की जगह खोजना आसान और भरोसेमंद बनाना था.
वैभव ने शुरुआत में Unilodgers को बिना बाहरी फंडिंग के खड़ा किया. बाद में कंपनी ने अपना पहला इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट राउंड हासिल किया, जिसमें उसकी वैल्यूएशन 109 मिलियन डॉलर आंकी गई थी.
वैभव के लिए House of Student एक बिल्कुल नया स्टार्टअप नहीं है. यह उस मिशन का अगला चरण है, जिस पर वह पिछले 15 वर्षों से काम कर रहे हैं.
उनका मानना है कि स्टूडेंट हाउसिंग केवल छात्रों की जरूरतों का एक हिस्सा है. कंपनी अब स्टूडेंट लाइफ से जुड़ी दूसरी जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए अपना दायरा बढ़ाना चाहती है.
वैभव वर्मा ने कहा कि कंपनी की शुरुआत केवल एक अकॉमोडेशन कंपनी बनाने के लक्ष्य से नहीं हुई थी. शुरुआत इस सोच से हुई कि छात्रों को बेहतर अनुभव मिलना चाहिए. स्टूडेंट हाउसिंग पहली समस्या थी, जिसका समाधान कंपनी कर सकती थी.
उन्होंने कहा कि House of Student पिछले कई वर्षों में मिली सीख और अनुभव का नतीजा है. कंपनी की महत्वाकांक्षा दुनिया भर में स्टूडेंट लाइफ से जुड़ा सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनने की है.
House of Student की कोर टीम में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने पहले Unilodgers को बनाने में भी अहम भूमिका निभाई थी.
इनमें आयुषी गुप्ता और दीपक बहुगुणा जैसे पुराने लीडर्स शामिल हैं. वे एक दशक से ज्यादा समय से वैभव के साथ काम कर रहे हैं और अब House of Student के अगले चरण को आगे बढ़ा रहे हैं.
कोविड 19 महामारी के दौरान ग्लोबल एजुकेशन सेक्टर के साथ Unilodgers को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. बाजार में सुधार आने के बाद टीम ने पुराने मॉडल को सिर्फ दोबारा खड़ा करने के बजाय स्टूडेंट लाइफ की बड़ी जरूरतों पर काम करने का फैसला किया.
इसी सोच से House of Student का मौजूदा स्वरूप सामने आया.
कंपनी अब नई फंडिंग के साथ अपने अगले ग्रोथ फेज में प्रवेश कर रही है. उसका फोकस टेक्नोलॉजी और AI क्षमताओं को मजबूत करने के साथ ज्यादा देशों और छात्रों तक पहुंचने पर रहेगा.



