एक बच्ची, एक स्वेटर और 20 साल का बदलाव: AROH Foundation की कहानी
एक दिन दिया गया स्वेटर उस बच्ची की ज़िंदगी नहीं बदल सका, लेकिन उसी अनुभव से जन्मी सोच ने हज़ारों ज़िंदगियों को नई दिशा दी. AROH Foundation की यह कहानी करुणा से शुरू होकर गरिमा और आत्मनिर्भरता तक पहुँचती है—जहाँ सच्चा बदलाव व्यवस्था बदलने के साहस से आता है.
सर्दियों की एक सुबह थी. सड़क किनारे एक छोटी-सी बच्ची, नंगे पाँव, ठिठुरती हुई भीख माँग रही थी. उस वक्त एक और बच्ची ने, बिना कुछ सोचे, अपना स्वेटर उतारकर उसे दे दिया. उस पल उसे लगा कि उसने कुछ अच्छा किया है.
लेकिन अगले ही दिन वही बच्ची फिर उसी जगह, उसी ठंड में खड़ी दिखी.
यहीं से एक सवाल जन्मा—क्या सिर्फ दया काफी है?
यह सवाल था डॉ. नीलम गुप्ता, फाउंडर, प्रेसिडेंट और सीईओ, AROH Foundation के जीवन का पहला मोड़. एक ऐसा मोड़, जिसने आगे चलकर हज़ारों ज़िंदगियों की दिशा बदल दी.
दया से बढ़कर सोचने की शुरुआत
जैसे जैसे डॉ. नीलम गुप्ता ने समाज को करीब से समझा, उन्हें यह साफ़ दिखने लगा कि असमानता सिर्फ गरीबी तक सीमित नहीं है. यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और सम्मान से जुड़ी हुई है. उन्होंने देखा कि कैसे लड़कियों को स्कूल से बाहर कर दिया जाता है और महिलाओं को कमाने के अवसर नहीं मिलते. सामाजिक बुराइयाँ धीरे धीरे सामान्य बना दी जाती हैं.
उन्हें सबसे ज़्यादा तकलीफ इस बात से होती थी कि महिलाओं और लड़कियों के पास अपने जीवन को चुनने का अधिकार नहीं था. तभी उन्होंने यह तय किया कि अगर बदलाव लाना है तो जड़ों पर काम करना होगा. राहत नहीं, बल्कि सशक्तिकरण ज़रूरी है. इसी सोच से AROH Foundation की नींव पड़ी.
डॉ. नीलम कहती हैं, “मुझे लगा कि सिर्फ मदद करना काफी नहीं है. ज़रूरत है ऐसी व्यवस्था बनाने की जहाँ महिलाएँ और लड़कियाँ अपने फैसले खुद ले सकें. AROH की सोच शुरू से यही रही कि हम दान नहीं, आत्मनिर्भरता की राह बनाएँ.”
समय के साथ बदलता मिशन
पिछले बीस वर्षों में भारत की विकास ज़रूरतें बदली हैं और AROH ने भी अपने काम को समय के साथ ढाला है. शुरुआत में शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस था. धीरे धीरे इसमें आजीविका, कौशल विकास, स्वच्छता, जल सुरक्षा और डिजिटल पहुँच को जोड़ा गया. अनुभव ने सिखाया कि अगर समस्याएँ आपस में जुड़ी हैं तो समाधान भी जुड़े होने चाहिए.
तकनीक ने इस यात्रा में अहम भूमिका निभाई. डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन स्किल ट्रेनिंग और बेहतर निगरानी प्रणालियों से दूरदराज़ इलाकों तक पहुँचना आसान हुआ. साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती सामने आई. पानी की कमी, मौसम का बदलता स्वरूप और अस्थिर रोज़गार ने AROH को पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में भी काम करने के लिए प्रेरित किया.
डॉ. नीलम का कहना है, “शिक्षा, रोज़गार, पानी और स्वास्थ्य अलग अलग मुद्दे नहीं हैं. जब तक हम इन्हें एक साथ नहीं देखेंगे, तब तक असर अधूरा रहेगा.”

डॉ. नीलम गुप्ता, फाउंडर, प्रेसिडेंट और सीईओ — AROH Foundation
समग्र विकास की ज़मीन पर उतरती सोच
AROH का मानना है कि सिर्फ हुनर सिखा देना काफी नहीं होता. अगर व्यक्ति स्वस्थ नहीं है, उसके पास साफ़ पानी नहीं है या बाज़ार से जुड़ाव नहीं है, तो उसकी आमदनी टिक नहीं सकती. इसलिए संस्था ऐसे कार्यक्रम तैयार करती है जहाँ कौशल प्रशिक्षण के साथ साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और वित्तीय साक्षरता भी शामिल होती है.
जल शक्ति और स्वच्छ विद्यालय अभियान से AROH ने यह सीखा कि इंफ्रास्ट्रक्चर तभी सफल होता है जब समुदाय उसे अपना माने. स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं से खासकर लड़कियों की उपस्थिति और आत्मसम्मान में बड़ा फर्क पड़ा. पानी के मामलों में जब गाँवों ने खुद जिम्मेदारी ली, तभी स्थायी समाधान संभव हुआ.
डॉ. नीलम कहती हैं, “विकास काग़ज़ पर नहीं टिकता, वह लोगों की आदतों में टिकता है. जब समुदाय खुद ज़िम्मेदारी लेता है, तभी बदलाव स्थायी बनता है.”
उत्तर प्रदेश में ‘उत्थान’ और भविष्य की राह
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध राज्य में काम करना आसान नहीं है. हर ज़िले की अपनी चुनौतियाँ हैं. कहीं पलायन है, कहीं सामाजिक बंदिशें हैं और कहीं पानी की भारी किल्लत है. ‘उत्थान’ परियोजना के ज़रिये AROH ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आजीविका और सामुदायिक नेतृत्व को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है.
संस्था मानती है कि विकास तभी सफल होगा जब समुदाय खुद बदलाव का नेतृत्व करे. इसी सोच के साथ AROH ने सरकारी और CSR साझेदारियों को मज़बूत किया. संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट ऑफ इंडिया से मिली मान्यता ने संस्था की विश्वसनीयता को और मजबूत किया.
डॉ. नीलम युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं को संदेश देती हैं, “इस क्षेत्र में चार बातें बहुत ज़रूरी हैं — जुनून, उद्देश्य, धैर्य और निरंतर प्रयास.
लोगों को बदलने से पहले, उन्हें समझना और उनसे सीखना ज़रूरी है.”
एक दिन दिया गया स्वेटर उस बच्ची की ज़िंदगी नहीं बदल सका, लेकिन उसी अनुभव से जन्मी सोच ने हज़ारों ज़िंदगियों को नई दिशा दी. AROH Foundation की कहानी करुणा से शुरू होकर गरिमा और आत्मनिर्भरता तक पहुँचने की कहानी है. यह याद दिलाती है कि सच्चा बदलाव तब आता है जब हम दया से आगे बढ़कर व्यवस्था को बदलने का साहस करते हैं.



