पीयूष गोयल की स्टार्टअप फाउंडर्स को सलाह: “BHAG सोचो और ऊंचे लक्ष्य तय करो”
YourStory की एक खास पहल ‘The Bharat Project’ को लॉन्च करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि असंतोष एक उद्यमी की असली पहचान है. उन्होंने स्टार्टअप फाउंडर्स से अपने बेंचमार्क्स और ऊंचे सेट करने का आग्रह किया.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स को अपने बेंचमार्क्स और ऊंचे सेट करने चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि भौगोलिक सीमाएं फाउंडर्स की सोच और विकास को सीमित नहीं कर सकतीं.
यह बात उन्होंने YourStory की एक खास पहल ‘द भारत प्रोजेक्ट’ (The Bharat Project) के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान कही. इस पहल का उद्देश्य छोटे शहरों (टियर-2, टियर-3) और ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देते हुए 10 लाख उद्यमियों को सशक्त बनाना है.
'द भारत प्रोजेक्ट' सरकार, स्टार्टअप इकोसिस्टम एनेबलर्स, क्रिएटर्स और समुदायों को एक साथ लाकर ग्रामीण प्रतिभा को उजागर करने और उद्यमिता से जुड़े टूल्स, शिक्षा और फंडिंग तक लोकतांत्रिक पहुंच सुनिश्चित करने का कार्य करेगा.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “हमारे इनक्यूबेटर अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें और बेहतर करने की जरूरत है.”
भारत के बढ़ते ऑन्त्रप्रेन्योरियल इकोसिस्टम पर टिप्पणी करते हुए गोयल ने कहा कि एक सच्चे उद्यमी की पहचान उसकी ‘स्थायी असंतुष्टि’ में होनी चाहिए. नवाचार (Innovation) तभी आता है जब कोई व्यक्ति कुछ बड़ा और बेहतर बनाने की चाह रखता है.
उन्होंने फाउंडर्स की मानसिकता को लेकर BHAG शब्द का उल्लेख किया, जिसका मतलब है: “Big Hairy Audacious Goal” – यानी एक ऐसा बड़ा और साहसिक लक्ष्य जिसे हासिल करने के लिए जुनून चाहिए. यह शब्द जिम कॉलिन्स (Jim Collins) और जैरी पोरास (Jerry Porras) द्वारा 1994 में लिखी गई किताब Built to Last: Successful Habits of Visionary Companies में दिया गया था.
गोयल ने खुद के 17 वर्षीय उद्यमी जीवन को याद करते हुए कहा, “हमने तब जो कठिनाइयाँ झेली थीं, उम्मीद करता हूं कि आज का कोई भी उद्यमी वैसी मुश्किलों का सामना न करे.”
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय समाज में उद्यमिता को लेकर सोच में बदलाव आ रहा है. अब लोग यह समझने लगे हैं कि रोजगार का मतलब केवल सरकारी नौकरी नहीं है. गोयल ने कहा, “अब लोग यह समझने लगे हैं कि गवर्नमेंट सेक्टर के बाहर भी काम करने के मायने हैं.”
वैश्वीकरण के इस दौर में जब दुनिया आपस में पहले से कहीं ज्यादा जुड़ी हुई है और विकल्पों की भरमार है, मंत्री ने कहा कि हमें घरेलू उत्पादन और कच्चे माल पर भरोसा रखना चाहिए.
उन्होंने यह भी माना कि कई बार स्थानीय विकल्प सबसे सस्ता नहीं होता, लेकिन जब हम स्थानीय संसाधनों और उद्योगों को समर्थन देते हैं, तो हम देश को सस्ते और घटिया आयातित माल का डंपिंग ग्राउंड बनने से बचा सकते हैं.
पीयूष गोयल ने अंत में कहा, “किस्मत पूरा चक्र लगाकर वापस आती है. इसलिए जहां संभव हो, भारतीय उद्योग, एक-दूसरे और अपने उद्यमियों का समर्थन करें.”
(Translated by: रविकांत पारीक)




