The Solar Man of India: 975 गांवों को रौशन करने वाले Dr. Sachin Shigwan की सोलर क्रांति
‘द सोलर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर डॉ. सचिन शिगवण ने वर्ष 2014 में Green India Initiative की नींव रखी. उनका उद्देश्य था: ग्रामीण भारत को सौर ऊर्जा से सशक्त बनाना. अब तक उन्होंने 975 से अधिक दूरस्थ गांवों और स्कूलों में बिजली पहुंचाई है और 1,20,000 से अधिक लोगों की ज़िंदगी में बदलाव आया है.
मानव सभ्यता का विकास केवल तकनीक या संसाधनों से नहीं, बल्कि एक जागरूक और संवेदनशील सोच से होता है. जब उद्देश्य प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक उत्थान और सतत विकास के लिए हो, तब कोई भी राह कठिन नहीं होती. और इसी राह पर चलने वाली एक प्रेरणादायक शख़्सियत है डॉ. सचिन शिगवण (Dr. Sachin Shigwan) —जिन्हें आज भारत में ‘द सोलर मैन ऑफ इंडिया’ (The Solar Man of India) (भारत का सौर पुरुष) के नाम से जाना जाता है.
डॉ. सचिन का बचपन ऐसे गांव में बीता जहां बिजली नहीं थी. पढ़ाई-लिखाई के लिए उन्हें केरोसिन लैम्प का सहारा लेना पड़ता था. शायद वहीं से उनके भीतर यह संकल्प जागा कि आने वाली पीढ़ियों को यह अंधेरा नहीं झेलना चाहिए.
वर्ष 2014 में, डॉ. सचिन ने Green India Initiative Pvt. Ltd. की नींव रखी. उनका उद्देश्य था: ग्रामीण भारत को सौर ऊर्जा से सशक्त बनाना. एक ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसकी परवरिश पारंपरिक केरोसिन लैम्प की रोशनी में हुई, यह एक व्यक्तिगत संकल्प भी था.
एक दशक से भी अधिक अनुभव के साथ, डॉ. सचिन ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), कॉरपोरेट एनवायरनमेंट रिस्पॉन्सिबिलिटी (CER) और ESG प्रोजेक्ट्स के तहत सौर ऊर्जा को अपनाने के मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया. उन्होंने सरकारी संस्थाओं, गैर-लाभकारी संगठनों, कॉरपोरेट्स और हजारों ग्रामीण परिवारों के साथ मिलकर 975 से अधिक दूरस्थ गांवों और स्कूलों में बिजली पहुंचाई. इन परियोजनाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाया है और देशभर में 1,20,000 से अधिक लोगों की ज़िंदगी में बदलाव लाया है.
डॉ. सचिन न केवल एक इनोवेटर हैं, बल्कि एक शिक्षक और विचारशील नेता भी हैं. उन्होंने सौर ऊर्जा को एक परोपकारी कार्य के रूप में देखा है—जो न केवल समाज की मदद करता है, बल्कि व्यवसायों को भी सस्टेनेबल और सेंसिटिव बनाता है. उन्होंने रूरल डेवलपमेंट थ्रू सोलर एनर्जी विषय पर ऑनरेरी डॉक्टरेट और सोशल ऑन्त्रप्रेन्योरशिप में MBA किया है.
उनका ‘एम्प्लॉई सोलर एंगेजमेंट प्रोग्राम’ अब तक 25,000 से अधिक लोगों और समुदायों तक पहुंच चुका है. इससे यह साफ होता है कि उनके लिए सोलर एनर्जी सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि एक आंदोलन है.

‘द सोलर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर डॉ. सचिन शिगवण ने वर्ष 2014 में Green India Initiative की शुरुआत की थी.
हाल ही में YourStory ने डॉ. सचिन शिगवण से बात की. यहां आप भी पढ़िए इस इंटरव्यू के संपादित अंश...
YourStory [YS]: आपको “द सोलर मैन ऑफ इंडिया” के रूप में जाना जाता है. यह उपाधि कैसे मिली और इसका आपके लिए क्या महत्व है?
डॉ. सचिन शिगवण [डॉ. सचिन]: “द सोलर मैन ऑफ इंडिया” कहलाना मेरे लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों है. यह उपाधि लोगों ने अपने आप दी, जब उन्होंने देखा कि मैं ग्रामीण भारत में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा हूँ. Green India Initiative के माध्यम से मैंने कई सौर परियोजनाएं शुरू कीं, जिससे हजारों लोगों की जिंदगी बेहतर हुई. यह उपाधि मेरे लिए एक व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि एक स्थायी और समावेशी विकास की दिशा में चल रहे सामूहिक प्रयास का प्रतीक है.
YS: आपने 975 से अधिक गांवों और स्कूलों में विद्युतीकरण किया है—कोई एक प्रेरणादायक कहानी बताएं.
डॉ. सचिन: पुणे के दूरस्थ गांव कलाकराई में हमने एक बड़ी सौर परियोजना स्थापित की. वहां पानी और बिजली की भारी कमी थी. हमने 7.5 HP की सोलर पंपिंग प्रणाली लगाई, जिससे अब पूरे गांव को पानी मिलता है. साथ ही, सोलर जल शुद्धिकरण सिस्टम, स्ट्रीट लाइट्स, स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों का सौर विद्युतीकरण किया गया. इस पहल से न केवल बुनियादी सुविधाएं मिलीं, बल्कि गांववासियों का आत्मविश्वास और जीवन स्तर भी बढ़ा.
YS: आपका ‘एम्प्लॉई सोलर एंगेजमेंट प्रोग्राम’ क्या है और इसका क्या प्रभाव पड़ा है?
डॉ. सचिन: यह प्रोग्राम कॉरपोरेट कर्मचारियों को ग्रामीण विद्युतीकरण से जोड़ता है. वे सोलर लैंप बनाते हैं, उन्हें गांवों में लगाते हैं और लाभार्थियों से मिलते हैं. इससे कर्मचारियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और उन्हें समाज के लिए कुछ करने का अवसर मिलता है. अब तक 25,000 से अधिक कर्मचारी इस प्रोग्राम से जुड़ चुके हैं और हजारों सोलर लाइट्स वितरित की जा चुकी हैं. इससे कंपनियों की टीम भावना मजबूत हुई है और गांवों में वास्तविक बदलाव आया है.
YS: आपके सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स ने ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को कैसे बेहतर बनाया है?
डॉ. सचिन: ग्रीन इंडिया इनिशिएटिव के सोलर प्रोजेक्ट्स ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को काफी बेहतर बनाया है. बिना बिजली के चल रहे प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में सोलर पावर सिस्टम लगाने से अब वैक्सीन्स और दवाइयों का सुरक्षित भंडारण संभव हुआ है, और मेडिकल उपकरणों का बेहतर उपयोग हो पा रहा है. इससे खासकर रात में होने वाली इमरजेंसी सेवाएं और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार आया है.
साथ ही, सोलर चालित जल पंप और जल शुद्धिकरण प्रणालियों के ज़रिए साफ पानी और स्वच्छता सुनिश्चित की गई है, जिससे जलजनित बीमारियों में कमी आई है. महाराष्ट्र के एक आदिवासी स्वास्थ्य केंद्र में सोलर इंस्टॉलेशन के बाद मरीजों की संख्या में 40% से अधिक बढ़ोतरी हुई, और स्वास्थ्यकर्मियों ने सेवा की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखा. साथ ही, सोलर जल पंप और फिल्टर से साफ पानी मिलने से बीमारियां भी घटी हैं.
YS: आपने सौर विद्युतीकरण में कौन-कौन से इनोवेटिव या टेक्नोलॉजी-बेस्ड अप्रोच अपनाए हैं?
डॉ. सचिन: हमने कई नवाचार अपनाए हैं ताकि ग्रामीण समुदायों की जरूरतों के अनुसार समाधान दिए जा सकें:
- मॉड्यूलर सोलर इन्फ्रास्ट्रक्चर – जैसे कि इनबिल्ट बैटरी वाले डस्ट-टू-डॉन सोलर स्ट्रीट लाइट्स और पोर्टेबल सोलर किट्स जो घरों और स्कूलों में आसानी से लग सकें.
- कम्युनिटी एसेट्स का सौर विद्युतीकरण – जल पंप, जल शुद्धिकरण सिस्टम, ई-लर्निंग किट्स और स्वच्छता प्रणाली जैसे सुविधाएं सौर ऊर्जा से संचालित की जाती हैं.
- कम्युनिटी ओनरशिप मॉडल – स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग देकर उन्हें सिस्टम का मालिकाना हक और संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है.
YS: ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए सोलर सिस्टम की दीर्घकालिक देखरेख और प्रबंधन आप कैसे करते हैं?
डॉ. सचिन: हमने एक मजबूत और बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई है:
- स्थानीय प्रशिक्षण और स्वामित्व – गांव के युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें 'सोलर एंबेसडर' बनाया जाता है, जो सिस्टम का रखरखाव करते हैं.
- AMC (Annual Maintenance Contract) – हर प्रोजेक्ट के साथ सालाना रखरखाव अनुबंध होता है, जिसमें समय-समय पर टेक्निकल टीम निरीक्षण करती है.
- रिमोट मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी – कई इंस्टॉलेशन्स में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग होती है, जिससे किसी भी खराबी का तुरंत समाधान किया जा सकता है.
- स्थानीय साझेदारी – स्थानीय NGOs, स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों के साथ मिलकर एक सहयोगी नेटवर्क तैयार किया जाता है.
इस तरह हम केवल सिस्टम लगाते नहीं, बल्कि एक स्थायी और सामुदायिक रूप से संचालित ऊर्जा मॉडल बनाते हैं जो वर्षों तक टिकाऊ रहता है.

डॉ. सचिन शिगवण का ‘एम्प्लॉई सोलर एंगेजमेंट प्रोग्राम’ अब तक 25,000 से अधिक लोगों और समुदायों तक पहुंच चुका है. उनकी Green India Initiative की बदौलत देशभर में 1,20,000 से अधिक लोगों की ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है.
YS: देशभर में क्लीन एनर्जी समाधानों को स्केल करते समय आपने किन प्रमुख चुनौतियों का सामना किया?
डॉ. सचिन: ग्रीन इंडिया इनिशिएटिव प्राइवेट लिमिटेड को देशभर में विस्तार देने की प्रक्रिया में हमें कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. हालांकि यह एक बड़ा सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने का अवसर देता है, फिर भी इसके साथ कुछ रणनीतिक जोखिम जुड़े होते हैं, जिनका हमने योजनाबद्ध तरीके से समाधान किया है:
गुणवत्ता नियंत्रण और संचालन, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाएं, वित्तीय स्थिरता और पूंजी की उपलब्धता के साथ सामुदायिक जुड़ाव और सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं, भाषाई विविधता, कोविड-19 और स्वास्थ्य संकट जैसी चुनौतियों का हमने सामना किया है. इसके अलावा, नीतिगत और टैक्स बदलाव, दीर्घकालिक स्थिरता, ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसे की कमी – इन सभी चुनौतियों का व्यवस्थित समाधान करके हम एक टिकाऊ, स्केलेबल और प्रभावशाली मॉडल पर आगे बढ़ रहे हैं.
YS: आपकी यात्रा में सरकार या नीति स्तर पर क्या सहयोग मिला और किस तरह की कमियों को आप अब भी महसूस करते हैं?
डॉ. सचिन: सरकारी योजनाओं और नीतियों ने हमारे मिशन को जमीन पर साकार करने में अहम भूमिका निभाई है. विशेष रूप से MNRE की योजनाएं, जवाहरलाल नेहरू नेशनल सोलर मिशन, और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत CSR अनुदेशों ने हमें स्थायी ऊर्जा समाधानों को ग्रामीण विकास से जोड़ने में मदद की.
राज्य सरकारों की तरफ से स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और आदिवासी क्षेत्रों में ऑफ-ग्रिड सोलर इंस्टॉलेशन को लेकर जो समर्थन मिला, उसने भी हमें जमीनी स्तर पर बेहतर पहुंच बनाने में सहायता की. सरकारी विभागों के साथ सहयोग से हमारे समाधान स्थानीय विकास लक्ष्यों से बेहतर ढंग से जुड़ पाए.
हालांकि, कुछ स्पष्ट कमियां अब भी बनी हुई हैं:
- नीतियों का जमीनी क्रियान्वयन कमजोर है, जिससे अनुमोदन और सब्सिडी वितरण में देरी होती है.
- सिस्टम की लाइफ-साइकिल मेंटेनेंस के लिए कोई स्पष्ट संरचित फंडिंग व्यवस्था नहीं है, जिससे कई सरकारी परियोजनाएं समय से पहले निष्क्रिय हो जाती हैं.
- नीति निर्माण अब भी मुख्यतः ग्रिड विस्तार पर केंद्रित है, जबकि हाइब्रिड या माइक्रोग्रिड जैसे विकेंद्रीकृत समाधानों को भी दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे के रूप में अपनाया जाना चाहिए.
- स्थानीय नवाचारों और स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए R&D समर्थन और स्टार्टअप्स के लिए “ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस” वातावरण की आवश्यकता है.
- सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के बीच समन्वित साझेदारी इन चुनौतियों को दूर कर सकती है और अंतिम व्यक्ति तक सस्ती और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाई जा सकती है.
YS: ग्लोबल ट्रेंड्स की तुलना में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी को कैसे अपना रहा है?
डॉ. सचिन: भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम बीते कुछ वर्षों में क्लीनटेक और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से सक्रिय हुआ है. सरकारी प्रोत्साहनों, ESG-केंद्रित निवेश और जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती जागरूकता ने नवाचार को बढ़ावा दिया है.
हालांकि अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों की तुलना में भारत में ग्रीन फायनेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और R&D समर्थन की संरचनाएं अभी विकसित हो रही हैं, फिर भी ‘फ्रूगल इनोवेशन’ भारत की सबसे बड़ी ताकत है. यहां के स्टार्टअप सीमित संसाधनों में बड़े और स्केलेबल समाधानों को विकसित कर रहे हैं.
भारत में आज: IoT और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का उपयोग ऊर्जा निगरानी, ग्रिड अनुकूलन और कार्बन ट्रैकिंग के लिए किया जा रहा है. ऑफ-ग्रिड सोलर समाधान, EV चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ कुकिंग सॉल्यूशंस में निवेश लगातार बढ़ रहा है.
हालांकि, कुछ बाधाएं अब भी बनी हुई हैं, जैसे – प्रारंभिक स्तर पर पूंजी की कमी, स्पष्ट और स्थिर नीतियों की आवश्यकता, और स्टार्टअप्स, कॉरपोरेट्स और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग की गति धीमी है.
भारत के पास न केवल अपने नेट ज़ीरो लक्ष्य (2070) को प्राप्त करने की क्षमता है, बल्कि यह एक वैश्विक अफोर्डेबल क्लीनटेक हब बनकर उभर सकता है—जो दुनिया के सामने टिकाऊ विकास का भारतीय मॉडल प्रस्तुत कर सके.
YS: ग्रीन इंडिया इनिशिएटिव को लेकर आपका लॉन्ग-टर्म विज़न क्या है?
डॉ. सचिन: हमारा विज़न है कि हर ग्रामीण समुदाय को किफायती, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा मिले. हम ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम, सोलर हेल्थकेयर व एजुकेशन सॉल्यूशंस और क्लीन कुकिंग टेक्नोलॉजी के ज़रिए गांव-गांव में ऊर्जा पहुंचाना चाहते हैं.
हम स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ऊर्जा स्वावलंबन को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि सिस्टम का दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित हो सके.
हमारा लक्ष्य है—सभी वर्गों तक सौर समाधान पहुंचाना, और सरकारी व निजी भागीदारों के साथ मिलकर क्लीन एनर्जी को नीति स्तर पर भी बढ़ावा देना.
YS: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के बीच क्या चीज़ आपको प्रेरित करती है?
डॉ. सचिन: हर वह बदलाव जो हम ज़मीनी स्तर पर देखते हैं—जैसे बिजली से रोशन होता कोई स्कूल या वैक्सीन सुरक्षित रखने वाला हेल्थ सेंटर—हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन हम उन्हें नवाचार और सीखने के अवसर मानते हैं. साझेदारी, समुदायों की जिजीविषा, और जलवायु न्याय के लिए हमारी ज़िम्मेदारी—ये सभी प्रेरणा के स्त्रोत हैं. हमें विश्वास है कि स्वच्छ ऊर्जा सबका अधिकार है, न कि विशेषाधिकार.
YS: युवाओं और सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित उद्यमियों को आप क्या सलाह देंगे?
डॉ. सचिन: मेरी सलाह है: उद्देश्य के साथ शुरुआत करें, सहानुभूति से नेतृत्व करें और धैर्य व लचीलापन बनाए रखें. सस्टेनेबिलिटी केवल बिज़नेस का मौका नहीं, एक ज़िम्मेदारी है. समस्या को समझने के लिए ज़मीन से जुड़ें, समुदायों से संवाद करें और उनके अनुभवों से सीखें.
परफेक्ट समय का इंतज़ार न करें—छोटे स्तर से शुरू करें, जल्दी प्रयोग करें और फीडबैक के अनुसार सुधार करते जाएं. तकनीकी नवाचार के साथ सामाजिक समावेश पर भी ध्यान दें.
चुनौतियाँ आएंगी—फंडिंग, नीतिगत अड़चनें, संचालन की मुश्किलें—लेकिन अगर उद्देश्य स्पष्ट है, तो ये बाधाएं रास्ता नहीं रोकेंगी.
साझेदारी करें, मार्गदर्शन लें, और सफलता को सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि बदले हुए जीवन और संरक्षित पर्यावरण में मापें.
भारत को ऐसे युवा चाहिए जो सिर्फ कंपनियां नहीं, बल्कि टिकाऊ और समान भविष्य बना रहे हों.
अंत में, सफलता को लेकर डॉ. सचिन का मानना है: “हर किसी की यात्रा अलग होती है, और सफलता के मायने भी अलग होते हैं. अपनी सफलता की परिभाषा खुद तय करें और उसके लिए जुनून, समर्पण और उद्देश्य के साथ काम करें. बड़े सपने देखें, मेहनत करें और अपनी तरह से दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाएं.”
डॉ. सचिन शिगवण की कहानी सिर्फ सौर ऊर्जा की नहीं है, बल्कि यह उस सोच की कहानी है जो कहती है कि परिवर्तन लाने के लिए बड़ी शुरुआत की ज़रूरत नहीं, बल्कि बड़ी सोच की ज़रूरत होती है. आज जब दुनिया क्लाइमेट चैलेंज से जूझ रही है, तब ऐसे लीडर्स समाज को प्रेरणा, ऊर्जा और दिशा दे रहे हैं. भारत को ग्रीन और क्लीन बनाने की इस रौशनी में, हम सभी का योगदान ज़रूरी है.
नोट: तथ्यात्मक जानकारी में सुधार, फीचर इमेज बदलकर लेख को पुन: प्रकाशित किया गया है.



