बजट 2026 की मुख्य बातें: आम आदमी, किसान और कारोबारी... किसे क्या मिला? जानिए
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया आम बजट 2026-27 विकास, समावेशन और आत्मनिर्भरता का रोडमैप है. मैन्युफैक्चरिंग, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, किसानों की आय, टैक्स सुधार और ग्रीन एनर्जी पर फोकस के साथ यह बजट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा तय करता है.
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया. यह बजट कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है और तीन स्पष्ट कर्तव्यों से प्रेरित है. सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास को तेज करना, लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत के अनुरूप अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है.
बजट के अनुमान के अनुसार गैर ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं. राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. ऋण से जीडीपी अनुपात को घटाकर 55.6 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है.
आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने विनिर्माण पर बड़ा दांव खेला है. बायोफार्मा शक्ति की घोषणा की गई है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये का आवंटन होगा. इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाना है. तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान बनाए जाएंगे और मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा. सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए उपकरण, सामग्री और डिजाइन में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जाएगी.
पूंजीगत सामान की क्षमता बढ़ाने पर भी फोकस किया गया है. हाईटेक टूल रूम स्थापित होंगे और कंटेनर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना लाई जाएगी. वस्त्र क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू की गई है, जिससे रेशम, ऊन, जूट और आधुनिक फाइबर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूती देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की घोषणा की गई है.
एमएसएमई सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड प्रस्तावित है. आत्मनिर्भर भारत फंड को भी समर्थन जारी रहेगा. टियर टू और टियर थ्री शहरों में कॉर्पोरेट मित्र कैडर विकसित किया जाएगा, जिससे छोटे उद्यमों को पेशेवर सहयोग मिल सके.
इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है. नए समर्पित माल गलियारे और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू करने की योजना है. सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता के लिए कार्बन कैप्चर तकनीक पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. शहर आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव है.
लोगों की क्षमता बढ़ाने के लिए शिक्षा से रोजगार और उद्यम पर विशेष ध्यान दिया गया है. पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाई जाएंगी और हर जिले में महिला छात्रावास स्थापित किए जाएंगे. आयुष क्षेत्र में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खुलेंगे. पशुपालन को मजबूती देने के लिए 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे.
ऑरेंज इकोनॉमी के तहत 15 हजार स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित होंगी. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान बनाया जाएगा और 10 हजार टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षित किया जाएगा. 15 पुरातात्विक स्थलों को सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा.
किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन, पशुपालन और उच्च मूल्य वाली फसलों पर जोर दिया गया है. नारियल, काजू और कोको जैसी फसलों को वैश्विक ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखा गया है. भारत विस्तार नामक एआई आधारित कृषि टूल भी लॉन्च किया जाएगा.
प्रत्यक्ष कर में नया आयकर अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. कर नियमों को सरल बनाया जाएगा और छोटे करदाताओं को राहत दी जाएगी. अप्रत्यक्ष करों में सीमा शुल्क सरलीकरण, ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने वाले कदम शामिल हैं.
कुल मिलाकर बजट 2026-27 विकास, समावेशन और आत्मनिर्भरता का रोडमैप पेश करता है. सरकार का दावा है कि यह बजट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार रखेगा.



