बहराइच का गेहूं प्रसंस्करण: मंडी से रोजमर्रा के खाद्य उत्पाद तक ODOP की पहचान
बहराइच का गेहूं प्रसंस्करण उद्योग मंडी से आटा, मैदा, सूजी और चोकर जैसे रोजमर्रा के खाद्य उत्पाद तैयार करता है। ODOP कार्यक्रम के अंतर्गत इसे वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव मिला है, जिससे स्थानीय मिलिंग इकाइयों को विस्तार और स्थिर मांग का लाभ मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में गेहूं प्रसंस्करण स्थानीय खाद्य अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ मंडियों से आने वाला गेहूं आटा, मैदा, सूजी और चोकर जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों में परिवर्तित होता है।
ये उत्पाद मौसमी नहीं, बल्कि निरंतर खपत पर आधारित हैं — घरों, बेकरी इकाइयों और खाद्य व्यवसायों में इनकी नियमित मांग बनी रहती है। इस क्षेत्र में ब्रांडिंग से अधिक महत्व गुणवत्ता की स्थिरता, निरंतर उपलब्धता और कच्चे माल की निकटता को दिया जाता है।
बहराइच लंबे समय से एक सक्रिय अनाज मंडी के रूप में जाना जाता है, जहाँ आसपास के कृषि क्षेत्रों से गेहूं बड़ी मात्रा में आता है। यही आधार स्थानीय मिलिंग इकाइयों को मजबूत बनाता है, जो कच्चे अनाज को विभिन्न खाद्य उत्पादों में परिवर्तित करती हैं।
एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) कार्यक्रम के अंतर्गत बहराइच का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, विशेषकर गेहूं एवं आटा उत्पाद, को संस्थागत सहयोग प्राप्त हुआ है। इसमें वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच जैसे प्रावधान शामिल हैं, जिससे स्थानीय उद्यमियों को अपने व्यवसाय को विस्तार देने में मदद मिली है।
इसी क्रम में, मंगलम एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के संचालक निखिल टेकलीवाल इस क्षेत्र के विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी इकाई वर्ष 2006 से संचालित है, जबकि परिवार का अनाज व्यापार से जुड़ाव लगभग चार दशक पुराना है। व्यापार से प्रसंस्करण की ओर बढ़ना उनके लिए एक स्वाभाविक कदम था, जिससे मूल्य संवर्धन संभव हुआ।
उत्पादन प्रक्रिया में सबसे पहले किसानों से गेहूं की खरीद की जाती है। इसके बाद गेहूं की सफाई, छंटाई, धुलाई और सुखाने की प्रक्रिया होती है। फिर मिलिंग के माध्यम से इसे अलग-अलग उत्पादों — आटा, मैदा, सूजी और चोकर — में विभाजित किया जाता है।
वर्तमान में यह इकाई प्रतिदिन लगभग 600–700 क्विंटल गेहूं का प्रसंस्करण करती है और 20–25 कर्मचारियों की टीम विभिन्न कार्यों को संचालित करती है।
बहराइच में गेहूं प्रसंस्करण एक सतत प्रक्रिया है, जहाँ खेतों से मंडी और फिर मिलों तक गेहूं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है कि रोजमर्रा के खाद्य उत्पाद लगातार उपलब्ध रहें। ODOP कार्यक्रम के अंतर्गत यह क्षेत्र न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है, बल्कि मूल्य संवर्धन के माध्यम से नई संभावनाएँ भी खोल रहा है।
Edited by Ravi Pareek


