बरेली का बेंत और बाँस शिल्प: परंपरा से आधुनिक डिजाइन तक का सफर
बरेली का बेंत और बाँस फर्नीचर उद्योग पारंपरिक शिल्प और आधुनिक डिजाइन का संगम है। ODOP कार्यक्रम के अंतर्गत इसे नई पहचान मिली है, जिससे कारीगरों को प्रदर्शनियों, बाजार और निर्यात के अवसर मिल रहे हैं। यह शिल्प घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ रहा है।
आतिथ्य क्षेत्र, आधुनिक घरों और डिजाइन-आधारित रिटेल स्पेस में बेंत और बाँस के फर्नीचर की मांग तेजी से बढ़ रही है। आज के उपभोक्ता हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ-साथ बेहतर फिनिशिंग, आधुनिक डिजाइन और समकालीन इंटीरियर के अनुरूप उत्पाद चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में यह परिवर्तन स्थानीय शिल्पियों द्वारा पारंपरिक बुनाई कौशल को आधुनिक डिजाइन दृष्टिकोण के साथ जोड़कर पूरा किया जा रहा है। इससे तैयार उत्पाद पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए नए बाजार की आवश्यकताओं को भी पूरा करते हैं।
उत्पादन प्रक्रिया में कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर उसके उपचार, आकार देने, बुनाई, प्रोटोटाइप निर्माण और अंतिम उत्पाद तक सभी चरण एक व्यवस्थित प्रणाली के अंतर्गत आते हैं। बेंत मुख्यतः असम से लाया जाता है, जबकि बाँस पीलीभीत, खटीमा और गोरखपुर तराई क्षेत्र से प्राप्त होता है। उपयोग से पहले सामग्री को साफ किया जाता है, पानी में भिगोया जाता है और गर्मी देकर आवश्यक आकार दिया जाता है।
उत्पादन मुख्यतः ऑर्डर आधारित और प्रोटोटाइप-आधारित है। पहले नमूना तैयार किया जाता है, ग्राहक से अनुमोदन लिया जाता है और आवश्यक संशोधन के बाद ही उत्पादन को बढ़ाया जाता है।
एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) कार्यक्रम के अंतर्गत बरेली के इस शिल्प को प्रदर्शनी एवं मेलों में भागीदारी जैसे अवसर मिले हैं। उद्यमी अनुराग सोनकर के अनुसार, इन मंचों ने उन्हें नए बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑर्डर प्राप्त हुए, जिनमें ऑस्ट्रेलिया को निर्यात भी शामिल है।
निफ्ट (NIFT) से शिक्षित अनुराग सोनकर ने वर्ष 2019 में इस क्षेत्र में अपना उद्यम शुरू किया। उन्होंने पारंपरिक डिजाइनों को दोहराने के बजाय आधुनिक फर्नीचर और सजावटी उत्पाद — जैसे कुर्सियाँ, बेंच, लैम्प, कॉफी टेबल, प्लांटर और मिरर — विकसित किए, जो आधुनिक घरों और व्यावसायिक स्थानों के लिए उपयुक्त हैं।
प्रारंभ में 4–6 कारीगरों से शुरू हुई यह इकाई अब 20–30 लोगों की टीम के साथ कार्य कर रही है। कार्य को कौशल के आधार पर विभाजित किया गया है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है।
उत्पाद विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नए डिजाइनों को बाजार में परीक्षण के लिए साझा किया जाता है और सफल होने पर उन्हें उत्पादन में शामिल किया जाता है। हाल ही में एक नए प्लांटर डिजाइन को कम समय में 50 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए।
यह इकाई देशभर के आर्किटेक्ट्स और इंटीरियर डिजाइनर्स के साथ काम कर रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रही है। साथ ही, आसपास के गांवों की महिलाओं को बास्केटरी कार्य में प्रशिक्षित कर आजीविका के अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं।
बरेली में बेंत और बाँस का शिल्प लंबे समय से प्रचलित है, लेकिन आज डिजाइन नवाचार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से यह शिल्प आधुनिक बाजारों में नई पहचान बना रहा है।
Edited by Ravi Pareek


