फर्रुखाबाद की ज़री–जरदोज़ी: पारंपरिक कारीगरी को ODOP से मिल रही नई पहचान
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में ज़री–जरदोज़ी कारीगरी ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के अंतर्गत अधिसुचित प्रमुख हस्तकला है। यहाँ कारीगर सोने-चाँदी जैसे धातु धागों से साड़ी, लहंगा और परिधानों पर महीन कढ़ाई करते हैं। पारंपरिक अड्डा कढ़ाई से तैयार ये परिधान देश और विदेश के बाजारों तक पहुँचते हैं।
उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में ज़री–जरदोज़ी की कारीगरी लंबे समय से पारंपरिक हस्तकला का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सोने-चाँदी जैसे धातु धागों से की जाने वाली यह महीन हाथ कढ़ाई लहंगे, साड़ियाँ, सूट और विशेष अवसरों के परिधानों में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है।
यह कढ़ाई अड्डे पर की जाती है, जिसमें कपड़े को लकड़ी के फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है ताकि कारीगर बारीकी से डिज़ाइन तैयार कर सकें। कढ़ाई में कोरा, दबका, नक्शी, सिल्क धागे और मोती जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जिनकी मदद से कपड़े की सतह पर उभरे हुए और आकर्षक पैटर्न बनाए जाते हैं।
इस प्रक्रिया की शुरुआत डिज़ाइन तैयार करने से होती है, जिसे कपड़े पर स्थानांतरित कर निशान लगाए जाते हैं। इसके बाद कपड़े पर छोटे-छोटे छिद्र बनाकर एक विशेष मिश्रण लगाया जाता है ताकि डिज़ाइन स्थिर हो सके। कपड़ा सूखने के बाद अड्डे पर लगाया जाता है और कारीगर महीन सुई-धागे से कढ़ाई का कार्य आरम्भ करते हैं।
फर्रुखाबाद में ज़री–जरदोज़ी का काम एक समन्वित व्यवस्था के माध्यम से आगे बढ़ता है। डिज़ाइन तैयार करने वाले, डिज़ाइन को कपड़े पर अंकित करने वाले, कढ़ाई करने वाले कारीगर और तैयार परिधान को अंतिम रूप देने वाले सभी मिलकर इस कारीगरी की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हैं।
फर्रुखाबाद के कारीगर शादाब खान, जो लगभग 20–22 वर्षों से इस कारीगरी से जुड़े हुए हैं बताते हैं कि उन्होंने यह काम बचपन में अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर अपने मामा को देखकर सीखा। समय के साथ उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल की और आज उनके साथ कई अन्य कारीगर भी काम करते हैं।
उनके अनुसार फर्रुखाबाद में तैयार होने वाले ज़री–जरदोज़ी के परिधान बड़े व्यापारिक केंद्रों के माध्यम से देश और विदेश के बाज़ारों तक पहुँचते हैं। वे बताते हैं कि एक विशेष डिज़ाइन वाली ड्रेस को तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगा और उसकी कीमत करीब ढाई लाख रुपये रही, जो इस कारीगरी में लगने वाली मेहनत और बारीकी को दर्शाती है।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) कार्यक्रम के अंतर्गत फर्रुखाबाद की ज़री–जरदोज़ी कारीगरी को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, टूलकिट वितरण तथा प्रदर्शनियों और मेलों में भागीदारी जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों से कारीगरों और स्थानीय इकाइयों को अपने उत्पादों को व्यापक बाज़ारों तक पहुँचाने में सहायता मिल रही है।
Edited by Ravi Pareek


