कानपुर नगर के लेदर इक्वेस्ट्रियन बूट्स: वैश्विक राइडिंग बाज़ार के लिए सटीक कारीगरी
कानपुर नगर का लेदर उद्योग ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के अंतर्गत अधिसूचित है। यहाँ इक्वेस्ट्रियन राइडिंग बूट्स जैसे विशेष उत्पाद तैयार किए जाते हैं। सटीक फिटिंग, मजबूत लेदर और कुशल कारीगरी के कारण ये बूट्स अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के बाजारों तक निर्यात किए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जनपद की पहचान लंबे समय से लेदर उद्योग के लिए रही है। यहां तैयार होने वाले उत्पादों में जूते, बैग, एक्सेसरीज़ और विशेष उपयोग के लिए बनाए जाने वाले उत्पाद शामिल हैं। इन्हीं में से एक विशेष उत्पाद है इक्वेस्ट्रियन राइडिंग बूट्स, जिन्हें घुड़सवारी के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है।
ये बूट सामान्य फैशन फुटवियर से अलग होते हैं क्योंकि इनमें फिटिंग, ऊंचाई और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है। खासकर टॉल राइडिंग बूट्स के निर्माण में सटीक माप अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि एक ही साइज के लिए अलग-अलग काफ फिटिंग और ऊंचाई के कई विकल्प तैयार करने पड़ते हैं।
कानपुर नगर का विकसित लेदर उद्योग इस प्रकार के विशेष उत्पादों के निर्माण के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। टैन किया हुआ लेदर, सिंथेटिक सामग्री, सोल और अन्य आवश्यक घटक स्थानीय औद्योगिक नेटवर्क से प्राप्त किए जाते हैं, जिन्हें कुशल कारीगरों की टीम मिलकर तैयार उत्पाद में बदलती है।
जनपद के नोटिफाइड ओडीओपी उत्पाद “लेदर प्रोडक्ट्स” के रूप में इस उद्योग को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष पहचान मिली है। इस पहल के माध्यम से कानपुर नगर के लेदर उद्योग को बाजार में बेहतर पहचान और व्यापारिक अवसरों तक पहुँच बनाने में मदद मिल रही है।
ऐसी ही एक इकाई है लॉर्ड शिवा एक्सपोर्ट, जहां विनीत वर्मा इक्वेस्ट्रियन बूट्स के निर्माण से जुड़े हैं। यह इकाई घुड़सवारी के लिए उपयोग होने वाले टॉल बूट्स, शॉर्ट बूट्स और कंट्री बूट्स का उत्पादन करती है। इनमें टॉल बूट्स का निर्माण अधिक जटिल होता है क्योंकि इसमें कई प्रकार की फिटिंग और ऊंचाई के संयोजन तैयार करने पड़ते हैं।
उत्पाद की गुणवत्ता में उपयोग होने वाली सामग्री की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उच्च श्रेणी के बूट्स में अक्सर इम्पोर्टेड काउ लेदर का उपयोग किया जाता है, जो स्थानीय लेदर की तुलना में अधिक मोटा और मजबूत होता है। वहीं सामान्य श्रेणी के उत्पादों के लिए कानपुर और चेन्नई से प्राप्त घरेलू लेदर का भी उपयोग किया जाता है।
निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत लेदर के चयन से होती है। इसके बाद कटिंग, सिलाई और असेंबली की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद लास्टिंग चरण में बूट्स की संरचना और फिटिंग को अंतिम रूप दिया जाता है। फिर उपयोग के अनुसार सोल लगाए जाते हैं और उत्पाद को अंतिम रूप दिया जाता है।
कुछ विशेष उत्पादों के लिए वॉटरप्रूफ प्रदर्शन परीक्षण भी किया जाता है, ताकि बूट्स घुड़सवारी के दौरान आवश्यक सुरक्षा और आराम प्रदान कर सकें। इसके बाद उत्पादों की पैकिंग कर उन्हें निर्यात के लिए तैयार किया जाता है।
इन बूट्स का प्रमुख बाजार अंतरराष्ट्रीय है, जहां इन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों में निर्यात किया जाता है। समय के साथ इकाई की उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है, जो लगभग 150 जोड़ी प्रतिदिन से बढ़कर 250–300 जोड़ी प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
इस प्रकार की इकाइयाँ यह दर्शाती हैं कि कानपुर नगर का लेदर उद्योग वैश्विक बाजार की विशेष मांगों को पूरा करते हुए निर्यात और रोजगार दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
Edited by Ravi Pareek


