पीलीभीत का लकड़ी फर्नीचर उद्योग: सामग्री, प्रक्रिया और फिनिशिंग पर आधारित कार्यशाला मॉडल
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) कार्यक्रम के अंतर्गत पीलीभीत के फर्नीचर निर्माताओं को परियोजना आधारित सहायता मिली है, जिसमें कार्यशील पूंजी, सब्सिडी और GeM जैसे प्लेटफॉर्म पर विस्तार के लिए मार्गदर्शन शामिल है।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में लकड़ी के फर्नीचर की मांग घरेलू उपयोग, धार्मिक आवश्यकताओं और आधुनिक इंटीरियर के बढ़ते विस्तार से प्रभावित होती है। बेड, अलमारी, किचन, मंदिर, ऑफिस फर्नीचर और अन्य घरेलू उत्पाद अक्सर ग्राहक की विशेष जरूरतों के अनुसार बनाए जाते हैं। इस क्षेत्र में मांग तब स्थिर रहती है जब इकाइयाँ उचित कीमत, बेहतर फिनिशिंग और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित कर पाती हैं।
यहाँ का उत्पादन तंत्र मुख्यतः कार्यशालाओं (वर्कशॉप) पर आधारित है। कच्ची लकड़ी और बोर्ड आधारित सामग्री आसपास के क्षेत्रों से प्राप्त की जाती है, जिसके बाद उन्हें बढ़ईगीरी, सतह तैयार करने, पॉलिश, पैकिंग और परिवहन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। स्थानीय स्तर पर लकड़ी की उपलब्धता इस क्षेत्र को एक विशेष लाभ प्रदान करती है, जिससे उत्पादन चक्र अपेक्षाकृत सुगम और तेज रहता है।
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) कार्यक्रम के अंतर्गत पीलीभीत के फर्नीचर निर्माताओं को परियोजना आधारित सहायता मिली है, जिसमें कार्यशील पूंजी, सब्सिडी और GeM जैसे प्लेटफॉर्म पर विस्तार के लिए मार्गदर्शन शामिल है।
मोहम्मद मरूफ मलिक, जो “मलिक फर्नीचर” का संचालन करते हैं, इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं जिसकी शुरुआत उनके पिता मोहम्मद अफरोज मलिक ने की थी। समय के साथ यह इकाई एक व्यवस्थित कार्यशाला के रूप में विकसित हुई है, जो घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार के फर्नीचर का निर्माण करती है।
मलिक के अनुसार, कार्य की शुरुआत कच्चे माल की खरीद से होती है, जिसके बाद ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार डिजाइन तैयार किया जाता है। बढ़ई संरचना और मुख्य ढांचा तैयार करते हैं, जिसके बाद उत्पाद को आगे की प्रक्रियाओं—जैसे लैमिनेशन, पेंट फिनिश (ड्यूको या पीयू) या आवश्यकता अनुसार पत्थर के कार्य—से गुजारा जाता है।
प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग टीम होती है। पेंटिंग टीम सतह की फिनिशिंग करती है, जबकि पत्थर का कार्य अलग कारीगर संभालते हैं। सभी चरण पूरे होने के बाद उत्पाद की पॉलिश, पैकिंग और परिवहन की व्यवस्था की जाती है। अंतिम गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि हर चरण कितनी सटीकता से पूरा हुआ है।
इस इकाई में लगभग 10 से 15 लोगों की टीम कार्य करती है, जिसमें बढ़ई, पेंटर, पॉलिश करने वाले, पैकिंग स्टाफ और परिवहन से जुड़े लोग शामिल हैं। उत्पादों में लकड़ी के मंदिरों की मांग विशेष रूप से बनी हुई है, जबकि अब इकाई व्यावसायिक और ऑफिस फर्नीचर की ओर भी विस्तार कर रही है, जहाँ ऑर्डर बड़े और नियमित होते हैं।
पीलीभीत में लकड़ी के फर्नीचर का यह उद्योग कच्चे माल, कार्यशाला समन्वय और फिनिशिंग के संतुलन पर आधारित है। जब ये सभी तत्व सही तालमेल में होते हैं, तो छोटी इकाइयाँ भी बड़े ऑर्डर संभालते हुए गुणवत्ता बनाए रख पाती हैं।
Edited by Ravi Pareek


