कच्ची खाल से तैयार फिनिश तक: उन्नाव का लेदर उद्योग
उन्नाव का लेदर उद्योग कच्ची खाल से तैयार बेल्ट तक एक संगठित औद्योगिक प्रक्रिया का उदाहरण है। ODOP पहल के अंतर्गत मिली ऋण सुविधा ने स्थानीय इकाइयों को व्यापार से निर्माण की ओर बढ़ने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाज़ारों तक पहुँच बनाने में मदद की है।
Unnao, उत्तर प्रदेश में लेदर केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक संगठित औद्योगिक श्रृंखला का परिणाम है। कच्ची खालें पहले प्रसंस्करण इकाइयों से गुजरती हैं, जहाँ उन्हें नमक, रासायनिक उपचार और ड्रम प्रोसेसिंग के माध्यम से उपयोग योग्य लेदर में बदला जाता है।
उन्नाव का प्रमुख प्रसंस्करण क्षेत्र Banthar है, जहाँ यह प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होती है। इसके बाद तैयार लेदर शीट्स, विभिन्न चमड़ा उत्पादों, जैसे बेल्ट्स और अन्य उत्पादों के निर्माण में उपयोग होती हैं।
व्यापार से निर्माण की ओर
शुक्लागंज के रक्षित जायसवाल ने शुरुआत ट्रेडिंग से की, परंतु फैक्ट्री संचालन का अनुभव मिलने के बाद उन्होंने निर्माण की ओर कदम बढ़ाया। वे कहते हैं, “फिनिश ही तय करती है कि ग्राहक दोबारा आएगा या नहीं।”
निर्माण प्रक्रिया
- तैयार लेदर शीट्स से बेल्ट स्ट्रिप काटी जाती हैं।
- किनारों की सफाई और शेपिंग की जाती है।
- रंग और फिनिशिंग सामग्री लगाई जाती है।
- हीट प्रेस से सतह को स्थिर किया जाता है।
- एम्बॉसिंग मशीन से ब्रांडिंग या डिज़ाइन जोड़ा जाता है।
- बकल फिटिंग, सिलाई और पैकिंग के बाद उत्पाद डिस्पैच किया जाता है।
मासिक उत्पादन लगभग 2,000–3,000 बेल्ट का है, जो कानपुर, लखनऊ, दिल्ली और हरियाणा तक सप्लाई की जाती हैं।
विकास और समर्थन
ODOP के अंतर्गत ऋण सुविधा ने विस्तार को औपचारिक आधार दिया। इससे अनौपचारिक उधारी पर निर्भरता कम हुई और उत्पादन क्षमता बढ़ी। रक्षित जायसवाल के शब्दों में,
“बेल्ट हाथ में सही महसूस होनी चाहिए — वही असली गुणवत्ता है।”
उन्नाव का लेदर उद्योग कच्चे माल से लेकर अंतिम फिनिश तक एक अनुशासित प्रक्रिया का उदाहरण है, जो स्थानीय आजीविका और बाज़ार दोनों को जोड़ता है।
Edited by Ravi Pareek


