अमेरिकी शेयर बाजार में Vyome की धमाकेदार एंट्री; रचा इतिहास
यह सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिक शोध और वैश्विक सपनों की जीत है. जब न्यूयॉर्क में Nasdaq Opening Bell बजी, तो उसमें भारत का गौरव और तिरंगे की ताकत झलक रही थी.
भारत के लिए यह स्वतंत्रता दिवस वाकई ऐतिहासिक बन गया. स्वदेशी इनोवेशन फार्मा स्टार्टअप Vyome Therapeutics ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. अमेरिका की ReShape Lifesciences के साथ मर्जर के बाद कंपनी ने अमेरिकी शेयर बाजार Nasdaq (नैस्डैक) पर 'HIND' टिकर नाम से ट्रेडिंग शुरू की. खास बात यह रही कि यह डेब्यू भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के दिन हुआ.
यह सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिक शोध और वैश्विक सपनों की जीत है. जब न्यूयॉर्क में Nasdaq Opening Bell बजी, तो उसमें भारत का गौरव और तिरंगे की ताकत झलक रही थी.
Vyome ने रचा इतिहास
इस लिस्टिंग के साथ Vyome ने कई "फर्स्ट्स" (पहली बार) अपने नाम किए हैं. यह Iron Pillar पोर्टफोलियो की पहली कंपनी है जो पब्लिक हुई है. इन्वेस्टर और चेयरमैन कृष्णा गुप्ता के इन्वेस्टमेंट करियर में यह पहला मौका है जब उनकी किसी कंपनी ने IPO किया है, हालांकि उनके पास कई M&A (Mergers and acquisitions) एग्ज़िट्स हैं और कुछ कंपनियां IPO के करीब तक पहुंची थीं.
Vyome पहली भारतीय कंपनी बनी जिसने भारत के स्वतंत्रता दिवस पर अमेरिकी एक्सचेंज पर बेल बजाई. इसके साथ ही यह भारत की पहली IP-केंद्रित लाइफ साइंसेज़ कंपनी भी बन गई जिसने किसी बड़े अमेरिकी एक्सचेंज पर लिस्टिंग की है.
दिल्ली से नैस्डैक तक – Vyome का सफर
Vyome के को-फाउंडर शिलादित्य सेनगुप्ता, जो हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर और MIT में रिसर्चर हैं, ने इस पल को “दिल्ली से नैस्डैक तक की यात्रा” बताया. उनका कहना है कि यह भारतीय इनोवेशन फार्मा स्टार्टअप्स के लिए एक नई मिसाल है. कंपनी के CEO वेंकट नेलाभोटला और पूरी टीम ने इस सफर को लंबा और चुनौतियों से भरा बताया, लेकिन इसे अडिग जज़्बे और धैर्य का नतीजा कहा.
Vyome के ऑफिस कैम्ब्रिज (मैसाचुसेट्स) और दिल्ली में हैं. कंपनी मुख्य रूप से इम्यूनो-इंफ्लेमेटरी और रेयर बीमारियों के इलाज पर केंद्रित है. शिलादित्य सेनगुप्ता ने कहा कि उनका फोकस 100 बिलियन डॉलर के इम्यूनो-इंफ्लेमेटरी मार्केट में क्लिनिकल स्टेज एसेट्स का वैल्यू अनलॉक करने पर है.
कंपनी ने साफ किया है कि उसके पास कोई कर्ज़ नहीं है और वह पूरी तरह शेयरहोल्डर्स के हित में काम करेगी. Vyome के चेयरमैन कृष्णा गुप्ता ने कहा कि हर फैसला शेयरहोल्डर्स के हित में लिया जाएगा क्योंकि कंपनी के पास कर्ज़ नहीं है और बोर्ड पूरी तरह निवेशकों के साथ जुड़ा हुआ है.
निवेशकों की उड़ी नींद
Iron Pillar के पार्टनर मोहनजीत जॉली ने इस उपलब्धि को अपने लिए बेहद खास बताया. उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बताया कि लिस्टिंग से पहले की बेचैनी और बाद में टाइम्स स्क्वायर की रूफटॉप बार में भारतीय स्नैक्स और मिठाइयों के साथ जश्न मनाते हुए उन्हें दो दिन तक नींद नहीं आई.
उन्होंने यह भी बताया कि यह उनके लिए केवल निवेश की सफलता नहीं, बल्कि लगभग 20 साल से चले आ रहे US-India इनोवेशन कॉरिडोर में विश्वास का परिणाम है.
मर्जर के बाद Vyome का कंट्रोल
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में फाइल हुए इस मर्जर के तहत Vyome के शेयरहोल्डर्स को 91.62 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली, जबकि ReShape के शेयरहोल्डर्स को 8.38 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त हुई. ReShape ने अपनी लगभग सभी संपत्तियाँ (कैश को छोड़कर) यूके की Ninjour Health International को बेच दीं और अधिकतर देनदारियाँ Ninjour ने ले लीं. Nasdaq ने इस सौदे को "चेंज ऑफ कंट्रोल" माना और कंपनी को अपनी शुरुआती लिस्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करना पड़ा.
(feature image: X/@NasdaqExchange)



