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Sudha Upadhyaya
डॉ सुधा उपाध्याय आज की हिन्दी की लेखिकाओं में महत्वपूर्ण स्थान बना रखती हैं। अविधा सुधा उपाध्याय की सबसे बड़ी ताक़त है। अलग तेवर की वजह से डॉ सुधा उपाध्याय साहित्य और आलोचना जगत में बिलकुल अलग दिखती हैं। कविता और कहानी में जिस तरह वो समाज, इतिहास और राजनीति के सूक्ष्म बिंदुओं को पकड़ती हैं आलोचनाओं में कृति के समाजशास्त्र, सौंदर्य बोध और उसके तलीय स्वर को पकड़ने का साहस करती हैं। एक शिक्षक होने के नाते समाज के हर उस शख्स के लिए वो आवाज़ उठाती हैं जो शिक्षा से वंचित रह जा रहा है। कविता, कहानी, लेख और आलोचना में इसकी झलक साफ नज़र भी आती है। किसी अनर्गल विमर्श में न पड़कर एक स्वस्थ संवाद कायम करने में विश्वास रखती हैं। इनके दो कविता संग्रह ‘इसलिए कहूँगी मैं’और ‘बोलती चुप्पी’ प्रकाशित हो चुकी है। सुधा पेशे से अध्यापक हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में असोसिएट प्रोफेसर हैं।