10 जून: जब इज़रायल ने 6 दिन में अरब देशों को दी करारी शिकस्त
10 जून का इतिहास कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह है — फ्रांसीसी क्रांति का असर बंगाल तक, ताजमहल को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया, इटली की वर्ल्ड वॉर 2 में एंट्री, ऑक्सफोर्ड-कैम्ब्रिज बोट रेस की शुरुआत हुई थी. जानिए इस दिन से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं और आज का रोचक तथ्य.
हर दिन इतिहास में अपने साथ कई अहम घटनाएं समेटे होता है. 10 जून भी कुछ ऐसी ही ऐतिहासिक घटनाओं (10 June Ka Itihas) का गवाह बना है जिन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व के भविष्य को प्रभावित किया.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 10 जून के दिन (10 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए एक नजर डालते हैं इस दिन घटी कुछ प्रमुख घटनाओं पर—
भारत और विश्व के इतिहास में 10 जून की प्रमुख घटनाएं
1793 — फ्रांसीसी क्रांति का प्रभाव बंगाल तक
फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution — 1789–1799) एक ऐसा वैश्विक राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन था, जिसने केवल फ्रांस ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की राजनीति और उपनिवेशों को प्रभावित किया. भारत भी इस प्रभाव से अछूता नहीं रहा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां फ्रांस की उपस्थिति थी — जैसे कि पांडिचेरी, चंद्रनगर (बंगाल), माहे, कराइकल आदि. 10 जून 1793 को फ्रांस में "Reign of Terror" (आतंक का शासन) की शुरुआत मानी जाती है. इस दिन जॉर्जेस डांटन (Georges Danton) और उनके समर्थकों को गिरफ़्तार कर लिया गया था. इसके बाद, जैकोबिन नेता मैक्सिमिलियन रोबेस्पियर (Maximilien Robespierre) ने सत्ता संभाली और क्रांति को "शुद्ध" करने के नाम पर सैकड़ों लोगों को गिलोटीन से मौत की सजा दी गई.
भारत में फ्रांस की उपनिवेशिक उपस्थिति के कारण फ्रांसीसी क्रांति की विचारधारा— स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality), और बंधुत्व (Fraternity) — का असर कुछ हद तक देखा गया. चंद्रनगर, जो उस समय फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company - EIC) का एक प्रमुख बंदरगाह था, फ्रांसीसी क्रांति के विचारों के प्रचार का केंद्र बन गया. वहाँ तैनात कुछ फ्रांसीसी अधिकारियों और सैनिकों ने क्रांति समर्थक विचार अपनाए और "République Française" (फ्रांसीसी गणराज्य) के समर्थन में झंडा भी फहराया. अंग्रेजों को यह गतिविधि असुरक्षित लगी और उन्होंने बाद में चंद्रनगर पर नियंत्रण मजबूत किया.
1829 — ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज के बीच पहली बोट रेस
10 जून 1829 को ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड (Oxford University) और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (University of Cambridge) के बीच पहली आधिकारिक बोट रेस (Boat Race) का आयोजन हुआ था. यह ऐतिहासिक रेस इंग्लैंड के हेनली-ऑन-थेम्स (Henley-on-Thames) में हुई थी. इस प्रतियोगिता की शुरुआत एक अनौपचारिक चुनौती के रूप में हुई थी, जब कैम्ब्रिज के छात्र चार्ल्स मेरिवेल (Charles Merivale) ने ऑक्सफोर्ड को मुकाबले के लिए ललकारा था. दोनों टीमों में 8-8 रोअर्स होते हैं और यह मुकाबला शुरू से ही गौरव, परंपरा और प्रतिष्ठा से जुड़ा रहा है. इस पहली रेस में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी विजेता रही थी. यह आयोजन इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे एक परंपरा बना दिया गया. अब यह रेस हर साल थेम्स नदी (River Thames) पर आयोजित होती है और लाखों दर्शकों को आकर्षित करती है. ऑक्सफोर्ड-कैम्ब्रिज बोट रेस अब केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि ब्रिटेन की शैक्षणिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन चुकी है. यह परंपरा आज भी जारी है और दोनों संस्थानों के बीच यह मुकाबला खेल जगत की प्रतिष्ठित घटनाओं में गिना जाता है.
1907 — ताजमहल को संरक्षित स्मारक का दर्जा मिला
10 जून 1907 को भारत में स्थित विश्व प्रसिद्ध धरोहर ताजमहल (Taj Mahal) को औपचारिक रूप से ब्रिटिश सरकार द्वारा 'संरक्षित स्मारक' (Protected Monument) घोषित किया गया. यह निर्णय ब्रिटिश भारत में प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 (Ancient Monuments Preservation Act, 1904) के तहत लिया गया था, जो लॉर्ड कर्ज़न (Lord Curzon) द्वारा पेश किया गया था. इसका उद्देश्य भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को संरक्षण देना था, और ताजमहल पहला प्रमुख स्मारक बना जिसे इस अधिनियम के अंतर्गत सुरक्षा मिली. इस घोषणा के बाद ताजमहल के रख-रखाव, मरम्मत और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए औपचारिक प्रयास शुरू किए गए. इससे पहले ताजमहल समय और उपेक्षा के कारण क्षतिग्रस्त हो रहा था, लेकिन 1907 के बाद से इसे एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाने लगा. यह कदम भारत में विरासत संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने भविष्य में अन्य ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा के लिए भी नींव रखी. ताजमहल मुग़ल सम्राट शाहजहाँ (Shah Jahan) द्वारा अपनी बेगम मुमताज़ महल (Mumtaz Mahal) की याद में बनवाया गया था. इसका निर्माण कार्य 1632 ईस्वी में शुरू हुआ और 1648 ईस्वी में पूर्ण हुआ.
1940 — इटली की वर्ल्ड वॉर 2 में एंट्री
10 जून 1940 को इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) ने जर्मनी का साथ देते हुए ब्रिटेन और फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. यह निर्णय रोम में एक सार्वजनिक भाषण के दौरान लिया गया, जहां मुसोलिनी ने इटली को "साम्राज्य विस्तार" के लक्ष्य के साथ युद्ध में झोंकने की घोषणा की. इस कदम के साथ इटली ने औपचारिक रूप से धुरी शक्तियों (Axis Powers) — जिसमें जर्मनी और जापान भी शामिल थे — का हिस्सा बनते हुए युद्ध का दायरा और अधिक बढ़ा दिया. इटली की इस घोषणा ने यूरोप की राजनीतिक स्थिति को और अस्थिर कर दिया, खासकर भूमध्यसागर क्षेत्र में. हालांकि मुसोलिनी को उम्मीद थी कि वह जर्मनी की जीत से लाभ उठाएगा, लेकिन बाद में इटली को युद्ध में भारी नुकसान उठाना पड़ा. उसकी सेना को उत्तर अफ्रीका और बाल्कन क्षेत्रों में करारी शिकस्त मिली, और 1943 में इटली को मित्र देशों (Allied forces) के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा. मुसोलिनी की यह घोषणा द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ मानी जाती है.
1967 — छह दिवसीय युद्ध का अंत
10 जून 1967 को इज़रायल और अरब देशों — मिस्र, सीरिया और जॉर्डन — के बीच लड़ा गया छह दिवसीय युद्ध (Six-Day War) समाप्त हुआ. यह युद्ध 5 जून को शुरू हुआ था और केवल छह दिनों में इज़रायल ने निर्णायक जीत हासिल कर ली. युद्ध की समाप्ति सीरिया के साथ संघर्ष रुकने के बाद हुई, जब इज़रायली सेना ने गोलन हाइट्स पर नियंत्रण कर लिया. इससे पहले इज़रायल मिस्र से गाज़ा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, और जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पर कब्ज़ा कर चुका था. इस युद्ध का नतीजा केवल भू-राजनीतिक सीमाओं में बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मध्य-पूर्व में दशकों तक चलने वाले संघर्षों की नींव बन गया. इज़रायल की इस तेज़ और निर्णायक विजय ने उसकी सैन्य क्षमता को विश्व स्तर पर मान्यता दिलाई, वहीं अरब देशों की करारी हार ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा दी. यह युद्ध आज भी फिलिस्तीन और इज़रायल के बीच तनाव की पृष्ठभूमि के रूप में याद किया जाता है.
10 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1921 — प्रिंस फिलिप, ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के पति, ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग
1921 — शिवदीन राम जोशी, जाने-माने कवि
1931 — एम. एस. गोपालकृष्णन, भारत के प्रसिद्ध वायलिन वादक
1955 — प्रकाश पादुकोण, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी
1973 — रूप कुमार राठौड़, भारतीय संगीत निर्देशक और पार्श्व गायक
1981 — देवेन्द्र झाझड़िया, भारत के एथलीट
10 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1957 — भाई वीर सिंह, आधुनिक पंजाबी काव्य और गद्य के निर्माता के रूप में प्रसिद्ध कवि
1987 — जीवन, हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता
2019 — गिरीश कर्नाड, कवि, कहानी लेखक, नाटककार, फ़िल्म निर्देशक और फ़िल्म अभिनेता
2019 — आर. वी. जानकीरमन, केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि आज ही के दिन, 10 जून 1935 को Alcoholics Anonymous (AA) की स्थापना हुई थी? यह वही दिन था जब इसके को-फाउंडर डॉ. रॉबर्ट स्मिथ (Dr. Robert Smith) ने आखिरी बार शराब पी थी. इस दिन को AA आंदोलन की शुरुआत के तौर पर याद किया जाता है, जिसने दुनियाभर में लाखों लोगों को शराब की लत से छुटकारा पाने में मदद की.
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