World Sight Day: क्या स्क्रीन पर ज्‍यादा समय बिताने से आंखों की रोशनी संबंधी बीमारियां बढ़ती हैं?

By yourstory हिन्दी
October 13, 2022, Updated on : Thu Oct 13 2022 04:58:54 GMT+0000
World Sight Day: क्या स्क्रीन पर ज्‍यादा समय बिताने से आंखों की रोशनी संबंधी बीमारियां बढ़ती हैं?
स्क्रीन टाइम की वजह से ड्राई आइज़, फोकस करने में परेशानी और आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं, आंखों की मांसपेशियों पर बोझ पड़ने की वजह से होती हैं. यहां कुछ ऐसी बातें दी गई हैं, जो आपकी आंखों को स्वस्थ रख सकती हैं:
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इस साल, 13 अक्टूबर को, विश्व दृष्टि दिवस (World Sight Day) मनाया जा रहा है और इसका लक्ष्य जागरूकता फैलाना और लोगों को आंखों की सेहत को महत्व देने के लिये प्रोत्साहित करना है. सुरक्षात्मक कदम उठाने, नियमित जांच और समय पर उपचार मददगार हो सकता है. अपने स्क्रीन टाइम का ध्यान रखना ना भूलें और साथ ही अपनी आंखों तथा पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिये एक सेहतमंद और एक्टिव लाइफस्टाइल बनाए रखें.


हम अपने फोन को देखने में काफी वक्त बिताते हैं, लेकिन क्या फोन की स्क्रीन हमारे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकती है? सबसे ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले टॉप तीन देशों में से भारत एक है. वहीं, 1 करोड़ लोग रेटिना संबंधी बीमारियों  से ग्रसित हैं. स्मार्टफोन, कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, भारत में आंखों की बीमारियों के बढ़ते बोझ का मुख्य कारण है.

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सांकेतिक चित्र (freepik)

रेटिना के अच्छे स्वास्थ्य के लिये सबसे महत्वपूर्ण चीज है, एक ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग विशेषज्ञ से नियमित रूप से आंखों की जांच करवाना, यह बीमारियों को रोकने में मदद कर सकता है या प्रारंभिक अवस्था में स्थितियों का पता लगाने में मदद कर सकता है. इससे सही उपचार के साथ-साथ समय पर बीमारी का प्रबंधन करने और आंखों के देखने की क्षमता कम होने से रोकने में सहायता मिल सकती है. उम्र से संबंधी मैक्यूलर डिजेनरेशन (एएमडी) और डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर) जैसे रोग सही समय पर प्रबंधित नहीं होने पर महत्वपूर्ण दृष्टि हानि का कारण बन सकते हैं.


डॉ. महिपाल एस सचदेव, चेयरमैन - सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, दिल्ली का कहना है, “भारत में अभी भी लाखों ऐसे लोग हैं जोकि मोतियाबिंद से अंधे हो रहे हैं, जबकि उनकी आंखों की रोशनी को ठीक किया जा सकता है. वहीं, ग्लूकोमा से पीड़ित 40 साल या उससे अधिक उम्र के लोग, उचित थैरेपी के बिना स्थाई रूप से अंधे हो जाते हैं. एक और गंभीर रोग है जोकि आज की युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रहा है, वह है डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा (डीएमई), जोकि ना केवल पूरी तरह से बचावकारी है, बल्कि नियमित एक्सरसाइज, संतुलित भोजन और डायबिटीज मेलिटस जैसे लक्षणों वाली समस्याओं पर सख्त नियंत्रण के साथ-साथ उपचार का पालन करते हैं, इसके समय को आगे बढ़ा सकते हैं.“


साथ ही वह कहते हैं, “लोगों के लिये यह बेहद जरूरी है कि वे कम उम्र से ही अपनी आंखों की सेहत को बनाए रखें. नियमित जांच, खासकर ऐसे लोगों में जिन्हें डायबिटीज, अधिक उम्र, आंखों के रोग जैसी पहले से ही समस्याएं हैं तो उनमें समय पर इसका पता लग सकता है और इलाज किया जा सकता है.”


डॉ. विशाली गुप्ता, प्रोफेसर, विटेरोरेटिनल एंड यूविया, एडवांस्ड आई सेंटर, पीजीआई चंडीगढ़, का कहना है, “भारत में आंखों की बीमारियों के बढ़ते प्रसार के कारण, बचावकारी अंधापन और दृष्टिबाधा का काफी ज्यादा बोझ है. मोतियाबिंद- आंखों की एक सामान्य समस्या है- जिसका इलाज सर्जरी के जरिए किया जाता है, यह अंधेपन को रोक सकता है. आयुष्मान भारत योजना में तो रोगी तय केंद्रों पर बिना शुल्क के इस सर्जरी को करवा सकते हैं. इसके अलावा कई सारे एनजीओ के साथ-साथ सरकार के द्वारा ग्लूकोमा की समय पर पहचान और निदान के लिये कई सारे अभियान चलाए जाते हैं. इसके लिये दवाओं के साथ लंबे समय तक प्रबंधन की जरूरत होती है, ताकि इंट्राऑक्यूलर दबाव को नियंत्रित रखा जा सके. वैसे तो ग्लूकोमा का कोई गंभीर लक्षण नजर नहीं आता, लेकिन धीरे-धीरे होने वाले दृष्टिदोष को ठीक नहीं किया जा सकता है और ऐसे में थैरेपी कराने की जरूरत पड़ती है.”


अत्यधिक स्क्रीन टाइम की वजह से आंखों से जुड़ी समस्याएं -


  • ड्राई आइज़: लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहने के कारण हम आवश्यकतानुसार पलकें नहीं झपका पाते. यह आंखों की सतह की रक्षा करने वाले आंसुओं की परत को एक्सपोज करता है और सूखेपन और जलन का कारण बनता है.

     

  • आंखों की थकान: अस्थेनोपिया, ऑक्यूलर फैटीग या आंखों की थकान एक ऐसी समस्या है, जहां आंखें ज्यादा उपयोग से थक जाती हैं. यह लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन या स्मार्टफोन को देखते रहने का एक सामान्य प्रभाव है और आसानी से दूर हो सकता है.


  • एज-रिलेक्टेड मैक्यूलर डिजेनरेशन (एएमडी): एएमडी केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करता है और वृद्ध लोगों में काफी आम है. चूंकि, स्क्रीन से नीली रोशनी के अत्यधिक संपर्क में आने से रेटिना को नुकसान पहुंचता है, यह एएमडी की शुरूआत है और अंततः दृष्टि की हानि को ट्रिगर करता है. हालांकि, जल्दी एएमडी का पता लगाकर, आप इस स्थिति के लिये प्रभावी उपचार पा सकते हैं और दृष्टि हानि के रोके जाने योग्य परिणाम से बच सकते हैं.


  • निकट दृष्टिदोष: मायोपिया या निकट दृष्टिदोष एक ऐसी समस्या है, जहां दूर की चीजें देखने में परेशानी होती है या वह धुंधला दिखता है, वहीं पास की चीजें साफ नजर आती हैं. घर के अंदर रहने और लंबे समय तक स्क्रीन को देखने से आपकी आंखों का फोकस आपके हाथ की लंबाई जितना रह जाता है, जिसकी वजह से आपको निकट दृष्टिदोष का खतरा हो सकता है.


स्क्रीन टाइम की वजह से ड्राई आइज़, फोकस करने में परेशानी और आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं, आंखों की मांसपेशियों पर बोझ पड़ने की वजह से होती हैं. यहां कुछ ऐसी बातें दी गई हैं, जो आपकी आंखों को स्वस्थ रख सकती हैं:


  • आंखों को झपकाना और हाइड्रेशन आईड्रॉप का इस्तेमाल, ड्राई आइज़ की समस्या से बचा सकता है.


  • सिर के ऊपर की रोशनी को इस तरह से एडजस्ट करें कि स्क्रीन की चमक कम से कम हो और कंप्यूटर स्क्रीन से कम से कम एक हाथ की दूरी रखें.


  • स्ट्रेन को कम करने के लिये कंटेंट का आकार बढ़ा लें और हर 30-40 मिनट बाद ब्रेक लें.

Edited by रविकांत पारीक