14 जून: रमन को शांति पुरस्कार, नेपोलियन जीते और ट्रंप जन्मे
14 जून का इतिहास विज्ञान, राजनीति और महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों से भरा है. जानिए कैसे इस दिन हुईं US Army की स्थापना, मारेंगो की लड़ाई, पेरिस पर कब्जा, सी.वी. रमन को मिला सम्मान और क्यों मनाते हैं World Blood Donor Day. आज का रोचक तथ्य भी पढ़ें!
इतिहास के पन्नों में हर दिन कुछ ना कुछ खास लेकर आता है. 14 जून (14 June Ka Itihas) भी ऐसा ही एक दिन है, जिसे दुनिया ने कभी विज्ञान की क्रांति, कभी राजनीतिक बदलाव और कभी महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों के रूप में याद किया.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 14 जून के दिन (14 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं 14 जून को इतिहास में क्या-क्या हुआ था —
भारत और विश्व के इतिहास में 14 जून की प्रमुख घटनाएं
1775 — अमेरिका में ‘यूएस आर्मी’ की स्थापना
14 जून 1775 को अमेरिका की महाद्वीपीय कांग्रेस (Continental Congress) ने औपचारिक रूप से एक राष्ट्रीय सेना यानी "Continental Army" के गठन को मंजूरी दी थी. यह फैसला ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ चल रहे अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि में लिया गया था. इस सेना को बाद में "United States Army" के रूप में विकसित किया गया. जनरल जॉर्ज वॉशिंगटन (George Washington) को इस नवगठित सेना का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया. यह वही वॉशिंगटन थे, जो आगे चलकर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने. इस फैसले ने अमेरिकी उपनिवेशों को एक संयुक्त सैन्य शक्ति के रूप में संगठित किया, जो ब्रिटेन की अनुभवी सेना का मुकाबला कर सके. इस कदम ने अमेरिका के स्वतंत्र राष्ट्र बनने की दिशा में एक मजबूत नींव रखी. 14 जून को हर साल अमेरिका में "आर्मी बर्थडे" (Army Birthday) के रूप में भी मनाया जाता है.
1800 — मारेंगो की लड़ाई में नेपोलियन की जीत
14 जून 1800 को इटली के मारेंगो (Marengo) में फ्रांसीसी सेना और ऑस्ट्रियाई सेना के बीच एक निर्णायक युद्ध हुआ, जिसे मारेंगो की लड़ाई (Battle of Marengo) कहा जाता है. इस युद्ध में फ्रांस के प्रथम कॉन्सुल नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) ने ऑस्ट्रिया की ताकतवर सेना को पराजित किया. यह लड़ाई नेपोलियन की सैन्य रणनीति, दृढ़ इच्छाशक्ति और युद्ध के दौरान हालात को अपने पक्ष में मोड़ने की कला का शानदार उदाहरण थी. इस जीत ने नेपोलियन की सत्ता को फ्रांस में और अधिक मज़बूती दी और इटली में फ्रांसीसी प्रभाव को पुनर्स्थापित किया. युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया को पीछे हटना पड़ा और फ्रांस को उत्तरी इटली पर दोबारा नियंत्रण मिल गया. मारेंगो की लड़ाई ने न केवल नेपोलियन की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया, बल्कि यह फ्रांस की सैन्य श्रेष्ठता का प्रतीक भी बन गई.
1901 — ब्रिटेन में पहली पेशेवर गोल्फ प्रतियोगिता का आयोजन
14 जून 1901 को लंदन के Royal Wimbledon Golf Club में पहली बार एक औपचारिक ब्रिटिश प्रोफेशनल गोल्फ टूर्नामेंट (British Professional Golf Tournament) का आयोजन किया गया. यह आयोजन ब्रिटेन में पेशेवर गोल्फ को संगठित रूप से बढ़ावा देने के लिए किया गया था. इस प्रतियोगिता को "Professional Golfers' Association" (PGA) के गठन की दिशा में एक शुरुआती कदम के रूप में भी देखा जाता है, जिसकी स्थापना आगे चलकर 1901 में ही हुई थी. इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में ब्रिटेन के कई प्रमुख पेशेवर गोल्फ खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, और यह खेल जगत में गोल्फ की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत था. 20वीं सदी की शुरुआत में यह आयोजन गोल्फ को एक शौकिया खेल से आगे ले जाकर पेशेवर खेल के रूप में स्थापित करने का अहम मोड़ साबित हुआ. आज प्रोफेशनल गोल्फ दुनिया भर में एक प्रमुख खेल बन चुका है, जिसकी नींव ऐसे आयोजनों ने ही रखी थी.
1940 — जर्मन सेना का पेरिस पर कब्जा
14 जून 1940 को द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान जर्मन सेना ने फ्रांस की राजधानी पेरिस पर कब्जा कर लिया. जैसे ही जर्मन सैनिक शहर में दाखिल हुए, लाउडस्पीकर से घोषणा हुई कि रात 8 बजे से कर्फ्यू रहेगा. इससे पहले फ्रांसीसी प्रधानमंत्री पॉल रेयानो (Paul Reynaud) ने अमेरिका से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट (Franklin Roosevelt) ने सिर्फ गुप्त रूप से भौतिक सहायता देने का वादा किया, क्योंकि अमेरिका सार्वजनिक रूप से युद्ध में कूदना नहीं चाहता था. पेरिस पर कब्जे से पहले ही करीब 20 लाख लोग शहर छोड़ चुके थे. जर्मन गेस्टापो ने कब्जे के तुरंत बाद गिरफ्तारियां और जासूसी शुरू कर दी. आर्क डे ट्रायंफ (Arc de Triomphe) पर नाज़ी झंडा फहरा दिया गया. वहीं, इसी दिन अमेरिका ने जर्मनी और इटली की अमेरिका में मौजूद संपत्तियों को फ्रीज़ कर दिया—जो एक अहम राजनयिक संदेश था कि अमेरिका तटस्थ नहीं रहेगा.
1958 – डॉ. सी. वी. रमन को मिला लेनिन शांति पुरस्कार
14 जून 1958 को भारत के महान वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन (Dr. CV Raman) को सोवियत संघ द्वारा लेनिन शांति पुरस्कार (Lenin Peace Prize) से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान और वैश्विक शांति व सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया. डॉ. रमन पहले भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्हें इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया. डॉ. सी. वी. रमन को "रमन प्रभाव" (Raman Effect) की खोज के लिए 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था, लेकिन उन्होंने विज्ञान को केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने जीवन भर शिक्षा, शोध और विज्ञान के जनकल्याण में उपयोग को बढ़ावा दिया. लेनिन शांति पुरस्कार उनकी वैज्ञानिक सोच और मानवता के प्रति समर्पण का वैश्विक स्तर पर मिला एक सम्मान था.
14 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1868 — कार्ल लैंडस्टैनर, नोबेल पुरस्कार विजेता ऑस्ट्रियाई-अमेरिकी जीवविज्ञानी, चिकित्सक
1920 — केदार पांडे, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री
1922 — के. आसिफ़, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक (मुगल-ए-आज़म फिल्म के लिए मशहूर)
1928 — चे ग्वेरा, क्यूबा क्रांति के नायक और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में से एक
1946 — डोनाल्ड ट्रंप, संयुक्त राज्य अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति
1955 — किरण खेर, भारतीय अभिनेत्री व राजनेत्री
1967 — कुमार मंगलम बिड़ला, आदित्य बिड़ला समूह के भारतीय उद्योगपति
14 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1920 — मैक्स वेबर, प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक एवं इतिहासकार
1961 — के एस कृष्णन, प्रख्यात भौतिक वैज्ञानिक
2011 — असद अली ख़ाँ, भारतीय संगीतकार और रुद्रवीणा वादक
2020 — सुशांत सिंह राजपूत, भारतीय फ़िल्म अभिनेता
14 जून को क्यों याद रखा जाए?
विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2004 में पहली बार 14 जून को World Blood Donor Day के रूप में मनाना शुरू किया था. यह दिन महान ऑस्ट्रियन वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर (Karl Landsteiner) के जन्मदिवस पर मनाया जाता है, जिन्होंने रक्त समूह प्रणाली (ABO Blood Group) की खोज की थी. यह खोज चिकित्सा विज्ञान में क्रांति के समान थी. इस साल इसकी थीम है: "Give blood, give hope: together we save lives" जिसका मतलब है: "खून दें, उम्मीद दें: मिलकर जान बचाएं"
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि 14 जून 1949 को अमेरिका ने पहली बार एक बंदर को अंतरिक्ष में भेजा था. 'अल्बर्ट II' (Albert II), जो एक रीसस प्रजाति का बंदर था, अंतरिक्ष तक पहुँचने वाला पहला बंदर बना. उसे V2 रॉकेट के ज़रिए 134 किलोमीटर की ऊँचाई तक भेजा गया. अल्बर्ट II लॉन्च के दौरान सुरक्षित रहा, लेकिन वापसी के समय पैराशूट फेल हो गया और वह लैंडिंग में बच नहीं सका. यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक अहम मील का पत्थर साबित हुआ.
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