12 जून: इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द, नेल्सन मंडेला को उम्रकैद
12 जून का दिन इतिहास में बड़े मोड़ों से भरा है—इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द हुआ, नेल्सन मंडेला को उम्रकैद मिली और रीगन ने बर्लिन की दीवार गिराने की ललकार दी. जानिए इस दिन से जुड़ी चौंकाने वाली घटनाएं और आज का रोचक तथ्य.
हर दिन इतिहास के पन्नों में कोई न कोई अहम मोड़ लेकर आता है, और 12 जून भी इससे अछूता नहीं है. यह तारीख विश्व और भारत दोनों के इतिहास (12 June Ka Itihas) में अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं की साक्षी रही है—चाहे वह राजनीतिक बदलाव हो, सामाजिक आंदोलन, विज्ञान की प्रगति या फिर कला-संस्कृति से जुड़ी उपलब्धियाँ.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 12 जून के दिन (12 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए, एक नजर डालते हैं 12 जून को घटी कुछ ऐतिहासिक घटनाओं पर —
भारत और विश्व के इतिहास में 12 जून की प्रमुख घटनाएं
1898 — फिलीपींस को मिली स्वतंत्रता
12 जून 1898 को फिलीपींस ने स्पेन से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा (Philippine independence declared) की. यह ऐतिहासिक घोषणा फिलीपींस के क्रांतिकारी नेता जनरल एमिलियो अगुइनाल्दो (Emilio Aguinaldo) ने काविटे प्रांत में अपने निवास स्थान पर की थी. इस अवसर पर पहली बार फिलीपींस का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और देश का राष्ट्रगान भी बजाया गया. यह घटना स्पेनिश-अमेरिकी युद्ध (Spanish-American War) के बीच घटी, जब स्पेन की ताकत कमजोर हो रही थी और अमेरिका का हस्तक्षेप बढ़ रहा था.
हालांकि यह घोषणा फिलीपींस की आकांक्षा का प्रतीक थी, लेकिन उसे तत्काल अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली. कुछ ही महीनों बाद, 1898 की पेरिस संधि (Treaty of Paris 1898) के तहत स्पेन ने फिलीपींस को अमेरिका को सौंप दिया, जिससे देश अमेरिकी उपनिवेश बन गया. इसके बावजूद, 12 जून को फिलीपींस का राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया.
1942 — ऐनी फ्रैंक को मिली वो डायरी जो इतिहास बन गई
12 जून 1942 को ऐनी फ्रैंक (Anne Frank), जो उस समय एम्स्टर्डम (Amsterdam) में रह रही एक 13 वर्षीय यहूदी (Jewish) लड़की थीं, को अपने जन्मदिन पर एक डायरी उपहार में मिली. इस डायरी में उन्होंने अपनी जिंदगी, डर, उम्मीदें और भावनाएं दर्ज करनी शुरू कीं. कुछ ही हफ्तों बाद, 6 जुलाई 1942 को ऐनी का परिवार नाज़ी (Nazi) उत्पीड़न से बचने के लिए एक गुप्त ठिकाने में छिप गया. दो वर्षों तक फ्रैंक परिवार और चार अन्य लोग एक तंग गुप्त ऐनेक्स (Secret Annex) में छिपे रहे, जहां कुछ भरोसेमंद गैर-यहूदी मित्रों ने उन्हें भोजन और ज़रूरी चीज़ें मुहैया कराईं.
4 अगस्त 1944 को गेस्टापो (नाज़ी गुप्त पुलिस) को किसी मुखबिर से सूचना मिली और उन्होंने गुप्त ठिकाने पर छापा मारा. ऐनी और उनका परिवार ऑशविट्ज़ (Auschwitz) भेजा गया, जहां ऐनी की मां की मृत्यु हो गई. बाद में ऐनी और उनकी बहन मार्गोट को बर्गन-बेलसेन (Bergen-Belsen) नामक यातना शिविर में भेजा गया, जहां 1945 की शुरुआत में टाइफस से दोनों की मौत हो गई — ऐनी की मृत्यु मार्च 1945 में हुई, युद्ध समाप्त होने से कुछ ही हफ्ते पहले. उनके पिता ऑटो फ्रैंक, अकेले जीवित बचे, जिन्हें बाद में ऐनी की छुपाई हुई डायरी मिली. उन्होंने इसे 1947 में "The Diary of a Young Girl" के रूप में प्रकाशित कराया, जो आज भी दुनिया भर में युद्ध और मानवता के इतिहास की सबसे मार्मिक गाथाओं में गिनी जाती है. इस किताब का अनुवाद 75 से अधिक भाषाओं में किया जा चुका है.
1964 — नेल्सन मंडेला को उम्रकैद की सजा
12 जून 1964 को दक्षिण अफ्रीका की प्रिटोरिया अदालत में नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) और उनके साथियों को 'रिवोनिया ट्रायल' (Rivonia Trial) के दौरान देशद्रोह, विध्वंस और सरकार गिराने की साजिश जैसे गंभीर आरोपों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई. मंडेला अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) के नेता थे और उन्होंने रंगभेद नीति के खिलाफ शांतिपूर्ण और सशस्त्र दोनों तरह के आंदोलन किए थे. अदालत में उन्होंने बिना डर के कहा था, “मैंने एक आदर्श के लिए संघर्ष किया है, जिसके लिए मैं मरने को भी तैयार हूं.”
इस फैसले के बाद मंडेला को रॉबेन आइलैंड (Robben Island) की जेल में भेजा गया, जहां उन्होंने करीब 18 साल कैद में बिताए और कुल मिलाकर 27 साल तक जेल में रहे. लेकिन यह सजा उनकी आवाज़ को दबा नहीं सकी—बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार, समानता और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में स्थापित कर दिया. अंततः 1990 में उनकी रिहाई हुई और 1994 में वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने. यह घटना दुनिया भर में नस्लवाद और अन्याय के खिलाफ लड़ाई की प्रेरणा बनी.
1975 — इंदिरा गांधी के चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध ठहराया
12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के 1971 रायबरेली लोकसभा चुनाव को चुनावी भ्रष्टाचार (electoral malpractice) के आधार पर अमान्य (illegal) करार दिया. यह फैसला जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा (Justice Jagmahan Lal Sinha) ने सुनाया था, जिसमें कहा गया कि इंदिरा गांधी ने सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया था — जैसे सरकारी अधिकारियों की चुनाव प्रचार में मदद लेना. इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने उनके सांसद पद को रद्द कर दिया और छह साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी.
इस ऐतिहासिक फैसले ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया. इंदिरा गांधी ने पहले इस्तीफा देने से इनकार किया, फिर 25 जून 1975 को देश में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया, जो 21 महीने तक चला. इस दौरान नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई. यह घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी परीक्षा बनी और आने वाले दशकों की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया.
1987 — रीगन की ललकार और बर्लिन की दीवार
12 जून 1987 को, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन (Ronald Reagan) ने पश्चिम बर्लिन के ब्रैंडेनबर्ग गेट (Brandenburg Gate) के सामने एक ऐतिहासिक भाषण दिया था. इस भाषण में उन्होंने सोवियत संघ (Soviet Union) के नेता मिखाइल गोर्बाचेव (Mikhail Gorbachev) को सीधी चुनौती देते हुए कहा, "Mr. Gorbachev, tear down this wall!" यह वाक्य शीत युद्ध (Cold War) के दौरान स्वतंत्रता और लोकतंत्र की वैश्विक मांग का प्रतीक बन गया. उस समय बर्लिन की दीवार (Berlin Wall) 26 वर्षों से जर्मनी को दो हिस्सों में बांट रही थी — कम्युनिस्ट (Communist) पूर्व जर्मनी और लोकतांत्रिक पश्चिम जर्मनी.
रीगन का यह भाषण केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय दबाव और जनभावनाओं को नई ऊर्जा दी. इस भाषण के दो साल बाद, 9 नवंबर 1989 को आखिरकार बर्लिन की दीवार गिरा दी गई. यह घटना न केवल जर्मनी के पुनर्मिलन की शुरुआत थी, बल्कि शीत युद्ध के अंत और सोवियत संघ के पतन की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हुई. रीगन का यह भाषण आज भी वैश्विक राजनीति में साहसिक नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है.
12 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1932 — पद्मिनि, हिन्दी, तमिल और मलयालम फ़िल्मों की अभिनेत्री
1932 — ई. श्रीधरन, मेट्रो मैन के नाम से मशहूर सिविल इंजीनियर. कोंकण रेलवे और दिल्ली में मेट्रो रेल का श्रेय इन्हीं को जाता है
1957 — नरेन्द्र सिंह तोमर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ
1957 — जावेद मियांदाद, पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी
12 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1972 — डी.जी तेंदुलकर, महात्मा गाँधी की जीवनी के लेखक
1976 — गोपीनाथ कविराज, संस्कृत के विद्वान और महान दार्शनिक
1999 — जलगम वेन्गला राव, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री
2000 — पी.एल देशपांडे, मराठी लेखक
2015 — नेक चन्द सैनी, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित चंडीगढ़ के विश्व प्रसिद्ध रॉक गार्डन के निर्माता
2017 — सी. नारायण रेड्डी, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तेलुगु भाषा के प्रख्यात कवि
12 जून को क्यों याद रखा जाए?
विश्व बालश्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour): विश्व बालश्रम निषेध दिवस हर साल 12 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बच्चों से जबरन करवाए जाने वाले श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाना और इसे समाप्त करने की दिशा में प्रयास करना है. इस दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने साल 2002 में की थी, ताकि वैश्विक स्तर पर बालश्रम की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सके और इसके समाधान के लिए सरकारों, संगठनों और आम जनता को प्रेरित किया जा सके. वर्ष 2025 तक सभी प्रकार के बालश्रम को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. 2025 में विश्व बालश्रम निषेध दिवस की थीम है: "Progress is clear, but there's more to do: let’s speed up efforts!" जिसका मतलब है: "प्रगति स्पष्ट है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है: आइए, प्रयासों में तेजी लाएं!"
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि आज ही के दिन 1965 में "नीली आकाशगंगाओं" (Blue Galaxies) की खोज की घोषणा की गई थी? यह खोज ब्रह्मांड की उत्पत्ति (Creation of the Universe) से जुड़ी बिग बैंग थ्योरी (Big Bang Theory) का समर्थन करती है.
संपादक की कलम से: अगर आप ऐसे ही इतिहास के अनसुने पन्नों में रुचि रखते हैं, तो जुड़े रहिए हमारे साथ हर दिन की ऐतिहासिक झलकियों के लिए.




