18 जून: नेपोलियन की हार, गोवा में बजा आज़ादी का पहला बिगुल
18 जून का इतिहास कई ऐतिहासिक घटनाओं से भरा है — नेपोलियन की वाटरलू में हार, गोवा क्रांति की शुरुआत, अमेलिया इयरहार्ट की उड़ान, भारत विभाजन योजना का खुलासा और पहली अमेरिकी महिला अंतरिक्ष यात्री सैली राइड की उड़ान. जानिए आज के दिन से जुड़ी रोचक और ऐतिहासिक जानकारियां.
हर दिन इतिहास में कुछ न कुछ ऐसा घटता है जो भविष्य की दिशा तय करता है। 18 जून का दिन (18 June Ka Itihas) भी विश्व और भारतीय इतिहास में कई अहम घटनाओं का साक्षी रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 18 जून के दिन (18 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
इस लेख में हम जानेंगे कि 18 जून को क्या-क्या महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की धारा को मोड़ दिया —
भारत और विश्व के इतिहास में 18 जून की प्रमुख घटनाएं
1812 — अमेरिका ने ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की
18 जून 1812 को अमेरिका ने आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी, जिससे War of 1812 की शुरुआत हुई. यह युद्ध मुख्य रूप से अमेरिका और ब्रिटिश साम्राज्य के बीच समुद्री अधिकारों, व्यापारिक प्रतिबंधों और अमेरिकी संप्रभुता के उल्लंघनों को लेकर हुआ. ब्रिटिश नौसेना द्वारा अमेरिकी नाविकों को जबरन भर्ती (Impressment) किया जाना, अमेरिकी जहाजों पर हमला और अमेरिका की व्यापारिक गतिविधियों में हस्तक्षेप इस युद्ध के प्रमुख कारण थे. इसके अलावा, अमेरिका को संदेह था कि ब्रिटेन उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों को हथियार देकर पश्चिमी सीमाओं पर अमेरिकी विस्तार को रोकने की साजिश कर रहा है.
यह युद्ध 1812 से 1815 तक चला और इसका मुख्य रणक्षेत्र अमेरिका, कनाडा और अटलांटिक महासागर के आसपास रहा. इसमें वॉशिंगटन डी.सी. पर ब्रिटिश हमला और व्हाइट हाउस को जलाए जाने जैसी घटनाएं भी शामिल रहीं. हालांकि युद्ध में कोई निर्णायक सैन्य जीत नहीं हुई, लेकिन 24 दिसंबर 1814 को बेल्जियम के घेंट शहर में "घेंट की संधि" (Treaty of Ghent) पर हस्ताक्षर हुए, जिससे युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त हुआ. यह संधि फरवरी 1815 में लागू हुई और दोनों देशों ने युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करने पर सहमति जताई. इस युद्ध ने अमेरिका में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया और "Star-Spangled Banner" गीत की प्रेरणा भी इसी युद्ध से मिली, जो बाद में अमेरिका का राष्ट्रीय गान बना.
1815 — वाटरलू की ऐतिहासिक लड़ाई — नेपोलियन की अंतिम हार
18 जून 1815 को बेल्जियम के वाटरलू नामक स्थान पर यूरोपीय इतिहास की एक निर्णायक और ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी गई, जिसे "वाटरलू की लड़ाई" (Battle of Waterloo) कहा जाता है. इस युद्ध में फ्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) की सेना को ब्रिटेन के ड्यूक ऑफ वेलिंग्टन आर्थर वेलेस्ली (Arthur Wellesley) और प्रुशिया के जनरल गेबहार्ड लेबेरेख्त ब्लूखर (Gebhard Leberecht von Blücher) के नेतृत्व में संयुक्त ब्रिटिश-प्रुशियन सेनाओं ने निर्णायक रूप से पराजित कर दिया. यह युद्ध नेपोलियन के सौ दिन (Hundred Days) के शासन का अंत साबित हुआ, जो उन्होंने फ्रांस में एल्बा द्वीप (Elba island) से लौटने के बाद दोबारा शुरू किया था. इस हार के बाद नेपोलियन को दोबारा सत्ता से हटाया गया और इस बार उन्हें सेंट हेलेना द्वीप (Saint Helena island) पर निर्वासित कर दिया गया, जहाँ 1821 में उनकी मृत्यु हुई. वाटरलू की लड़ाई सिर्फ एक सैन्य हार नहीं थी, बल्कि इसने यूरोप के राजनीतिक मानचित्र को बदल दिया और फ्रांसीसी क्रांति के बाद उपजे नेपोलियन युग का पूर्ण अंत किया. 'वाटरलू' शब्द आज भी किसी की निर्णायक हार का प्रतीक बन चुका है.
1928 — अमेलिया इयरहार्ट बनीं अटलांटिक महासागर पार करने वाली पहली महिला
18 जून 1928 को अमेलिया इयरहार्ट (Amelia Earhart) ने इतिहास रचते हुए अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) को पार करने वाली पहली महिला बनने का गौरव प्राप्त किया. हालांकि इस उड़ान में वे पायलट नहीं थीं, बल्कि एक यात्री के तौर पर शामिल थीं. इस ट्रांस-अटलांटिक फ्लाइट का संचालन पायलट विलमर स्टल्ट्ज (Wilmer Stultz) और सह-पायलट लुइस गॉर्डन (Lou Gordon) ने किया था. यह फ्लाइट न्यूफ़ाउंडलैंड (कनाडा) से उड़ान भरकर इंग्लैंड के पास वेल्स में लैंड हुई थी. इस मिशन में अमेलिया ने उड़ान से जुड़े रिकॉर्ड्स और लॉग्स संभाले और महिला उड्डयन में अपनी मजबूत पहचान बनाना शुरू किया.
हालांकि उन्होंने खुद यह कहा था कि वह सिर्फ एक "बैग की तरह" यात्रा कर रही थीं, लेकिन इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कर दिया. इसके बाद 1932 में उन्होंने अटलांटिक को अकेले पार करने वाली पहली महिला पायलट बनकर असली उड़ान का इतिहास रचा. अमेलिया इयरहार्ट का यह सफर न सिर्फ एविएशन के इतिहास में एक मील का पत्थर था, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी क्षमताओं को दुनिया के सामने लाने वाला प्रेरणास्रोत भी बना.
1946 — गोवा क्रांति दिवस
18 जून 1946 को गोवा की पुर्तगाली हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा मिली. इस दिन डॉ. राम मनोहर लोहिया (Dr. Ram Manohar Lohia) ने गोवा के लोगों को पुर्तगाली शासन के खिलाफ खुलकर आंदोलन करने के लिए प्रेरित किया. उस समय पुर्तगाल ने गोवा, दमन और दीव पर 450 वर्षों से कब्जा कर रखा था और भारतीय स्वतंत्रता के बाद भी उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं था. डॉ. लोहिया ने गोवा में ब्रिटिश भारत की आजादी की तर्ज पर सिविल नाफरमानी आंदोलन (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की और लोगों से खुलकर विरोध करने का आह्वान किया.
18 जून 1946 को मडगांव में हजारों लोग पुर्तगाली प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे, जिसके बाद गोवा में स्वतंत्रता आंदोलन ने गति पकड़ ली. इस दिन को गोवा की आजादी के लिए जन-जागरण और विद्रोह का प्रतीक माना जाता है, इसलिए हर साल इसे "गोवा क्रांति दिवस" (Goa Revolution Day) के रूप में मनाया जाता है. हालांकि गोवा को पुर्तगाली शासन से आज़ादी 19 दिसंबर 1961 को मिली, जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय (Operation Vijay) के तहत गोवा को भारत में मिला लिया, लेकिन 18 जून का दिन उस क्रांति की नींव रखने के लिए इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.
1947 — ब्रिटिश संसद में पेश हुई भारत विभाजन योजना
18 जून 1947 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली (Clement Attlee) ने ब्रिटिश संसद में औपचारिक रूप से भारत विभाजन योजना (Mountbatten Plan) पेश की. इसे औपचारिक रूप से “3 जून योजना” (3 June Plan) के नाम से जाना जाता है. इस योजना को भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) ने तैयार किया था. इसे 3 जून 1947 को भारत के प्रमुख नेताओं के साथ साझा किया गया था. इसमें भारत को धार्मिक आधार पर दो स्वतंत्र देशों—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा गया था. इसके तहत प्रांतीय विधानसभाओं को यह निर्णय लेने का अधिकार दिया गया कि वे भारत में रहेंगी या पाकिस्तान में शामिल होंगी. यह योजना 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता का आधार बनी.
18 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1887 — अनुग्रह नारायण सिन्हा, भारतीय राजनेता और बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री
1899 — दादा धर्माधिकारी, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और गाँधीवादी चिंतक
1931 — के एस सुदर्शन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाँचवें सरसंघचालक
1958 — होमी डैडी मोतीवाला, नौकायन में भारत के श्रेष्ठ खिलाड़ी रहे हैं
18 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1974 — सेठ गोविन्द दास, सेनानी, सांसद तथा हिन्दी के साहित्यकार
2002 — नसीम बानो, हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री
2009 — अली अकबर ख़ाँ, मैहर घराने के भारतीय शास्त्रीय संगीतज्ञ और सरोद वादक
18 जून को क्यों याद रखा जाए?
- गोवा क्रांति दिवस (Goa Revolution Day)
- ऑटिस्टिक प्राइड डे (Autistic Pride Day): ऑटिस्टिक प्राइड डे हर साल 18 जून को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 2005 में एक अंतरराष्ट्रीय ऑटिज्म अधिकार समूह Aspies For Freedom (AFF) ने की थी. इस दिन का उद्देश्य ऑटिज़्म (Autism) से ग्रसित लोगों को पीड़ित नहीं बल्कि समाज का एक अनमोल और विविध हिस्सा मानना है. यह दिवस ऑटिस्टिक लोगों की स्वीकृति, स्वतंत्रता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है, न कि केवल जागरूकता फैलाने के लिए. इस दिन को ऑटिस्टिक समुदाय खुद अपने तरीके से मनाता है — यह इस आंदोलन की एक खास विशेषता है.
- अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस (International Picnic Day): अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस हर साल 18 जून को मनाया जाता है. यह दिन प्रकृति के साथ समय बिताने, दोस्तों और परिवार के साथ खुले वातावरण में खाने-पीने और आनंद लेने का प्रतीक है. हालांकि इस दिवस की कोई आधिकारिक ऐतिहासिक शुरुआत दर्ज नहीं है, फिर भी माना जाता है कि यह 18वीं शताब्दी में फ्रांस में पिकनिक की परंपरा से प्रेरित होकर शुरू हुआ. "पिकनिक" शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द piquenique से हुई है, जिसका अर्थ होता है — हल्का भोजन और सामूहिक मेल-जोल. इस दिन का उद्देश्य है — भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ी राहत लेकर प्रकृति के करीब जाना, तनावमुक्त होकर अपनों के साथ कुछ गुणवत्ता समय बिताना और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देना.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि 18 जून 1983 को अमेरिका का अंतरिक्ष यान चैलेंजर (Challenger) अपने दूसरे मिशन पर लॉन्च किया गया था. इस ऐतिहासिक उड़ान में डॉ. सैली के. राइड (Dr. Sally K. Ride) भी शामिल थीं, जो इस मिशन में मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत थीं. इसी के साथ वे अंतरिक्ष में जाने वाली पहली अमेरिकी महिला बनीं और अंतरिक्ष इतिहास में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया.
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