28 जुलाई: WWI शुरू और दुनिया को मिली सूर्यग्रहण की पहली फोटो
28 जुलाई का दिन इतिहास में कई बड़ी घटनाओं का गवाह रहा है – प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत, चीन का तांगशान भूकंप, सूर्यग्रहण की पहली तस्वीर, चौधरी चरण सिंह का प्रधानमंत्री बनना, और फिंगरप्रिंट की खोज जैसे कई अहम पल इस दिन दर्ज हैं. जानिए इस तारीख से जुड़ी अन्य प्रमुख घटनाएं. पढ़िए आज का रोचक तथ्य.
28 जुलाई (28 July Ka Itihas) का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है. यह तारीख न सिर्फ भारत की राजनीति के लिए खास है, बल्कि विश्व पटल पर भी इस दिन कई अहम बदलाव और घटनाएं घटी हैं. आज का दिन विज्ञान, राजनीति, खेल और सामाजिक परिवर्तन से जुड़ी कई घटनाओं का साक्षी रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 28 जुलाई के दिन (28 July History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए, इस खास दिन की उन घटनाओं पर नज़र डालते हैं जो इतिहास में अमिट छाप छोड़ गईं —
भारत और विश्व के इतिहास में 28 जुलाई की प्रमुख घटनाएं
1742 — बर्लिन की संधि
28 जुलाई 1742 को बर्लिन की संधि (Treaty of Berlin) पर ऑस्ट्रिया (Austria) की महारानी मारिया थेरेसा (Maria Theresa) और प्रशिया (Prussia) के राजा फ्रेडरिक II (Frederick II) के बीच हस्ताक्षर हुए, जिसने प्रथम सिलीसियाई युद्ध (First Silesian War) का औपचारिक अंत किया. इस संधि ने ऑस्ट्रिया से निचली और उच्च सिलीसिया (Lower और Upper Silesia) तथा ग्लात्स (Glatz काउंटी) प्रशिया को सौंप दिए, हालांकि टेस्चेन (Teschen), ट्रॉपपाउ (Troppau) और जैगरंडॉर्फ़ (Jägerndorf) जैसे कुछ हिस्से ऑस्ट्रिया के पास रहे. साथ ही, प्रशिया ने ऑस्ट्रिया पर कुछ आपदा ऋण भी लिया था. इस संधि के परिणामस्वरूप प्रशिया का भू‑भाग, जनसंख्या और राजस्व लगभग एक‑तिहाई बढ़ गया, जिससे प्रशिया यूरोपीय महाशक्ति की ओर उभरा और ऑस्ट्रिया–प्रशिया का प्रतिद्वंद्विता युग शुरू हुआ.
1851 — पूर्ण सूर्यग्रहण की पहली तस्वीर
28 जुलाई 1851 को खगोल विज्ञान के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई, जब पूर्ण सूर्यग्रहण की पहली फोटोग्राफिक तस्वीर (1st Photo of a Total Solar Eclipse) ली गई. यह तस्वीर जर्मनी के तत्कालीन प्रशिया राज्य के कोनिग्सबर्ग (Königsberg) (अब कालिनिनग्राद, रूस) में ली गई थी. यह ऐतिहासिक कार्य एक जर्मन भौतिकशास्त्री और खगोलशास्त्री योहान जूलियस फ्रेडरिक बेर्कोफ़ (Johann Julius Friedrich Berkowski) ने किया था. उन्होंने एक छोटे लेंस वाले टेलीस्कोप और डैगेरियोटाइप (daguerreotype) कैमरे का उपयोग करते हुए यह तस्वीर खींची थी, जो पहली बार सूर्य के कोरोना (Corona) को साफ़ रूप में दिखाने में सफल रही. यह घटना खगोलविदों के लिए एक नई दिशा लेकर आई और भविष्य में सूर्य के अध्ययन के लिए फोटोग्राफी के उपयोग की नींव रखी.
1914 — प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत
28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य (Austria-Hungary) ने सर्बिया (Serbia) के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, जिससे प्रथम विश्व युद्ध (World War I) की आधिकारिक शुरुआत हुई. इसकी जड़ें 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया के युवराज (आर्कड्यूक) फ्रांज़ फर्डिनेंड (Franz Ferdinand) और उनकी पत्नी सोफी (Sophie) की सर्बिया समर्थक गुप्त संगठन 'ब्लैक हैंड' के एक सदस्य गवरिलो प्रिंसिप (Gavrilo Princip) द्वारा सराजेवो (अब बोस्निया) में की गई हत्या में थीं. इस हत्या ने पहले से ही तनावग्रस्त यूरोपीय देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य समझौतों की चेन रिएक्शन को ट्रिगर कर दिया. एक महीने के भीतर ही प्रमुख शक्तियाँ — ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी — युद्ध में उतर गईं. यह युद्ध 1918 तक चला, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ लोग मारे गए और यह आधुनिक इतिहास का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन गया.
1976 — चीन में तांगशान भूकंप: मौत और विनाश की सुबह
28 जुलाई 1976 को चीन (China) के हेबेई (Hebei) प्रांत के तांगशान (Tangshan) शहर में सुबह 3:42 बजे एक विनाशकारी भूकंप (1976 Tangshan earthquake) आया, जिसकी तीव्रता 7.8 से 8.2 रिक्टर स्केल के बीच मापी गई. यह भूकंप महज 23 सेकंड तक चला, लेकिन इसकी ताकत इतनी ज़बरदस्त थी कि पूरा तांगशान शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गया. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इसमें लगभग 2,42,000 लोगों की मौत हुई, लेकिन कुछ गैर-सरकारी अनुमान इसे 5,00,000 तक बताते हैं. इस आपदा में करीब 1,64,000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए और लाखों बेघर हो गए. तांगशान भूकंप को 20वीं सदी की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है. इसकी विनाशलीला ने न सिर्फ चीन की आपदा प्रबंधन नीतियों को बदलने के लिए प्रेरित किया, बल्कि यह घटना दशकों तक चीनी राजनीति और समाज पर असर छोड़ गई.
1979 — चौधरी चरण सिंह भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री बने
28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) ने भारत के 5वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. वे पहले प्रधानमंत्री थे जो पूरी तरह से किसानों और ग्रामीण भारत की आवाज़ माने जाते थे. उन्हें जनता पार्टी (सेक्युलर) का नेता बनाकर कांग्रेस (इंदिरा गांधी) ने बाहर से समर्थन दिया था. लेकिन शपथ लेने के तुरंत बाद कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस ले लिया क्योंकि चरण सिंह ने आपातकाल (Emergency) के दौरान इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) पर चल रहे मामलों को हटाने से इनकार कर दिया. नतीजतन, वे संसद में विश्वास मत भी पेश नहीं कर सके और सिर्फ 23 दिनों के भीतर, 20 अगस्त 1979 को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बावजूद वे 14 जनवरी 1980 तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री (caretaker PM) बने रहे. उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन भारतीय राजनीति में सिद्धांतों और किसान हितैषी सोच के प्रतीक के रूप में उनकी छवि अमिट रही.
28 जुलाई को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1165 — इब्न अरबी, अरबी के प्रसिद्ध सूफ़ी कवि, साधक और विचारक
1909 — कासू ब्रह्मानंद रेड्डी, आंध्र प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री
1926 — नामवर सिंह, भारतीय साहित्यिक आलोचक, भाषाविद्, शिक्षाविद् और सिद्धांतकार
1957 — अनिल जनविजय, हिन्दी के कवि, लेखक और रूसी तथा अंग्रेज़ी भाषाओं के साहित्य अनुवादक
1983 — सुविज्ञ शर्मा, भारतीय कलाकार, चित्रकार और उद्यमी
28 जुलाई को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
2016 — महाश्वेता देवी, भारत की सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका
2017 — इंदर कुमार, भारतीय हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध सहायक अभिनेता
28 जुलाई को क्यों याद रखा जाए?
विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day): हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है. यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूच सैम्यूल ब्लमबर्ग (Dr Baruch Blumberg) की जयंती पर तय किया गया है, जिन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस (hepatitis B virus - HBV) की खोज की थी. इस दिन का उद्देश्य हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके रोकथाम, निदान व उपचार को बढ़ावा देना है. भारत सहित दुनिया के कई देश इस बीमारी के खात्मे के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाते हैं.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि आज ही के दिन, 28 जुलाई 1858 को भारत के बंगाल के जंगिपुर (अब पश्चिम बंगाल) में ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम जेम्स हर्शेल (Sir William James Herschel) ने पहली बार पहचान के लिए फिंगरप्रिंट (उंगलियों के निशान) का प्रयोग किया था. उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति राज्यधर कोनाई से कानूनी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर के साथ उसकी हथेली की छाप भी ली, ताकि भविष्य में पहचान से इनकार न किया जा सके. यही घटना फिंगरप्रिंटिंग तकनीक की शुरुआत मानी जाती है. हर्शेल ने बाद में पाया कि हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट पूरी जिंदगी एक जैसे रहते हैं और यह पहचान का सबसे विश्वसनीय तरीका बन सकता है. आज पूरी दुनिया में आपराधिक जांच और पहचान के लिए इसी तकनीक का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है.
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