गर्भपात के बाद नौकरी छोड़ने का सोचती हैं 35% महिलाएं, कंपनी में सपोर्ट की कमी बनी बड़ी चिंता — रिपोर्ट
Quest Global की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गर्भपात के बाद 35% महिलाएं कार्यस्थल पर पर्याप्त समर्थन न मिलने पर नौकरी छोड़ने पर विचार करती हैं. 39% महिलाओं को नौकरी और करियर पर असर का डर है, जबकि 75% ने आत्मविश्वास में कमी महसूस की.
भारत में कार्यस्थलों पर गर्भपात (Pregnancy loss) आज भी एक ऐसा विषय है, जिस पर खुलकर बात नहीं की जाती. कई महिलाएं अपने दर्द और भावनाओं को भीतर ही दबाकर रखने के लिए मजबूर हो जाती हैं. इसकी बड़ी वजह नौकरी और करियर को लेकर डर है.
इंजीनियरिंग सर्विसेज कंपनी Quest Global की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. कंपनी ने YouGov के साथ मिलकर यह स्टडी रिपोर्ट तैयार की है. इसमें देशभर के 25 से 39 वर्ष आयु वर्ग की 2,000 से अधिक महिलाओं और 200 पुरुषों को शामिल किया गया.
'कॉस्ट ऑफ साइलेंस' (Cost of Silence) नामक इस रिपोर्ट के अनुसार, 39 प्रतिशत महिलाओं को डर है कि यदि वे कार्यस्थल पर गर्भपात की जानकारी देंगी तो उनकी नौकरी या करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. वहीं 40 प्रतिशत महिलाएं इस बारे में इसलिए चुप रहती हैं क्योंकि उन्हें सहकर्मियों या नियोक्ताओं द्वारा जज किए जाने का डर रहता है.
रिपोर्ट बताती है कि प्रेग्नेंसी लॉस का असर केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह महिलाओं के पेशेवर जीवन को भी प्रभावित करता है. सर्वे में शामिल 35 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि यदि उन्हें गर्भपात के बाद अपने संस्थान से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला तो वे नौकरी छोड़ने पर विचार कर सकती हैं.
इसके अलावा 75 प्रतिशत महिलाओं ने स्वीकार किया कि इस अनुभव के बाद उनका आत्मविश्वास कम हो गया. इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य के साथ साथ कार्य प्रदर्शन पर भी पड़ा.

सांकेतिक चित्र
Quest Global ने इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए 'ब्रेक द साइलेंस' (Break the Silence) अभियान शुरू किया है. इसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर प्रेग्नेंसी लॉस को लेकर खुली बातचीत को बढ़ावा देना और प्रभावित कर्मचारियों के लिए बेहतर सहायता व्यवस्था तैयार करना है.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि यदि कंपनियां सहायक नीतियां और सुविधाएं उपलब्ध कराएं तो स्थिति बेहतर हो सकती है. 48 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि ऐसी व्यवस्था होने पर वे गर्भपात के बारे में कार्यस्थल पर अधिक सहजता से बात कर पाएंगी.
वहीं 43 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि इस तरह का समर्थन मिलने पर उनकी कंपनी के प्रति निष्ठा बढ़ेगी. 45 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे ऐसे कार्यस्थल की दूसरों को भी सिफारिश करेंगी.
इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए Quest Global ने मेंटल हेल्थ प्लेटफॉर्म YourDOST के साथ साझेदारी की है. इसके तहत पूरे देश में एक सपोर्ट सिस्टम तैयार किया गया है. इसमें 24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन, गर्भपात संबंधी काउंसलिंग में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, पीयर सपोर्ट ग्रुप, मैनेजर और HR ट्रेनिंग, जागरूकता वेबिनार और अन्य संसाधन शामिल हैं.
Quest Global के को-फाउंडर और CEO अजीत प्रभु ने कहा कि गर्भपात लंबे समय से कार्यस्थलों पर एक अदृश्य विषय बना हुआ है. कई महिलाएं अपने दुख को छिपाकर पेशेवर जिम्मेदारियां निभाने के लिए मजबूर होती हैं. इसका असर केवल व्यक्ति पर नहीं बल्कि संगठन की उत्पादकता, आत्मविश्वास, कर्मचारियों को बनाए रखने की क्षमता और करियर विकास पर भी पड़ता है.
Quest Global की चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर यूमी क्लेवेंजर ली (Yumi Clevenger-Lee) ने कहा कि गर्भपात के दौरान मिलने वाला समर्थन यह तय कर सकता है कि कोई महिला खुद को कितना मूल्यवान महसूस करती है, वर्कफोर्स में बनी रहती है और अपने करियर में आगे बढ़ती है. यदि कंपनियां महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंचते देखना चाहती हैं तो उन्हें ऐसे संवेदनशील अनुभवों को समझना और समर्थन देना होगा.
Quest Global ने अन्य संस्थानों से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की है. Bharat Serum Vaccines, Kone, Amara Raja, Sterlite Technologies, और Indian Pharmaceutical Alliance जैसी पांच कंपनियां पहले ही इस पहल का समर्थन कर चुकी हैं.
यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि कार्यस्थलों पर संवेदनशीलता, सहानुभूति और समर्थन केवल कर्मचारियों की भलाई के लिए ही नहीं, बल्कि संस्थानों की दीर्घकालिक सफलता के लिए भी जरूरी है.
(Translated by: रविकांत पारीक)
(images: AI generated)



