Edgistify: तीन दोस्तों के स्टार्टअप ने कैसे बदली भारत की सप्लाई चेन इंडस्ट्री की तस्वीर
3 दोस्तों का स्टार्टअप Edgistify कैसे भारत के वेयरहाउस और फुलफिलमेंट सेक्टर को बदल रहा है? जानिए इस AI-बेस्ड सप्लाई चेन स्टार्टअप का बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू स्ट्रक्चर, फंडिंग, तेजी से बढ़ता नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं के बारे में.
शाहजहांपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर देश की जटिल सप्लाई चेन इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता. लेकिन उमंग शुक्ला और उनके स्टार्टअप Edgistify ने यह कर दिखाया. उमंग Edgistify के को-फाउंडर और CEO हैं. कंपनी भारत में वेयरहाउस और फुलफिलमेंट सिस्टम को एक नई दिशा दे रही है. यह सिर्फ एक स्टार्टअप की कहानी नहीं है, बल्कि उस जिद की कहानी है जो छोटे शहरों के युवाओं को बड़े सपनों की तरफ ले जाती है.
शाहजहांपुर से IIT तक का सफर
उमंग शुक्ला का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ. वहीं उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की. इंजीनियर बनने का सपना उन्हें कोटा ले गया. कोटा में तैयारी के बाद उनका चयन IIT कानपुर में हुआ, जहां उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.
कॉलेज के दिनों में उमंग सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहे. उन्हें लीडरशिप और टीमवर्क में गहरी रुचि हो गई. IIT कानपुर के टेक्निकल फेस्ट Techkriti की कोर टीम में काम करना उनके लिए बड़ा अनुभव साबित हुआ. यहीं से उन्हें बड़े प्रोजेक्ट संभालने का आत्मविश्वास मिला.
YourStory से बात करते हुए, उमंग बताते हैं, “कॉलेज ने मुझे यह सिखाया कि अलग अलग सोच वाले लोगों के साथ मिलकर कैसे काम किया जाता है. यही अनुभव आगे मेरे बहुत काम आया.”
पढ़ाई के साथ उन्होंने सप्लाई चेन सेक्टर में ऑनलाइन एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम भी किया. इससे उनका झुकाव इस सेक्टर की तरफ और बढ़ा.
स्टार्टअप की पहली सीढ़ी
कॉलेज के बाद उमंग ने Pitstop नाम की स्टार्टअप कंपनी जॉइन की. वहां वह शुरू से ही फाउंडिंग टीम का हिस्सा बने. उन्होंने खुद गैराज नेटवर्क खड़ा किया. सेल्स और ऑपरेशंस को लीड किया. बाद में उन्हें कंपनी के B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) वर्टिकल की जिम्मेदारी भी मिली.
सिर्फ डेढ़ साल में उन्होंने इस वर्टिकल को इस स्तर तक पहुंचाया कि वह एक ही तिमाही में कंपनी की आधी कमाई देने लगा. यहीं से उमंग के मन में यह बात पक्की हो गई कि वह टेक और ऑपरेशंस के दम पर बड़े स्तर की समस्याओं को हल कर सकते हैं.
दोस्ती से साझेदारी तक
Edgistify की नींव कोटा के कोचिंग हॉस्टल में पड़ी. वहीं उमंग की दोस्ती कमल किशोर कुमावत (को-फाउंडर और CTO) से हुई. बाद में कमल IIT बॉम्बे चले गए और उमंग IIT कानपुर. दोनों संपर्क में बने रहे.
कॉलेज के बाद कमल बेंगलुरु में Target जैसी बड़ी कंपनी से जुड़े. वहां उन्होंने बैकएंड सप्लाई चेन सिस्टम को गहराई से समझा. वही अनुभव बाद में Edgistify की सोच की नींव बना.
मुंबई आने के बाद कमल के जरिए उमंग की मुलाकात अंतिम सुमन (को-फाउंडर और COO) से हुई. अंतिम NIT सूरत से पढ़े थे और उनके पास एमएनसी और स्टार्टअप दोनों का तगड़ा अनुभव था. यहीं से तीनों ने मिलकर कुछ बड़ा करने का फैसला लिया.

(L-R) कमल किशोर कुमावत (CTO), अंतिम सुमन (COO) और उमंग शुक्ला (CEO), Edgistify के को-फाउंडर
उमंग बताते हैं, “हम तीनों का अनुभव अलग था, लेकिन मकसद एक था. भारत की सप्लाई चेन की असल समस्याओं को हल करना.”
Edgistify की शुरुआत एक सरल सोच से हुई. भारत में कंपनियों को भरोसेमंद वेयरहाउस और सप्लाई चेन पार्टनर ढूंढने में बहुत परेशानी होती थी. इसी समस्या का हल बनने के लिए उन्होंने पहले वेयरहाउस डिस्कवरी प्लेटफॉर्म तैयार किया.
इस प्लेटफॉर्म पर देश के सबसे बड़े वेरिफाइड वेयरहाउस डेटा को इकट्ठा किया गया. बहुत जल्द 200 से ज्यादा ग्राहक इससे जुड़ गए. Reliance जैसी बड़ी कंपनी ने इसी प्लेटफॉर्म के जरिए 18 दिन में 75 से ज्यादा वेयरहाउस फाइनल किए. Fraazo जैसे ब्रांड को नौ महीनों में दो से बढ़ाकर 150 से ज्यादा डार्क स्टोर तक पहुंचाया गया.
डिस्कवरी से फुल स्टैक मॉडल तक
जैसे जैसे ग्राहक बढ़े, वैसे वैसे समस्याएं भी साफ दिखने लगीं. कंपनियों को सिर्फ वेयरहाउस ढूंढना ही काफी नहीं था. उन्हें ऑपरेशन, टेक्नोलॉजी, स्टाफ और फुलफिलमेंट सब एक साथ चाहिए था.
उमंग बताते हैं, “हमने देखा कि जब कंपनी 50 करोड़ से 100 करोड़ और फिर 200 करोड़ की होती है, तो उसे नई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. हमने तय किया कि हम सिर्फ सलाहकार नहीं रहेंगे. हम पूरा समाधान बनेंगे.”
इसी सोच से Edgistify ने खुद को फुल स्टैक सप्लाई चेन कंपनी में बदल दिया.
बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल
आज Edgistify सिर्फ वेयरहाउस ढूंढने की कंपनी नहीं है. यह ब्रांड्स के लिए पूरा वेयरहाउस और फुलफिलमेंट सिस्टम डिजाइन करती है. कंपनी वेयरहाउस ऑपरेट करती है. ऑर्डर प्रोसेस करती है. टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म देती है. साथ ही कंसल्टिंग और वैल्यू एडेड सर्विस भी देती है. इससे ब्रांड्स को अलग अलग एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और Edgistify को अतिरिक्त कमाई का मौका मिलता है.
यही कारण है कि इसकी कमाई कई सोर्स से आती है. ऑपरेशंस से फीस. हर ऑर्डर पर चार्ज. टेक्नोलॉजी सब्सक्रिप्शन. और स्पेशल प्रोजेक्ट से कमाई. कई नए ब्रांड्स जो अपना कारोबार तेजी से बढ़ाना चाहते हैं, वे कंपनी से सलाह लेते हैं कि उन्हें कितने वेयरहाउस चाहिए, कहां खोलने चाहिए और खर्च कैसे कम रखें. इसके बदले कंपनी को प्रोजेक्ट के हिसाब से फीस मिलती है.
उमंग शुक्ला कहते हैं, “हमारा मॉडल सिर्फ कमाई पर नहीं टिका है. हमारा फोकस यह है कि ब्रांड्स की सप्लाई चेन इतनी मजबूत हो जाए कि वह तेजी से और सुरक्षित तरीके से स्केल कर सकें. जब ग्राहक मजबूत होगा, तो हमारा कारोबार अपने आप बढ़ेगा.”
सप्लाई चेन की असली मुश्किलें
भारत में आज ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और रिटेल तीनों एक साथ चल रहे हैं. हर चैनल की अपनी जरूरत है. टेक सिस्टम अलग अलग हैं. कभी-कभी ऑपरेशन में तालमेल नहीं होता. शॉर्ट टाइम डिलीवरी का दबाव अलग है.
Edgistify इन सारी दिक्कतों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम कर रही है. कंपनी यूनिफाइड नेटवर्क डिजाइन करती है. सभी चैनल के लिए एक जैसे स्टैंडर्ड सेट करती है. और ग्राउंड लेवल पर तेज और भरोसेमंद एक्जीक्यूशन करती है.
फंडिंग
Edgistify ने अब तक 1.4 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. यह फंडिंग उस समय आई जब Edgistify तेजी से देशभर में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही थी. इसमें सप्लाई चेन के अनुभवी निवेशक राजेश राणावत शामिल हैं. दुबई की NB Ventures भी निवेशक है. साथ ही Adani Group के पूर्व CHRO विक्रम टंडन भी इस स्टार्टअप में निवेश कर चुके हैं.
इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी ने टेक्नोलॉजी को और मजबूत करने, नए शहरों में वेयरहाउस नेटवर्क फैलाने और अपनी कोर टीम को विस्तार देने में किया है. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समर्थित सिस्टम और बेहतर डेटा एनालिटिक्स पर भी निवेश किया जा रहा है.
उमंग बताते हैं, “हमारे निवेशक सिर्फ पैसे देने वाले लोग नहीं हैं. वह हमारे विजन के साथी हैं. उनका अनुभव हमारे हर बड़े फैसले में हमारे साथ चलता है.”
भविष्य की योजनाएं
आज Edgistify देश के अलग अलग शहरों में अपने मजबूत वेयरहाउस नेटवर्क के जरिए 70 से ज्यादा सक्रिय ग्राहकों को सेवा दे रही है. इनमें से 20 से अधिक ऐसे ब्रांड हैं जिन्होंने अपनी पूरी वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जिम्मेदारी कंपनी को सौंप रखी है. बीते एक साल में FMCG, फार्मा, कॉस्मेटिक्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में कंपनी का तेजी से विस्तार हुआ है. पिछले छह महीनों में कंपनी की कमाई दोगुनी हुई है और हर तिमाही नए ग्राहक जुड़ रहे हैं. कंपनी खास तौर पर टियर टू और टियर थ्री शहरों पर ध्यान दे रही है, जहां ई कॉमर्स और क्विक कॉमर्स तेजी से बढ़ रहा है लेकिन संगठित फुलफिलमेंट सिस्टम की अभी भी कमी है.
भविष्य की रणनीति में AI को केंद्र में रखा गया है. कंपनी ऐसे सिस्टम बना रही है जो मांग का पहले से अनुमान लगा सकें और उसी के आधार पर स्टॉक, स्टाफ और डिलीवरी की तैयारी हो सके. वर्कफोर्स मैनेजमेंट को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है ताकि जरूरत के समय सही जगह पर सही संख्या में लोग तैनात किए जा सकें. साथ ही सेल्स, रिटर्न, पेमेंट और सेटलमेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम चल रहा है, ताकि ब्रांड्स को हर चैनल की पूरी और साफ तस्वीर एक ही जगह दिखाई दे.
आने वाले समय में Edgistify कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कदम रखने की तैयारी कर रही है, खास तौर पर दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट में, जहां भारतीय ब्रांड्स की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है.
उमंग शुक्ला कहते हैं, “हमारा मकसद सिर्फ अपनी कंपनी को बड़ा बनाना नहीं है, बल्कि भारतीय ब्रांड्स को ऐसा सप्लाई चेन सिस्टम देना है जिस पर वे पूरी तरह भरोसा कर सकें.”
इसी सोच के साथ Edgistify अपने वर्तमान को मजबूत करते हुए भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है.



