यू-ट्यूब से डॉलर की बारिश, कैसे? जानने के लिए पढ़िए...

By Sahil
June 10, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
ओरिजिनल कंटेंट बनाइए, जमकर पैसे बनाइए...यू-ट्यूब पर प्रति मिनट 100 घंटे का वीडियो अपलोड होता है...यू-ट्यूब पर प्रति महीने एक अरब नए यूजर्स विजिट करते हैं ...यू-ट्यूब पर हर महीने करीब 6 अरब घंटे वीडियो देखे जाते हैं
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अगर आपके भीतर का क्रिएटिव कीड़ा आपको चैन से रहने नहीं देता, लेकिन नौकरी-चाकरी के चक्कर में अपने शौक को कुर्बान कर रहे हैं. आप चाहते तो हैं फिल्में बनाना, 70 एमएम वाली नहीं, तो कम से कम ऐसी जिसे इंटरनेट पर रिलीज कर सकें. लेकिन, रोजी-रोटी के चक्कर में इसके लिए वक्त नहीं निकाल पाते.

...तो दुख भरे दिन बीते रे भैया!!!!

शर्त इतनी है कि आपके पास कुछ ओरिजिनल क्रिएट करने का माद्दा हो, फिर देखिए कैसे सिक्कों की खनखन से आपका जीवन भर जाएगा. जीहां, अगर ओरिजिनल ऑडियो-वीडियो कंटेंट बनाना आपका पैशन है, तो पैसों की बारिश कोई रोक नहीं सकता.

यकीन नहीं... तो ये देखिए

ऑफिशियल पीएसवाई चैनल के गंगनम स्टाइल वाले वीडियो को यूट्यूब पर दो अरब बार देखा गया। औसतन 2 डॉलर प्रति सीपीएम के हिसाब से सिर्फ ये एक वीडियो यूट्यूब और पीएसवाई चैनल के लिए 4 अरब डॉलर की कमाई कर सकता था। सवाल ये है कि आखिर यूट्यूब पर किस तरह पैसे कमाए जाते हैं और इस बारे में ताजा जानकारी क्या हैं?

ऐसे होगी पैसों की बारिश

हाल के दिनों में इंटरनेट पर और खासकर सोशल मीडिया पर वीडियो कंटेंट की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इंटरनेट पर वीडियो कंटेंट के इस इजाफे को अच्छी क्वालिटी के कैमरा वाले सस्ते स्मार्टफोन के बाजार में आने से जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही वाईफाई और 3जी जैसी इंटरनेट सुविधा और वीडियो कंप्रेशन जैसी तकनीक आसानी से मुहैया होने की वजह से भी लोग बड़ी आसानी वीडियो रिकॉर्ड करते हैं, अपलोड करते हैं और फिर शेयर कर देते हैं। 2006 में 16 से 34 साल के सिर्फ 7% लोगों ने ही ऑनलाइन कंटेंट बनाया था और आज ये संख्या 77% हो गई है। यूट्यूब लंबे समय से ऑनलाइन वीडियो का मक्का माना जाता रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर प्रति मिनट 100 घंटे का वीडियो अपलोड होता है, जहां प्रति महीने एक अरब नए यूजर्स विजिट करते हैं और हर महीने करीब 6 अरब घंटे वीडियो देखे जाते हैं।

अभी तक वीडियो बनाने वालों की कमाई का मुख्य जरिया डिजिटल विज्ञापन हुआ करते थे – यूट्यूब पर ये विज्ञापन वीडियो क्लिप के शुरू होने से पहले या फिर बीच में दिखाए जाते हैं और वीडियो के ऊपर भी टेक्स्ट या अक्षरों में कुछ विज्ञापन होते हैं। अब जब बाजार से जुड़े लोग वीडियो के जरिए अपने ऑडियंस तक पहुंचने की संभावनाएं तलाश रहे हैं, तब डिजिटल वीडियो विज्ञापन पर खर्च होने वाली रकम में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। एक आंकलन के मुताबिक 2013 में यूट्यूब पर डिजिटल वीडियो विज्ञापन के जरिए 4.2 अरब डॉलर से 4.7 अरब डॉलर (चूंकि गूगल अलग-अलग सेक्टर्स से हुई कमाई की जानकारी मुहैया नहीं कराती है) की आय हुई थी। यूट्यूब की ये कमाई 6 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है, जो कि गूगल की कुल कमाई की 7% होगी। ऑनलाइन कंटेंट की क्वालिटी को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट की ये बड़ी कंपनी वीडियो बनाने वाले समुदाय के लिए नए फीचर्स डेवलप करने में काफी निवेश कर रही है। यूट्यूब पर वीडियो बनाने वाले कई लोग इसी के जरिए अपनी जीविका भी चलाते हैं।

यूट्यूब पर कंटेंट बनाने वाले वीडियो चैनल पर चलने वाले डिजिटल विज्ञापन से पैसा कमाते हैं। विज्ञापन से होने वाली कमाई का 55% पब्लिशर को जाता है, जबकि 45% गूगल को। वीडियो बनाने वालों की कमाई सीपीएम (कॉस्ट पर 1000 व्यू), सीपीसी (कॉस्ट पर क्लिक) और सीटीआर (क्लिक थ्रू रेट) पर निर्भर करती है। यूट्यूब पर विज्ञापनदाता खास कीवर्ड्स का इस्तेमाल कर तय भौगोलिक क्षेत्र के टारगेट ऑडियंस तक अपने प्रोडक्ट का प्रचार करने के लिए खर्च करते हैं। वर्षों से गूगल द्वारा वीडियो दिखाने के लिए बहुत ज्यादा शुल्क (45%) वसूलने की वजह से कई कंटेंट पब्लिशर्स में असंतोष भी है। उदाहरण के लिए आपको बता दें कि आईट्यून्स और गूगल प्ले स्टोर अपने प्लेटफॉर्म पर एप्स पब्लिश करने के लिए 30% शुल्क वसूलते हैं। गूगल यूट्यूब के लिए ज्यादा शुल्क वसूलने को सही बताती है क्योंकि मोबाइल एप्प मार्केट की तरह ऑनलाइन वीडियो मार्केट (ये दुनिया की चोटी की पांच साइट में है) में कोई प्रतियोगिता नहीं है।

हालांकि गूगल की हमेशा से ही ये कोशिश रही है कि वो ऐसे बदलाव करे जिससे कंटेंट पब्लिशर्स यूट्यूब पर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा सकें। यही वजह है कि यूट्यूब कंटेंट पब्लिशर्स के लिए एक आकर्षक केंद्र है। समय-समय पर गूगल कई तरह के टूल डेवलप करती रहती है, जिनसे कंटेंट पब्लिशर्स अपनी कमाई बढ़ा सकें। ऑडियंस एंगेजमेंट फीचर्स (कॉमेंट्स, सब्सक्राइबर्स), कस्टम चैनल ब्रांडिंग, एनोटेशंस एंड इन-वीडियो प्रोग्रामिंग और यूट्यूब एनालिटिक्स जैसे कई फीचर्स हैं, जिन्हें गूगल ने शुरू किए हैं। अभी हाल ही में हुए विडकॉन कार्यक्रम के दौरान हजारों वीडियो क्रिएटर्स और फैन्स के बीच यूट्यूब ने कई टूल लॉन्च किए जिनसे लोग अपने प्रोडक्शन को और उन्नत कर सकते हैं। एक नया फंडिंग सिस्टम तैयार किया गया है जो सभी वीडियो क्रिएटर्स, फैन्स और निवेशकों के लिए बेहद ही फायदे का सौदा है। वीडियो के बगल में ‘सपोर्ट’ बटन की शुरुआत की गई है, इससे बड़ी आसानी से फैन्स 500 डॉलर तक चुनिंदा चैनलों तक किकस्टार्टर, इंडीगोगो, पैटरिओन और अन्य सेवाओं के जरिए चंदा पहुंचा सकते हैं। इससे वीडियो क्रिएटर्स की अलग से कमाई का जरिया खुल जाएगा।

अन्य घोषणाएं

* गेमिंग-थीम्ड पोर्टल ट्विच के साथ यूट्यूब के करार की अफवाह तब सच साबित हुई जब यूट्यूब पर ‘60 फ्रेम्स पर सेकेंड’ का फीचर लॉन्च किया गया। अब वीडियो क्रिएटर्स यूट्यूब पर 60 फ्रेम्स पर सेकेंड की रफ्तार से वीडियो अपलोड कर सकेंगे। वीडियो गेम्स के वीडियो में यही रफ्तार होती है।

* वीडियो मेट्रिक्स पर नजर रखने के लिए यूट्यूब ने अपलोडर्स के लिए यूट्यूब क्रिएटर स्टूडियो एप्प लॉन्च किया है। फिलहाल ये एंड्रॉयड पर उपलब्ध है और जल्दी ही इसे आईओएस पर लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद इस एप्प को दोबारा डिजाइन कर डेस्कटॉप के लिए भी लॉन्च किया जाएगा।

* लोगों के इस्तेमाल के लिए अलग-अलग वीडियो में ऑडियो लाइब्रेरी में ज्यादा ट्रैक के साथ हजारों की संख्या में रॉयल्टी-फ्री साउंड इफेक्ट्स जोड़े गए हैं।

* यूट्यूब पर आवाज की पहचान और खुद से अनुवाद किए जाने वाले फीचर तो पहले से ही है, अब यूजर्स को सबटाइटल या कैप्शन के आधार पर किसी भी भाषा में अनुवाद देने की भी छूट मिल गई है।

* यूट्यूब अगले महीने SiriusXM पर अपना वीकली म्यूजिक काउंटडाउन शो ‘द यूट्यूब 15’ लॉन्च करने जा रही है। इस शो को यूट्यूब सेलेब्रिटी जेन्ना मार्बल्स होस्ट करेंगी। इसमें यूट्यूब के बड़े नाम और उभरते नामों को शामिल किया जाएगा। यूट्यूब के नाम बिना रेडियो की मदद के कई हिट लॉन्च करने के रिकॉर्ड हैं।

यूट्यूब ने हाल ही में घोषणा की है कि यूट्यूब के वीडियो पर कॉमेंट करने के लिए यूजर्स को गूगल प्लस पर लॉग इन करना जरूरी होगा। इस कदम का मतलब साफ है कि ये ऊपर की घोषणाओं का अगुवा है और इससे वीडियो बनाने वालों को यूजर्स की ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। ये पूरी तरह साफ है कि गूगल की कोशिश है कि वो कंटेंट पब्लिशर्स तक पहुंचकर उन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने का मौका दे और साथ ही उन्हें वीमियो जैसे यूट्यूब के प्रतियोगियों से भी दूर रखे। ऐसे में जब यूट्यूब पर वीडियो के ट्रैफिक के मुकाबले में कोई दूसरा प्लेटफॉर्म है ही नहीं, तब इस तरह के उपाय और फीचर्स वीडियो पब्लिशर्स को यूट्यूब से जोड़े रखने के लिए काफी हैं। इन सबके बीच एक बुरी चीज है कि फिलहाल मुद्रीकरण का फीचर भारतीय यूजर्स के लिए नहीं है।

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