नौकरी छोड़ किसान बनीं इंजीनियर, दुबई और इज़राइल में हैं इनकी सब्जियों के खरीददार

इंजीनियर लड़की बनी किसान...

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वल्लरी कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में एमटेक करने के बाद ने दुर्गा कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में नौकरी कर रही थीं। उन्होंने नौकरी छोड़कर 27 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। अब उनके खेत में उगाई गईं सब्जियां दुबई और इज़राइल जैसे अन्य देशों में निर्यात करने के लिए तैयार हैं।

वल्लरी (फोटो साभार- नई दुनिया)

वल्लरी (फोटो साभार- नई दुनिया)


 हालांकि खेती के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है लेकिव जो संतुष्टि किसी को खेती करने से मिलती है वह कहीं और नहीं मिल सकती है।

वल्लरी के फार्म पर उगाई जा रही सब्जियां पूरे भारत के कई शहरों जैसे इंदौर, नागपुर, बेंगलुरु और दिल्ली में बेची जाती हैं। वल्लरी अपने खेत पर हरी मिर्च, करेला और खीरा जैसी सब्जियां उगाती हैं। 

खेती-किसानी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। लेकिन हालिया कुछ सालों में किसानों की दुर्दशा, जड़ किसान नीतियों और कम सुविधाओं ने लोगों को किसानी से मोहभंग कर दिया है। उन्नत तकनीकें किसानों तक पहुंच नहीं पा रही हैं और वो परंपरागत तरीके से खेती करके पर्याप्त कमाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में 27 वर्षीय छत्तीसगढ़ लड़की वल्लरी चंद्राकर ने खेती करने के लिए अपनी अच्छी सैलरी वाली इंजीनियरिंग नौकरी छोड़ दी। वल्लरी कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में एमटेक करने के बाद ने दुर्गा कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में नौकरी कर रही थीं। उन्होंने नौकरी छोड़कर 27 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। अब उनके खेत में उगाई गईं सब्जियां दुबई और इज़राइल जैसे अन्य देशों में निर्यात करने के लिए तैयार हैं।

वल्लरी, जो राज्य की राजधानी रायपुर में नौकरी छोड़कर अपने गांव के बागबाहरा जिले में लौट आई हैं, का मानना है कि खेती से ज्यादा कोई भी नौकरी महत्वपूर्ण नहीं हो सकती है। हालांकि खेती के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है लेकिव जो संतुष्टि किसी को खेती करने से मिलती है वह कहीं और नहीं मिल सकती है। वल्लरी का मानना है कि बाजार में नई तकनीक के साथ अब व्यवसाय पहले जितना मुश्किल नहीं है। वल्लरी की खेती-यात्रा 2016 में शुरू हुई। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और खेती शुरू की तो कई ग्रामीणों ने मुझे एक शिक्षित मूर्ख कहा। मेरे परिवार में तीन पीढ़ियों में कोई भी खेती नहीं कर रहा था। मुझे शुरू में किसानों, बाजारों और विक्रेताओं से निपटने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।

हालांकि उनके पिता, जोकि मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर में इंजीनियर हैं, का समर्थन वल्लरी के साथ रहा। उन्होंने एक फार्महाउस बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। वल्लरी ने अवसर देखा और खेती के लिए उस भूमि का उपयोग करने का निर्णय लिया। वल्लरी के फार्म पर उगाई जा रही सब्जियां पूरे भारत के कई शहरों जैसे इंदौर, नागपुर, बेंगलुरु और दिल्ली में बेची जाती हैं। वल्लरी अपने खेत पर हरी मिर्च, करेला और खीरा जैसी सब्जियां उगाती हैं। उनकी उगाई सब्जियों की प्रसिद्धि विदेश तक पहुंच गई है। उन्हें इस समय दुबई और इजराइल से टमाटर और लौकी के लिए एक ऑर्डर मिला हुआ है। ये सब्जियां 60-75 दिनों में बेचने के लिए तैयार हो जाएंगी।

वल्लरी ने इंटरनेट से खेती की कई नई तकनीकें सीखीं। वो स्थानीय भाषा का इस्तेमाल करके ग्रामीणों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करती हैं। वह जमीन पर काम कर रहे किसानों के लिए नई कृषि तकनीकों पर कार्यशालाएं भी आयोजित करवाती हैं। ग्राहक वल्लारी की सब्जियों के गुणों से खासे प्रभावित नजर आते हैं। वल्लरी के खेत से हो रहे उत्पादन के लिए बाजार का विस्तार लगातार हो रहा है। वह 5 बजे अपना काम पूरा करती हैं और फिर गांव में जाती हैं। वहां पर 40 लड़कियों को अंग्रेजी और कम्प्यूटर साइंस पढ़ाती हैं।

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