मन का काम बना युति का सक्सेस मंत्र

- ग्राफिक डिजाइनर के रूप में शुरु किया अपना कैरियर और बनी 'उड़ ' की संस्थापक। - पति के सहयोग ने बढ़ाया आगे बढ़ने का जज्बा। - प्रकृति बनी प्रेरणा स्त्रोत। - पहले कागज़ पर डिज़ाइन फिर साड़ी, दुप्पटे, लहंगा आदि पर भी उकेरे कलात्मक डिज़ाइन। भरे उनमें रंग।

मन का काम बना युति का सक्सेस मंत्र

Wednesday October 19, 2016,

5 min Read

युति शाह बचपन से ही काफी एक स्वतंत्र महौल में रहीं। वे हमेशा से कोई रचनात्मक काम करना चाहती थीं ताकि अपनी सोच को अपने काम के माध्यम से अभिव्यक्ति दे सकें और इसी के चलते युति ने मुंबई के रैफेल डिज़ाइन इंटरनेशनल से विजुअल कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की। इस दौरान उन्हें एक एक्सचेंज कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुना गया और वे पैरेस चली गईं। जब दो महीने बाद युति भारत लौटीं तो उन्होंने खुद में काफी बदलाव महसूस किए। इस यात्रा ने युति की सोच और उनकी कलात्मक क्षमता को एक नया स्वरूप प्रदान किया। अब वे डिज़ाइनिंग को हर चीज़ में अनुभव करने लगीं। हर छोटी-छोटी चीज़ों में उन्हें डिज़ाइनिंग की गुंजाइश नज़र आने लगी। उन्हें लगने लगा कि डिज़ाइनिंग केवल पेपर, बुक या फिर कार्ड तक सीमित नहीं होनी बल्कि हर चीज़ में उसका असर दिखना चाहिए।

image


युति ने अपना कैरियर बतौर ग्रैफिक डिज़ाइनर शुरु किया। उन्हें अपना काम बहुत पसंद था लेकिन भीड़ भरी ट्रेन में ऑफिस जाना। देर तक ऑफिस में काम करना युति के लिए कठिन हो रहा था।

युति के लिए सबसे अच्छी चीज़ यह थी कि उनके पति का टेस्ट भी उनकी तरह ही था। वे दोनों अक्सर छुट्टियों में किसी ग्रामीण इलाके में चले जाते और वहीं अपनी छुट्टियां बिताते। युति अपने साथ अक्सर एक नोटबुक ले जाती जिसमें वे नेचर के विभिन्न रंगों और टेक्सचर को उतारने की कोशिश करती। नेचर के करीब रहना दोनों को ही बहुत पसंद था। ऐसी ही एक ट्रिप में जब उनके पति अतुल एडर्वड ने उनके स्केचेज़ को ध्यान से देखा तो उन्होंने युति को कुछ अपना ही काम शुरु करने की सलाह दी और कहा कि क्यों न तुम अपनी इस क्रिएटिव स्किल को लोगों के सामने किसी भी जरिए से पेश हो। आइडिया युति को भी बहुत भा गया और युति ने अपनी लगी लगाई डिज़ाइनर की जॉब एकाएक छोड़ दी। और अपना पूरा ध्यान अपने पहले आर्ट शो की तैयारी में लगा दिया। इसी सोच के साथ नीव पड़ी उनके ब्रॉड 'उड़Ó की।

image


युति अपने ओरिज़नल आर्ट वर्क केवल कागज पर ही नहीं बल्कि अब साड़ी, दुप्पटा, स्कार्फ, लहंगा आदि में उकेरने लगीं। अपने दो सफल शो करने के बाद युति और अतुल ने सोचा कैसे वे अपनी पहुंच को और विस्तार दें। तथा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपने काम को पहुंचाए। चूंकि युति ग्रैफिक डिज़ाइनर थीं और दिल से एक कलाकार थीं इसलिए उनके डिज़ाइन्स में एक नयापन था। यह डिज़ाइन अच्छे तो थे ही साथ ही बहुत क्रिएटिव और नवीन भी थे। जिस वजह से उन्हें लोगों से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी मिल रही थीं। उनकी स्केचिंग में ग्रामीण संस्कृति के साथ-साथ प्रकृति की भी स्पष्ट छाप थी जिसमें भारत की खुशबू थी। जिससे उनके ग्राहकों की संख्या बढ़ती चली गई। वे अपनी डिज़ाइनिंग में ओरिज़नल तकनीक का इस्तेमाल करतीं। इसके अलावा युति की कलर स्कीम भी बहुत अलग रंग लिए हुए थी।

जैसा कि हर बिजनेस में होता है युति और अतुल को भी शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इन चुनौतियों ने इन्हें और डटकर काम करने का हौंसला दिया। युति बताती हैं कि उनके उत्पाद को पसंद करने वाला वर्ग एक अलग व खास किस्म का वर्ग है। जो कला की अच्छी समझ रखता है।

युति और अतुल का मक्सद मात्र पैसा कमाना ही नहीं है। बल्कि वे अच्छे काम के जरिए अपना नाम और पैसा कमाना चाहते हैं। लेकिन जैसा कि हर बिजनेस में पैसों की जरूरत तो होती ही है वैसी ही जरूरत युति और अतुल को भी है ताकि वे अपने काम को और विस्तार दे सकें। अब युति और अतुल को एक ऐसे बिजनेस पार्टनर की जरूरत है जो केवल पैसा कमाने के मक्सद से उनके साथ न जुड़े बल्कि एक अच्छे काम को आगे बढऩे की सोच रखता हो और उसे डिज़ाइनिंग की अच्छी समझ भी हो।

image


चूंकि यह क्षेत्र आज भी पुरुष प्रधान क्षेत्र है इसलिए जब युति शुरु में कारीगरों से मिलती थीं तो कारीगर समझते थे कि युति बस शौकिया तौर पर यह कार्य कर रही हैं। लेकिन धीरे-धीरे जब वे कारिगरों से नियमित रूप से मिलने लगीं और कारीगरों ने युति का काम के प्रति पैशन देखा तो उन्हें भी यह महसूस हुआ कि युति सच में अपने काम को लेकर बहुत समर्पित हैं उसके बाद कारीगरों ने भी युति को गंभीरता से लेना शुरु कर दिया। युति बताती हैं कि मेरे इस काम में मेरे पति ने भी मेरा खूब हाथ बटाया। अपना पूरा सहयोग दिया। आज हम और हमारे बुनकर सभी एक परिवार की तरह रहते हैं।

पति-पत्नी के तौर पर ही नहीं बल्कि एक बिजनेस पार्टनर के तौर पर युति और अतुल बहुत मिल जुलकर काम करते हैं। दोनों एक दूसरे के नेचर से वाकिफ हैं और दोनों को एक दूसरे की स्ट्रैंथ भी पता है इसलिए दोनों के बीच बहुत अच्छा कॉओडिनेशन रहता है। दोनों ने अपने-अपने काम बांटे हुए हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इनके काम को खूब लाइक्स भी मिल रहे हैं। इनके नियमित ग्राहकों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है। अपने काम के प्रति प्यार और लगाव ही इन दोनों की कामयाबी का मूलमंत्र है।

    Share on
    close