जिसको ससुराल वालों ने किया बेदखल, वो बन गयी आर्मी ऑफिसर

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निधि की उम्र उस वक़्त मात्र 21 वर्ष थी जब उनके पति की मृत्यु हो गयी। इतनी कम उम्र में पति का साथ छूटने से निधि भीतर तक टूट गईं। शादी को सिर्फ एक साल ही हुआ था। उनके पति निधि और उनके पेट में पल रहे 4 माह के बच्चे का साथ छोड़ कर पंचतत्व में विलिन हो गये। निधि इस सदमे से उबरने की कोशिश कर ही रही थीं, कि ससुराल वालों ने उन्हें घर छोड़ देने के लिए कह दिया। ऐसे में एक अकेली औरत का कोई ऐसा मुकाम हासिल कर लेना जो बाहदुरी के साथ-साथ देश की बेटियों के लिए मिसाल हो, काबिल-ए-तारीफ है...

फोटो साभार: सोशल मीडिया

फोटो साभार: सोशल मीडिया


लेफ्टिनेंट निधि मिश्रा दुबे जब अपनी ट्रेनिंग के लिए चेन्नई जा रही थीं, तो यह सफ़र उनके 7 सालों के लंबे संघर्ष भरी मंजिल का अंतिम सफ़र था। उनकी मंजिल बहुत करीब आ चुकी थी, जिसे वे अपने बुलंद हौसले तथा मजबूत इरादों से पाने में सफल हुईं।

जब पासिंग आउट परेड ऑफिसर्स की ट्रेनिंग चेन्नई अकादमी में हुई तो उस जत्थे में एक ऐसी महिला भी शामिल थी, जिसने अपने जीवन के कठिन से कठिन पड़ाव को पार कर वहाँ तक का सफ़र तय किया था। निधि मिश्रा दुबे हैं एक ऐसी महिला आर्मी ऑफिसर जिनकी जिन्दगी में 21 वर्ष की उम्र में ही दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। स्वयं को उस दलदल से निकाल पाना सबके लिए संभव नहीं हो पाता, लेकिन इन्होंने अपने पति को खोने के बाद पति के सपनों को साकार करने के लिए भारतीय सेना को ज्वाइन करने का फैसला लिया। लेफ्टिनेंट निधि मिश्रा दुबे जब अपनी ट्रेनिंग के लिए चेन्नई जा रही थीं, तो यह सफ़र उनके 7 सालों के लंबे संघर्ष भरी मंजिल का अंतिम सफ़र था। उनकी मंजिल बहुत करीब आ चुकी थी, जिसे वे अपने बुलंद हौसले तथा मजबूत इरादों से पाने में सफल हुईं।

निधि की उम्र उस वक़्त मात्र 21 वर्ष थी जब उनके पति नायक मुकेश कुमार दुबे की हार्ट-अटैक से मृत्यु हो गयी। इतनी कम उम्र में पति का साथ छूटने से निधि भीतर तक टूट चुकी थीं। 23 अप्रैल 2009 की इस दुखद घटना के वक़्त उनके विवाह को महज़ 1 वर्ष ही हुए थे। मुकेश ने निधि और उनके पेट में पल रहे 4 माह के बच्चे का साथ छोड़ कर पंचतत्व में विलीन हो गये। निधि इस सदमे से उबरने की कोशिश कर ही रही थीं, कि उनके ससुराल वालों ने उन्हें घर छोड़ देने के लिए कह दिया। अपना ससुराल छोड़ कर निधि ने अपने माता-पिता और भाई के पास जाना उचित समझा। इस कठिन परिस्थिति में निधि के परिवारवालों ने इनका मनोबल बढ़ाया और भरपूर साथ दिया।

अपने बेटे सुयश के साथ निधि मुस्कुराती हुईं। 

अपने बेटे सुयश के साथ निधि मुस्कुराती हुईं। 


SSB की कठिन परीक्षा में आखिर निधि ने अपने काबिलियत और मेहनत से पाँचवें प्रयास में सफलता हासिल की थी। सफलता प्राप्त करने के बावजूद निधि के सामने एक समस्या और आ खड़ी हुई। अकादमी में सैन्य विधवा के लिए सिर्फ एक स्थान ही था, और निधि के साथ-साथ उस एक स्थान को पाने के लिए कुपवाड़ा में आतंकी मुठभेड़ में शहीद कर्नल संतोष महादीक की पत्नी स्वाति महादीक भी शामिल थीं। 

मुकेश के गुजर जाने के 5 महीने बाद निधि ने अपने बेटे सुयश को जन्म दिया और खुद एक आत्मनिर्भर महिला बनने की ठान ली। अपने बेटे के जन्म के कुछ सालों बाद उन्होंने MBA की पढाई के लिए इंदौर के एक कॉलेज में दाखिला लिया। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने डेढ़ वर्ष तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया, उसके बाद अपने घर वापस आकर आर्मी स्कूल में बतौर शिक्षिका के रूप में ज्वाइन किया, जहाँ उनका बेटा सुयश भी पढ़ता था।

मुकेश के निधन के बाद सरकार की तरफ से निधि को 8,330 रूपये की विधवा पेंशन मिलती थी, जो उनके पति के अंतिम निर्गत वेतन की 30% राशि थी। पेंशन की भाग-दौड़ में ब्रिगेडियर आर. विनायक की पत्नी डॉ. जयलक्ष्मी से इनकी मित्रता हो गयी। डॉ. जयलक्ष्मी ने निधि की परिस्थितियों को समझते हुए उनका हौसला बढ़ाया और हर कदम पर उनका साथ दिया। मुकेश के सीनियर ऑफिसर ने निधि को सर्विस सलेक्शन बोर्ड (SSB) की परीक्षा की तैयारी करने की सलाह देते हुए उनका भरपूर सहयोग दिया।

वर्ष 2014 में निधि SSB की तैयारी में लग गईं। इनकी अंग्रेज़ी कमजोर थी और इन्हें शारीरिक रूप से भी मजबूत होना था। वह रोज सुबह 4 बजे उठ कर दौड़ने के साथ-साथ व्यायाम भी किया करती थीं, फिर वापस आकर स्कूल जाने की तैयारी करती थीं। स्कूल से आने के बाद समय निकाल कर परीक्षा की तैयारी करतीं। SSB की कठिन परीक्षा में आखिर निधि ने अपने काबिलियत और मेहनत से पाँचवें प्रयास में सफलता हासिल की थी। सफलता प्राप्त करने के बावजूद निधि के सामने एक समस्या और आ खड़ी हुई। अकादमी में सैन्य विधवा के लिए सिर्फ एक स्थान ही था और निधि के साथ-साथ उस एक स्थान को पाने के लिए कुपवाड़ा में आतंकी मुठभेड़ में शहीद कर्नल संतोष महादीक की पत्नी स्वाति महादीक भी शामिल थीं। ब्रिगेडियर आर. विनायक की सलाहनुसार निधि ने आर्मी हेड-क्वार्टर को अकादमी में एक और स्थान बढ़ाने की अर्जी दी, जिसे स्वीकार किया गया और उन्होंने सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी कर लेफ्टिनेंट का पद संभाला।

निधि अपनी इस सफलता का श्रेय अपने 8 साल के बेटे सुयश और माता-पिता को देती है। उनका कहना है कि बिना इनके सहयोग के इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए संभव नही था। निधि की ज्वाइनिंग के एक दिन पूर्व ही रक्षा मंत्री निर्मला सीताराम ने मिलेट्री पुलिस में 800 महिलाओं को शामिल करने का फैसला लिया।

निधि मिश्रा दुबे अपने आप में एक मिसाल हैं, जो देश की सभी महिलाओं को कठिन परिस्थिति में भी ज़िन्दगी जीने की वजह देती हैं। अपने पूर्ण समर्पण और जुझारूपन स्वाभाव से, काटों से भरी राहों पर भी चल कर मंजिल तक का सफ़र तय कर औरों को प्रेरित कर रही हैं। निधि का मानना है कि अगर हमें कामयाबी हासिल करनी है, तो पंख की चिंता किये बगैर हमे अपने हौसलों को बुलंद कर उड़ान भरनी चाहिए, जो हमें अपनी मंजिल तक ले जाने में मदद करती है।

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