91 साल की उम्र में प्रभावती नानी ने शुरू किया फूड बिजनेस Nani’s Nashta
अहमदाबाद की रहने वाली प्रभावती भगवती उर्फ नानी ने ‘Nani’s Nashta’ फूड बिजनेस शुरू कर उम्र की परिभाषा बदल दी. पति के निधन के बाद 91 की उम्र में शुरू हुआ यह सफर आज 200 परिवारों तक पहुंच चुका है. आज वे 98 साल की है. उनकी कहानी जुनून, हिम्मत और नई शुरुआत की मिसाल है.
जब लोग रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं, तो उनके मन में आराम और धीमी जिंदगी की तस्वीर आती है. लेकिन अहमदाबाद की 98 साल की प्रभावती भगवती (Prabhavati Bhagwati) ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. लोग उन्हें प्यार से नानी कहते हैं. आज वही नानी अपने होममेड गुजराती स्नैक्स बिजनेस ‘नानी का नाश्ता’ (Nani’s Nashta) के लिए जानी जाती हैं.
उनका जन्म 1927 में हुआ था और 22 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई. उन्होंने अपने पति के साथ 68 साल तक खुशहाल जीवन बिताया. साल 2017 में पति के निधन के बाद उनकी जिंदगी अचानक बदल गई. घर की रसोई, जो पहले खुशियों से भरी रहती थी, अब शांत हो गई. बच्चे अपने जीवन में व्यस्त थे और नानी को लगने लगा कि उनके जीवन का उद्देश्य कहीं खो गया है. इतने वर्षों में पहली बार उन्होंने महसूस किया कि उनके पास खाना बनाने के लिए कोई नहीं था.
छोटी सी शुरुआत ने बदली जिंदगी
नानी की जिंदगी में बदलाव एक छोटे से पल से आया. एक दिन घर पर चाय का कार्यक्रम था. उन्होंने अपने हाथों से खांडवी बनाई. जो भी आया, उसने उस स्वाद की दिल से तारीफ की. लोगों ने दोबारा बनाने को कहा और पैसे देने की भी बात की.
फिर एक दिन, उनकी बेटी की दोस्त ने पूछा, “नानी, क्या आप मेरी पार्टी के लिए खांडवी बना सकती हैं?” उसने इसके लिए पैसे देने की भी ज़िद की.
शुरुआत में नानी हिचकिचाईं क्योंकि 91 साल की उम्र में काम शुरू करना आसान नहीं था.
लेकिन इसी छोटे से मौके ने उनके भीतर एक नई उम्मीद जगा दी. धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने लगे और लोगों का प्यार बढ़ता गया.
साल 2018 में ‘नानी का नाश्ता’ की शुरुआत हो गई.

प्रभावती नानी ने अपने पति के साथ 68 साल तक खुशहाल जीवन बिताया. साल 2017 में उनके पति का निधन हो गया. अगले साल 91 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘Nani’s Nashta’ की शुरुआत की.
घर की रसोई से बनी खास पहचान
नानी ने कोई बड़ा सेटअप या दुकान नहीं खोली. उन्होंने अपने घर की रसोई से ही काम शुरू किया. उनके हाथों में वह स्वाद है जो लोगों को अपने घर की याद दिलाता है.
उनके मेन्यू में खांडवी सबसे खास है, जिसने इस सफर की शुरुआत की थी. इसके अलावा ढोकला, थेपला और भाखरी जैसे पारंपरिक गुजराती स्नैक्स भी शामिल हैं. साथ ही वड़ा पाव, सेव पुरी और पाव भाजी जैसे स्ट्रीट फूड भी लोगों को खूब पसंद आते हैं.
आज नानी करीब 200 परिवारों के लिए खाना बनाती हैं और उनका छोटा सा किचन प्यार और स्वाद का केंद्र बन चुका है.
उम्र नहीं, जुनून मायने रखता है
नानी की कहानी यह दिखाती है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है. जिस उम्र में लोग आराम करना चाहते हैं, उस उम्र में उन्होंने नया काम शुरू किया. उन्होंने कोई बड़ी योजना नहीं बनाई, बस अपने दिल की सुनी. खाना बनाना उनका जुनून था और उसी ने उन्हें फिर से जीने का कारण दिया.
आज नानी की कहानी देशभर में लोगों को प्रेरित कर रही है. सोशल मीडिया पर लोग उन्हें सिर्फ एक कुक नहीं बल्कि हिम्मत और नई शुरुआत की मिसाल मानते हैं.
उनकी कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी में कभी भी देर नहीं होती. अगर मन में इच्छा हो तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है. नानी यह साबित करती हैं कि जुनून कभी खत्म नहीं होता और जिंदगी हमेशा हमें एक और मौका देती है.
(images: instagram/sonalibhagwati)



