Aarohan Awards 2025: जानिए Infosys Foundation के इस खास अवार्ड की कहानी!
इन्फोसिस फाउंडेशन ने ‘आरोहण सोशल इनोवेशन अवॉर्ड्स 2025’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. YourStory ने इस विषय पर इन्फोसिस फाउंडेशन के ट्रस्टी सुनील कुमार धारेश्वर से विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने इस पहल के उद्देश्य, प्रक्रिया और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की.
जब जुनून, तकनीक और समाजसेवा एक साथ मिलते हैं, तो वे सिर्फ समस्या का समाधान नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति की नींव रख देते हैं. यही मूल भावना है इन्फोसिस फाउंडेशन (Infosys Foundation) द्वारा शुरू किए गए “आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स” (Aarohan Social Innovation Awards) की. यह पुरस्कार उन अनसुने, अनदेखे नवाचारों को मंच देने का कार्य करता है, जो देश की सामाजिक संरचना को सशक्त और समावेशी बनाने में जुटे हैं.
इन्फोसिस फाउंडेशन ने ‘आरोहण सोशल इनोवेशन अवॉर्ड्स 2025’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस पहल का उद्देश्य ऐसे इनोवेटर्स को पहचानना और सम्मानित करना है, जो टेक्नोलॉजी आधारित समाधानों के जरिए समाज के वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं. कुल पुरस्कार राशि 2 करोड़ रुपये रखी गई है, जिसमें हर विजेता को अधिकतम 50 लाख रुपये तक की राशि मिल सकती है.
इन पुरस्कारों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा. 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी भारतीय नागरिक 24 अप्रैल से 15 जून, 2025 तक आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए प्रतिभागियों को अपने प्रोजेक्ट से जुड़ा एक वीडियो बनाकर अवॉर्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा. विजेताओं का चयन विशेषज्ञों की जूरी द्वारा समाधान की उपयोगिता, प्रभाव और इनोवेटर की प्रतिबद्धता के आधार पर किया जाएगा.
YourStory ने इस विषय पर इन्फोसिस फाउंडेशन के ट्रस्टी सुनील कुमार धारेश्वर (Sunil Kumar Dhareshwar) से विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने इस पहल के उद्देश्य, प्रक्रिया और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की.
YourStory [YS]: इन्फोसिस फाउंडेशन को आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स शुरू करने की प्रेरणा कहां से मिली?
सुनील कुमार धारेश्वर [सुनील]: भारत में कई समस्याएं हैं जिनका समाधान पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं. ऐसे में सामाजिक नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स की शुरुआत इसी सोच के साथ की गई थी कि हम उन नवाचारों को पहचानें और उन्हें प्रोत्साहन दें, जो वंचित वर्गों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं. यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जो समाधान को व्यापक पैमाने पर लागू करने में मदद करता है.
YS: इस पुरस्कार के तहत किन क्षेत्रों पर खास फोकस किया गया है?
सुनील: इस वर्ष अवार्ड्स में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इन क्षेत्रों में जमीनी चुनौतियां हैं जिनके लिए अभिनव और किफायती तकनीकी समाधानों की जरूरत है. उदाहरण के तौर पर, हमने पूर्व विजेताओं में 'स्मार्ट विजन ग्लासेज' और 'वन होम वन टॉयलेट' जैसे समाधान देखे हैं, जो सीधे तौर पर ज़मीनी स्तर पर परिवर्तन लाते हैं.
YS: तकनीक आधारित सामाजिक नवाचार को बढ़ावा देने के पीछे आपकी सोच क्या है?
सुनील: हम मानते हैं कि तकनीक सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती है. शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधान किफायती, विस्तार योग्य और स्थायी हो सकते हैं. इसीलिए, फाउंडेशन का उद्देश्य ऐसे नवाचारों को पहचानना है जो दूरदराज़ इलाकों तक पहुंच बनाएं और समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों को लाभ पहुंचाएं.
YS: इस साल पुरस्कार राशि और वितरण प्रक्रिया क्या है?
सुनील: इस वर्ष कुल 2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है. प्रत्येक विजेता को अधिकतम 50 लाख रुपये तक की फंडिंग, साथ ही मेंटॉरशिप और उद्यम प्रोत्साहन भी मिलेगा. विजेताओं का चयन एक प्रतिष्ठित और स्वतंत्र जूरी द्वारा किया जाएगा, जो सभी प्रस्तावों का गहराई से मूल्यांकन करेगी ताकि प्रभावी, सरल और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले नवाचारों को आगे लाया जा सके.
YS: विजेताओं का चयन किन मानदंडों के आधार पर किया जाएगा?
सुनील: हम तीन प्रमुख मानदंडों पर मूल्यांकन करते हैं:
- वास्तविक समस्याओं की पहचान – नवाचार ऐसा हो जो लक्षित लाभार्थियों पर गहरा प्रभाव डाले.
- तकनीक आधारित व्यावहारिक समाधान – स्पष्ट रूप से किफायती, सरल और स्केलेबल समाधान.
- संस्थापक की प्रतिबद्धता – नवप्रवर्तक (innovators) के भीतर बदलाव लाने का जुनून और दृढ़ निश्चय होना चाहिए.
साथ ही आवेदन में फंक्शनल प्रोटोटाइप, स्पष्ट विवरण, और वीडियो प्रजेंटेशन भी अपेक्षित हैं.
YS: अब तक के कुछ उल्लेखनीय विजेताओं के उदाहरण बताइए.
सुनील: हमारे कुछ पिछले विजेताओं को “शार्क टैंक इंडिया” (Shark Tank India) में भी पहचान मिली, जैसे:
- PadCare: मेन्स्ट्रूअल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए एक इनोवेटिव डिस्पोजल सॉल्यूशन.
- Annie: दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल में पढ़ना, लिखना और टाइप करना सिखाने वाला उपकरण.
- Inali Arm: एक किफायती कृत्रिम हाथ जो जरूरतमंद लोगों के लिए प्रोस्थेटिक केयर को सुलभ बनाता है.
ये उदाहरण इस बात का प्रमाण हैं कि आरोहण अवार्ड्स केवल पहचान नहीं, बल्कि प्रभाव भी उत्पन्न करते हैं.
YS: इस पहल के माध्यम से इन्फोसिस फाउंडेशन किस तरह का सामाजिक प्रभाव लाना चाहता है?
सुनील: हमारा उद्देश्य ऐसे सार्थक नवाचारों को प्रोत्साहित करना है, जो समाज की जटिल समस्याओं का समाधान देने की क्षमता रखते हैं. हम चाहते हैं कि यह पहल एक राष्ट्रीय सामाजिक नवाचार आंदोलन बन जाए. हर संस्करण के साथ हम मानव क्षमता को आगे बढ़ाने, सतत् विकास को बढ़ावा देने और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
YS: क्या विजेताओं को फंडिंग के अलावा अन्य सहयोग भी मिलेगा?
सुनील: जी हां. विजेताओं को मेंटॉरशिप, नेटवर्किंग के अवसर और उद्यम प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. हमारी मंशा है कि यह पुरस्कार विजेताओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं दे, बल्कि उन्हें दीर्घकालीन सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने में भी समर्थ बनाए.
YS: भारत में सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में किस तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं?
सुनील: भारत में पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक नवाचार को लेकर सोच में बदलाव आया है. आज इनोवेटर्स सहानुभूति और उद्यमशीलता को साथ लेकर चलते हैं. वे सिस्टम में बदलाव की प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि खुद समाधान खोजते हैं. तकनीक के साथ जमीनी समझ मिलकर अद्भुत परिणाम दे रही है. अब सामाजिक नवाचार केवल एक शब्द नहीं, बल्कि विकास का नया रास्ता बन गया है.
YS: इनोवेटर्स के लिए आपका क्या संदेश है जो इस अवार्ड के लिए आवेदन करना चाहते हैं?
सुनील: अगर आपके पास एक ऐसा विचार या प्रोटोटाइप है जो समाज में प्रभाव डाल सकता है, तो इस अवसर को न गंवाएं. आरोहण अवार्ड्स आपको सिर्फ सम्मान ही नहीं, बल्कि अपने विचार को व्यवहार में बदलने का मौका भी देते हैं. हमारी अपील है कि अधिक से अधिक नवप्रवर्तक सामने आएं और इस मंच का उपयोग कर अपने विचारों को यथार्थ में बदलें.
YS: भारत की सामाजिक चुनौतियों में तकनीक की भूमिका को आप किस रूप में देखते हैं?
सुनील: भारत में तकनीक अब केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि एक उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन का साधन बन चुकी है. चाहे बात रूरल क्लासरूम की हो या रिमोट हेल्थकेयर की, तकनीक का प्रभाव स्पष्ट है. हमारी मान्यता है कि सहानुभूति पर आधारित टेक्नोलॉजी ही स्थायी और समावेशी बदलाव ला सकती है.
YS: इस साल किस तरह के आवेदनों की उम्मीद है?
सुनील: हम व्यावहारिक, जुनून से भरपूर और जमीनी स्तर की चुनौतियों को हल करने वाले नवाचारों की तलाश में हैं. ऐसे आवेदन जो शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर स्पष्ट रूप से सकारात्मक सामाजिक प्रभाव डाल सकते हों.
आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक आंदोलन है. यह उन लोगों की कहानियों को सामने लाता है जो चुपचाप समाज में परिवर्तन ला रहे हैं. यदि आप भी एक इनोवेटर हैं, जो अपने आइडिया को समाज के हित में प्रयोग करना चाहते हैं, तो यह मौका आपके लिए है.



