AI से बढ़ेगा पानी का संकट! 2028 तक 11 गुना बढ़ेगी खपत – Morgan Stanley की रिपोर्ट
मॉर्गन स्टेनली की नई रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2028 तक एआई डेटा सेंटर्स की वजह से पानी की खपत 11 गुना बढ़कर 1,068 अरब लीटर हो जाएगी. रिपोर्ट में बताया गया है कि कूलिंग सिस्टम, बिजली उत्पादन और चिप निर्माण से पानी पर भारी दबाव बढ़ेगा, जिससे दुनिया के जल संकट में और इजाफा होगा.
मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) की हालिया रिपोर्ट (मॉर्गन स्टेनली रिपोर्ट 2025) में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स की वजह से आने वाले सालों में पानी की खपत कई गुना बढ़ जाएगी. (AI Water Consumption 2028) रिपोर्ट के अनुसार, साल 2028 तक वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़ा पानी का उपयोग 11 गुना बढ़कर 1,068 अरब लीटर सालाना हो सकता है. (डेटा सेंटर जल संकट) यह रिपोर्ट 8 सितंबर 2025 को प्रकाशित हुई. (Artificial Intelligence Environmental Impact)
AI का पानी पर दबाव कैसे बढ़ेगा?
रिपोर्ट में एआई के पानी के इस्तेमाल को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
- स्कोप 1: सीधे पानी का उपयोग, जैसे सर्वर को ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम.
- स्कोप 2: बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला पानी, क्योंकि डेटा सेंटर्स को भारी मात्रा में ऊर्जा चाहिए.
- स्कोप 3: सेमीकंडक्टर और चिप बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाला पानी, जिनसे एआई कंप्यूटिंग संभव होती है.
इन तीन श्रेणियों को मिलाकर अनुमान लगाया गया है कि 2028 तक पानी की खपत 637 अरब लीटर से लेकर 1,485 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. औसतन यह आंकड़ा 1,068 अरब लीटर होगा, जो आज के मुकाबले 11 गुना ज्यादा है.
क्षेत्रीय चिंता
दुनिया के आधे से ज्यादा बड़े डेटा सेंटर ऐसे इलाकों में हैं, जहां पहले से ही पानी की कमी है. इनमें सूखा प्रभावित इलाके, गिरती भूजल आपूर्ति वाले क्षेत्र और खराब पानी की गुणवत्ता वाले इलाके शामिल हैं. एआई से बढ़ती खपत इन क्षेत्रों में औद्योगिक और सामुदायिक पानी की मांग को और टकरावपूर्ण बना सकती है.
क्यों बढ़ रही है मांग?
एआई मॉडल बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर मांगते हैं. जैसे-जैसे फाइनेंस, ई-कॉमर्स, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे सेक्टर एआई का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे डेटा सेंटर की क्षमता भी बढ़ानी पड़ेगी. इसका मतलब है – ज्यादा बिजली और ज्यादा कूलिंग की जरूरत. और यह सीधे पानी की खपत में बदल जाएगा, चाहे कूलिंग टावर हों, पावर प्लांट हों या चिप बनाने वाले फैक्ट्री. (AI Growth and Water Demand)
समाधान क्या है?
रिपोर्ट बताती है कि पानी बचाने वाली कूलिंग तकनीकें, रीसाइक्लिंग सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल इस बढ़ती खपत को कुछ हद तक कम कर सकता है. नई लिक्विड-कूलिंग तकनीक, सरकारी नियम और कंपनियों की सस्टेनेबिलिटी नीतियां भी अहम होंगी.
लेकिन अगर बड़े बदलाव नहीं किए गए तो आने वाले सालों में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा पानी का इस्तेमाल एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन सकता है. डेटा सेंटर्स की सही लोकेशन और सख्त दक्षता मानक इस संतुलन में निर्णायक होंगे.
इंडस्ट्री पर असर
एआई को अपनाने की रफ्तार ने इसके आर्थिक फायदे के साथ-साथ पर्यावरणीय असर पर भी ध्यान खींचा है. कंपनियां और सरकारें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश तो कर रही हैं, लेकिन मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट दिखाती है कि पानी का बढ़ता दबाव एक बड़ा संकट बन सकता है.
यह आंकड़े बताते हैं कि एआई का अगला चरण सिर्फ नवाचार ही नहीं, बल्कि पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की चुनौती भी लेकर आएगा. अब सवाल यह है कि तकनीकी विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
Edited by Ravi Pareek



