दिहाड़ी मजदूर बना बिजनेसमैन: मथुरा के अजयवीर चला रहे खुद की टेक्सटाइल यूनिट
मथुरा के अजयवीर ने दिहाड़ी मजदूरी छोड़कर ‘मां चंद्रावल टेक्सटाइल’ यूनिट शुरू की, जहां कपास की पट्टियां बनाई जाती हैं. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिले लोन ने मशीन और कच्चा माल खरीदने में मदद की. आज यह छोटा उद्योग उनके परिवार की स्थिर आय का आधार बन गया है.
मथुरा जिले के वृंदावन के पास पनिगांव भुटिया के रहने वाले अजयवीर कभी दिहाड़ी मजदूर थे. जहां काम मिला, वहां चले गए. कभी मिठाई के डिब्बे बनाए. कभी छोटी दुकानों में काम किया. परिवार चलाने के लिए जो मिला, वही किया.
कुछ समय उन्होंने कपड़ा से जुड़े एक छोटे सेटअप में भी मजदूरी की. वहां कपास की पट्टियां बनाई जाती थीं. यही काम उनके मन में बैठ गया. उन्हें लगा कि अगर मौका मिले तो वह खुद भी ऐसा काम कर सकते हैं.
सालों तक मजदूरी करते हुए उन्होंने मशीन चलाना और कच्चे माल को तैयार करना सीखा. तब यह सिर्फ रोज की कमाई का साधन था. लेकिन अनुभव धीरे धीरे जमा होता गया.
जब उन्हें जान पहचान के लोगों से सरकारी सहायता योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया. स्वीकृति मिलने के बाद मथुरा में ‘मां चंद्रावल टेक्सटाइल’ नाम से छोटी यूनिट शुरू की.
यह यूनिट कपास की पट्टियां बनाती है. जिन्हें स्थानीय भाषा में नेवल कहा जाता है. इनका उपयोग चारपाई बुनाई और टेंट के काम में होता है. अभी काम इन्हीं दो क्षेत्रों तक सीमित है.
अजयवीर ने यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत 5 लाख रुपये का लोन लिया. करीब 62 हजार रुपये उन्होंने अपनी बचत से लगाए. बाकी राशि मशीन और कच्चा माल खरीदने में लगी.
वह कहते हैं कि शुरुआत में डर था. लेकिन ब्याज न होने के कारण फैसला आसान हुआ. उनके शब्दों में, “अगर डरोगे तो काम नहीं कर पाओगे.”
पहले महीने उन्होंने खुद मशीन चलाई. धीरे धीरे ऑर्डर आने लगे. तब उन्होंने एक कुशल कारीगर को मशीन चलाने के लिए रखा. वह खुद रोलिंग प्रक्रिया देखते हैं ताकि गुणवत्ता बनी रहे. उनकी बेटी तैयार माल की गांठें बांधने में मदद करती है.
मशीन से कच्चे माल को कपास की पट्टी में बदला जाता है. फिर अजयवीर खुद बाजार में जाकर खरीदारों से मिलते हैं. शुरुआत में बार बार जाना पड़ा. बात करनी पड़ी. समझाना पड़ा. धीरे धीरे कुछ नियमित ग्राहक मिल गए.
इस समय अधिकतर माल आगरा जाता है. हाल ही में कर्नाटक भी कुछ ट्रायल ऑर्डर भेजे गए हैं. अजयवीर कहते हैं कि प्रतिक्रिया अच्छी है.
दिहाड़ी मजदूरी से अपना कारोबार शुरू करना आसान नहीं था. अब उन्हें कच्चा माल खरीदना, गुणवत्ता देखना और बाजार संभालना सब सीखना पड़ा है. लेकिन अब आमदनी उनके नियंत्रण में है. परिवार को नियमित सहारा मिला है.
अजयवीर का कहना है कि वह काम कम नहीं करेंगे. धीरे धीरे बढ़ाना चाहते हैं. फिलहाल यूनिट छोटा है. लेकिन स्थिर है.
यह कहानी दिखाती है कि अनुभव कभी व्यर्थ नहीं जाता. जो काम उन्होंने दूसरों के लिए किया, वही आज उनकी अपनी पहचान बन गया है. दिहाड़ी से उद्यमी बनने का यह सफर धीरे धीरे तय हुआ है. और अब यह उनके परिवार की मजबूती का आधार है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



