गोरखपुर के निजामुद्दीन अंसारी ने कैसे खड़ा किया प्रिंटिंग प्रेस कारोबार, जानिए...
गोरखपुर के निजामुद्दीन अंसारी ने कढ़ाई के मौसमी काम से आगे बढ़कर अपना छोटा प्रिंटिंग प्रेस शुरू किया. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक सहायता ने कच्चा माल खरीदने और कारोबार मजबूत करने में मदद की. आज यह यूनिट उनके परिवार की स्थिर आजीविका का आधार है.
गोरखपुर जिले के तिवारीपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला पिपरापुर में एक छोटा सा प्रिंटिंग प्रेस है. यहां रंगों की सुगंध और मशीन की आवाज रोज सुनाई देती है. इस यूनिट को चलाते हैं निजामुद्दीन अंसारी. यहां प्रचार सामग्री और दुकानदारों के लिए छपे हुए कैरी बैग तैयार किए जाते हैं.
प्रेस में केवल प्रिंटिंग का काम होता है. सिलाई और फिनिशिंग का काम बाहर के कारीगर करते हैं. रंग और पेंट बाजार से लाए जाते हैं. फिर डिजाइन के अनुसार छपाई की जाती है और तैयार माल दुकानदारों तक पहुंचाया जाता है.
निजामुद्दीन की कहानी अचानक शुरू नहीं हुई. वर्ष 2006 में उनके पिता का निधन हो गया. परिवार में पांच बहनें और दो भाई थे. घर की आर्थिक स्थिति अस्थिर हो गई. उस समय घर में छोटी मशीन से कढ़ाई का काम होता था. लेकिन उसकी मांग साल में सिर्फ तीन या चार महीने रहती थी.
अनिश्चित आय से घर चलाना मुश्किल था. इसी कारण 2010 के आसपास निजामुद्दीन और उनके भाई ने प्रिंटिंग का काम शुरू करने की सोची. शुरुआत छोटी थी. काम सीखना पड़ा. ग्राहकों से संपर्क बनाना पड़ा. धीरे धीरे व्यापार बढ़ा.
समय के साथ परिवार बढ़ा. दोनों भाइयों की शादी हुई. बच्चों की जिम्मेदारी आई. खर्च बढ़े. त्योहारों और शादी के मौसम में छपे बैग और प्रचार सामग्री की मांग ज्यादा होती थी. लेकिन कच्चा माल समय पर खरीदना चुनौती बन जाता था.
इसी दौरान दोस्तों से बातचीत में उन्हें यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने आवेदन किया. उनका कहना है कि उन्होंने यह विकल्प इसलिए चुना क्योंकि इसमें ब्याज नहीं देना पड़ता.
वह कहते हैं, “हम ब्याज से बचना चाहते थे, इसलिए हमने यही रास्ता चुना.” इस सहायता से उन्होंने कच्चा माल बड़ी मात्रा में खरीदा. आने वाले त्योहारों की तैयारी पहले से कर सके.
निजामुद्दीन और उनके भाई खुद प्रिंटिंग का काम संभालते हैं. जरूरत पड़ने पर बाहर के कारीगर सिलाई का काम करते हैं. उनका मानना है कि कर्ज लेने से पहले पूरी जानकारी जरूरी है. वह दूसरों को भी सलाह देते हैं कि सीधे जानकारी लें और बिना समझे किसी पर निर्भर न रहें.
आज उनका प्रिंटिंग प्रेस साल भर चलता है. अब आय सिर्फ मौसमी नहीं रही. काम नियमित हो गया है. यह बदलाव एक दिन में नहीं आया. सालों की मेहनत और छोटे फैसलों से बना है.
गोरखपुर के इस छोटे से प्रेस ने उनके परिवार को स्थिर आधार दिया है. कढ़ाई के सीमित काम से आगे बढ़कर अब उनका कारोबार पूरे साल चलता है. यह कहानी दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और सही निर्णय से नया रास्ता बनाया जा सकता है.
निजामुद्दीन अंसारी का सफर बड़े सपनों का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और निरंतर मेहनत का सफर है. आज उनका प्रिंटिंग प्रेस सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि परिवार की स्थिरता का आधार है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



