कैसे अलीगढ़ के दीपक कुमार ने शीशे को बनाया रोजगार? जानिए...
अलीगढ़ के दीपक कुमार ने ग्लास (शीशा) फिटिंग और एलईडी मिरर का काम मेहनत और धैर्य से सीखा. शुरुआती संघर्ष के बाद यूपी सरकार की CM YUVA योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने वर्कशॉप को स्थिरता दी और उनके हुनर को आजीविका का मजबूत साधन बनाया.
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक छोटा सा वर्कशॉप है. यहां शीशे काटे जाते हैं. किनारे चमकाए जाते हैं. आईने पर डिजाइन उभरते हैं. यहीं से घरों और दुकानों के लिए टेबल, मिरर, डिजाइनर मिरर, एलईडी मिरर और टफन्ड ग्लास तैयार होते हैं. इस वर्कशॉप को चलाते हैं दीपक कुमार.
दीपक का काम देखने में आसान लगता है. लेकिन असल में इसमें धैर्य चाहिए. हाथ की सफाई चाहिए. और हर कदम पर सावधानी जरूरी है. एक छोटी सी गलती पूरा शीशा खराब कर सकती है. दीपक पिछले पांच छह साल से इसी काम में हैं. इस दौरान उन्होंने सीखा भी है और खुद को संभालकर खड़ा भी किया है.
दीपक का यह सफर अलीगढ़ से बाहर शुरू हुआ. वह अपने चाचा के पास गए. वहीं उन्होंने कांच के काम की बुनियाद सीखी. दिन भर शीशा काटना. घिसना. किनारे साफ करना. काम भारी था. समय लंबा था. लेकिन यहीं से उन्हें समझ आया कि अलग अलग मोटाई के शीशे कैसे संभाले जाते हैं. टूटने से कैसे बचाया जाता है. और ग्राहक की जरूरत के हिसाब से डिजाइन कैसे बदले जाते हैं.
कुछ समय बाद वह वापस अलीगढ़ लौटे. अपना काम शुरू करने का फैसला किया. यह फैसला आसान नहीं था. आसपास के लोग आशंकित थे. सप्लायर और ग्राहक से कैसे बात होगी. कच्चा माल कहां से आएगा. इन सवालों के जवाब उनके पास अनुभव से नहीं थे.
दीपक कहते हैं, “यह काम मुझे आता था. और मैं इसे सही तरीके से करना चाहता था.” इसी भरोसे के साथ उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया.
शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी चुनौती कच्चा माल था. शीशा और मिरर पूरे शीट में आते हैं. पहले पैसा लगाना पड़ता है. फिर उन्हें सही नाप में काटना होता है. भरोसेमंद सप्लायर ढूंढने में समय लगा. कई बार गलत माल आया. नुकसान भी हुआ.
धीरे धीरे काम की एक तय प्रक्रिया बनी. जैसे एलईडी मिरर बनाना. पहले मिरर शीट आती है. फिर उसे नाप के अनुसार काटा जाता है. उसके बाद मशीन से किनारे घिसे जाते हैं. डिजाइन कंप्यूटर पर तैयार होता है. प्लॉटिंग और टेपिंग से शीशे पर उतारा जाता है. फ्रॉस्टिंग की जाती है ताकि रोशनी सही तरीके से बाहर आए. फिर एलईडी लाइट और फ्रेम लगाए जाते हैं.
इसके बाद तैयार मिरर पैक होता है. और साइट पर जाकर फिट किया जाता है. हर चरण में गलती की गुंजाइश रहती है. अनुभव बढ़ने के साथ बेकार होने वाला माल कम हुआ. काम की रफ्तार भी बेहतर हुई.
एक समय ऐसा भी आया जब पूंजी की कमी काम रोकने लगी. ऑर्डर थे. लेकिन मशीन और कच्चा माल खरीदने के पैसे नहीं थे. इसी दौरान दीपक को यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में पता चला. उन्होंने बैंक से संपर्क किया.
इस योजना से मिली मदद ने काम को सांस दी. मशीनें खरीदी गईं. जरूरी स्टॉक रखा जाने लगा. बार बार काम रुकने की स्थिति कम हुई. इससे एक स्थिरता आई.
अब खर्च और कमाई का हिसाब ज्यादा साफ है. घर का खर्च संभलता है. वर्कशॉप रोजमर्रा की जरूरत के अनुसार चलती है. अनिश्चितता पहले जैसी नहीं रही.
दीपक जब पीछे देखते हैं तो शुरुआती सालों की थकान याद आती है. सीखने का दौर. नुकसान. संदेह. आज भी काम आसान नहीं है. लेकिन अब भरोसा है. यह भरोसा उस हुनर से आता है जिसे उन्होंने धैर्य से सीखा.
यह कहानी किसी बड़े कारखाने की नहीं है. यह कहानी एक छोटे वर्कशॉप की है. जहां शीशे के साथ साथ एक इंसान ने अपनी जिंदगी को भी तराशा है. सीमित साधनों में भी अगर हुनर और लगन हो तो धीरे धीरे रास्ता निकल आता है. दीपक कुमार का सफर इसी बात की मिसाल है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



