मां की सैलरी 17 महीने नहीं आई, बेटे ने खड़ा किया रोज़गार देने वाला स्टार्टअप
फ्रीलांसिंग की ठगी से जन्मा एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म Writers Community. जानिए कैसे अंकित देव अर्पण ने संघर्ष, बीमारी और कोरोना जैसे कठिन दौर से निकलकर हजारों युवाओं को स्किल, ट्रेनिंग और रोज़गार से जोड़ा.
बिहार के पश्चिमी चंपारण से निकलकर आज देश भर के हजारों युवाओं को रोज़गार से जोड़ने वाले अंकित देव अर्पण (Ankit Dev Arpan) की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. यह कहानी है संघर्ष, सपना, विश्वास और उस जिद की, जिसने Writers Community जैसे प्लेटफॉर्म को जन्म दिया. एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जिसने अब तक 1200 से अधिक लोगों को काम दिया है और 2000 से ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया है.
अंकित का सफर सिर्फ एक उद्यमी बनने की कहानी नहीं है. यह उस बेटे की कहानी है जिसने घर की आर्थिक तंगी को बहुत करीब से देखा. वह दौर, जब उनकी मां की सैलरी 17 महीनों तक नहीं आई. यूनिवर्सिटी की फीस घर वालों ने कर्ज लेकर जमा की. लेकिन रहने और रोजमर्रा के खर्चों के लिए किसी के पास कोई समाधान नहीं था. उसी समय ने अंकित को बहुत जल्दी बड़ा बना दिया.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, अंकित बताते हैं, “मैंने फ्रीलांसिंग शौक में नहीं, मजबूरी में शुरू की थी. जब पेट और पढ़ाई दोनों साथ चल रहे हों, तब ज़िंदगी बहुत तेज़ी से सिखा देती है.”
इतनी कम उम्र (21 साल) में इतना बड़ा नेटवर्क संभालना आसान नहीं था.
अंकित कहते हैं, “सफलता रातों रात नहीं मिलती. बाहर सब चमकता दिखता है, लेकिन अंदर कई अंधेरी रातें होती हैं. और सबसे बड़ी ताकत टीम होती है.”
पार्ट टाइम नौकरी से आज़ादी की तलाश तक
पढ़ाई के साथ अंकित ने एक बुक पब्लिकेशन में ट्रेनी एडिटर की नौकरी शुरू की. सर्दियों के दिनों में क्लास के बाद सीधे काम पर जाना. शाम सात बजे तक वहीं रुकना. इसके बाद भी कई बार पैसे समय पर नहीं मिलते थे. धीरे धीरे यह नौकरी एक बोझ बनती चली गई.
अंकित को यह एहसास होने लगा कि वह सिर्फ अपना समय नहीं, अपनी ऊर्जा भी ऐसे सिस्टम में दे रहे हैं, जहां कोई सुरक्षा नहीं थी. वहीं से फ्रीलांसिंग उनके जीवन में आई.
शुरुआत आसान नहीं थी. कई बार काम किया और पैसे नहीं मिले. कई बार मेहनत के बाद भी सिर्फ वादे हाथ लगे. तभी अंकित को एहसास हुआ कि फ्रीलांसर्स के लिए एक सुरक्षित और ईमानदार व्यवस्था की जरूरत है.
अंकित कहते हैं, “जब मेहनत के बाद भी काम का पैसा न मिले, तब इंसान अंदर से टूट जाता है. उसी दर्द से यह प्लेटफॉर्म निकला.”

अंकित देव अर्पण
बीमारी ने दिया बड़ा आइडिया
फरवरी 2020 में यह आइडिया पूरी तरह पक्का हो गया. उस समय अंकित बीमार थे और उन्हें एक बड़ा प्रोजेक्ट पूरा करना था. वह खुद काम नहीं कर पा रहे थे. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय सोशल मीडिया से कुछ युवाओं को जोड़ा और उन्हें वह काम सौंपा.
धीरे धीरे यह छोटा सा प्रयोग एक टीम में बदल गया. बातचीत के दौरान पता चला कि लगभग हर दूसरा युवा फ्रीलांसिंग में ठगी का शिकार हुआ है. कहीं पैसे नहीं मिले, कहीं काम रिजेक्ट कर दिया गया.
उसी समय अंकित ने तय कर लिया कि अब वह एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगे जहां भुगतान की पूरी सुरक्षा होगी.
कोरोना में संकट नहीं, अवसर बना प्लेटफॉर्म
2021 में Writers Community की औपचारिक शुरुआत हुई. यह वही दौर था जब पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था. कंपनियां बंद हो रही थीं. लाखों लोगों की नौकरियां चली गई थीं.
लेकिन इसी दौर में ऑनलाइन एजुकेशन, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया का काम तेजी से बढ़ा. लोगों को घर बैठे काम चाहिए था. अंकित के लिए यह समय चुनौती नहीं, अवसर बन गया.
अंकित बताते हैं, “कोरोना ने बहुत कुछ छीना, लेकिन ऑनलाइन काम का रास्ता भी उसी दौर में सबसे ज्यादा खुला.”
सिर्फ काम नहीं, भरोसे का रिश्ता
Writers Community की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां फ्रीलांसर्स सीधे कोर टीम से जुड़े रहते हैं. भुगतान की पूरी जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की होती है. कोई रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाती. कोई सुविधा शुल्क नहीं.
अंकित बताते हैं, “काम सैंपल के आधार पर मिलता है और भुगतान पहले तय होता है. यहां स्कैम की कोई जगह नहीं रखी गई है. युवाओं को यहां सिर्फ काम नहीं मिलता. उन्हें सीखने का मौका मिलता है. अपनी गलतियों से सुधारने का मौका मिलता है.”
यही वजह है कि आज यह प्लेटफॉर्म सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि एक कम्युनिटी बन चुका है.
आज यहां से 700 से ज्यादा युवा नियमित रूप से काम कर रहे हैं. सैकड़ों युवा बड़ी कंपनियों में अपनी पहचान बना चुके हैं.
‘स्किल के दम पर बनता है भविष्य’
अंकित का मानना है कि फ्रीलांसिंग का मतलब सिर्फ कंटेंट राइटिंग नहीं होता. इसमें ग्राफिक डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, ट्रांसलेशन, ट्रांसक्रिप्शन, कस्टमर सपोर्ट, PR (Public relations) और वेब डिजाइन जैसे ढेरों रास्ते हैं.
हर युवा अलग होता है. हर युवा की क्षमता अलग होती है. इसी वजह से टीम पहले बातचीत करती है. फिर उसे सही दिशा में ट्रेनिंग दी जाती है. इसके बाद धीरे धीरे उसे पेड प्रोजेक्ट दिए जाते हैं.
आज के दौर में AI Prompt, SEO (Search engine optimization), स्क्रिप्ट राइटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, कॉपीराइटिंग और ट्रांसलेशन जैसी स्किल्स की भारी मांग है.
अंकित युवाओं के लिए सलाह देते हुए कहते हैं, “आज डिग्री से ज्यादा स्किल की कीमत है. अगर हुनर है, तो दुनिया खुद रास्ता दे देती है. डिग्री के अहंकार में मत रहो. डिजिटल दुनिया हर छह महीने में बदलती है. खुद को अपडेट रखो. काम बोलता है, सर्टिफिकेट नहीं.”
उनका मानना है कि हर युवा को एक डिजिटल स्किल जरूर सीखनी चाहिए और अपनी डिजिटल पहचान भी बनानी चाहिए.
जब किताबों और मीडिया को भी मिला नया मंच
Writers Community के साथ साथ अंकित ने तीन और बड़े संस्थान खड़े किए. Kaivalya Prakashan, BizPulse Media और Lex Cyber Attorneys.
जब लेखकों की किताबें तैयार हुईं, तो उन्हें छपवाने के लिए भटकना पड़ा. तभी Kaivalya Prakashan की शुरुआत हुई. आज इससे कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. ‘उत्तर देता मौन’ जैसी किताब को देश स्तर पर सम्मान मिल चुका है.
BizPulse Media उन छोटे स्टार्टअप्स की आवाज़ बनी, जिनकी बात कोई नहीं सुनता था. महिला उद्यमियों और दिव्यांगों के बिजनेस को यहां खास मंच मिला.
साइबर लॉ से समाज सेवा तक
Lex Cyber Attorneys अंकित की साइबर लॉ में रुचि का परिणाम है. उन्होंने National Forensic Sciences University, गांधीनगर (गुजरात) से साइबर लॉ में LLM किया.
आज यह फर्म 100 से अधिक साइबर मामलों में लोगों की मदद कर चुकी है. कई मामलों में पुलिस के साथ मिलकर काम किया गया है.
अब स्कूल और कॉलेजों में साइबर अवेयरनेस (जागरूकता) प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं ताकि बच्चे ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराध से बच सकें.
अंकित बताते हैं, “डिजिटल दुनिया जितनी ताकतवर है, उतनी ही खतरनाक भी है. जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है.”
मातृभाषा में रोजगार का सपना
अब Writers Community हिंदी, तमिल, बंगाली और दूसरी भारतीय भाषाओं पर जोर दे रहा है. इसका हेडक्वार्टर दिल्ली के लक्ष्मी नगर में है.
अंकित का सपना है कि गांव का वह लड़का, जिसे अंग्रेजी नहीं आती, वह भी अपनी भाषा में लिखकर पैसे कमा सके.
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI टूल्स को भी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है ताकि काम और आसान हो सके.
बिहार के युवाओं के लिए खास संदेश
अंकित मूल रूप से बिहार से हैं. वह कहते हैं, “बिहार के युवाओं में टैलेंट की कोई कमी नहीं है. बस सरकारी नौकरी के मोह से बाहर निकलना होगा. हमें नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनना है.”
उनके लिए सफलता बैंक बैलेंस नहीं है. उनके लिए सफलता वह दिन है, जब किसी गरीब घर का बच्चा अपनी पहली कमाई से अपनी मां के लिए साड़ी खरीदता है.
अंकित देव अर्पण की कहानी सिर्फ एक ऑन्त्रप्रेन्योर की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जो मजबूरी से शुरू होकर मिशन बन गई. आज Writers Community सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीद है, जो अपने हुनर के दम पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं.
उनकी कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादा मजबूत हो, तो किस्मत भी रास्ता दे देती है.




