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कृषि में सुधार के लिए ज़रूरी है जैविक खेती का विस्तार, प्रधानमंत्री ने कहा, किसानों को अच्छा दाम मिलना चाहिए

योरस्टोरी टीम हिन्दी
19th Jan 2016
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जैविक खेती के क्षेत्र में सिक्किम की सफलता का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर में जैविक खेती के विस्तार करने की आज वकालत की ताकि कृषि क्षेत्र में सुधार हो और किसानों को उनकी उपज का अधिक लाभदायक मूल्य मिल दिलाने में मदद मिले।

यहां प्रदेशों के कृषि मंत्रियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने हाल में घोषित फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने खेती के अनुकूल मोबाइल एप, ऑनलाईन मंडियों और खेती में मूल्य वर्धन की पहल पर जोर दिया।

मौसम की मार सहने वाले किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा के उपाय के रूप में मोदी ने सुझाया कि उन्हें खेती की गतिविधियों को तीन बराबर हिस्सों बांटना चाहिये.. इसमें एक हिस्सा फसल उत्पादन की नियमित खेती, आर्थिक रूप से लाभप्रद टिम्बर :इमारती लकड़ी: के लिए वृक्षारोपण और पशुपालन।

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उन्होंने कहा कि टिम्बर और पशुपालन सामान्य खेती को नुकसान होने पर वैकल्पिक सहारे का काम करेंगे और किसानों को ‘बेबसी की स्थिति’ का सामना नहीं करना होगा।

फलों की बर्बादी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उन्होंने शेतलपेय बनाने वाली कंपनियों से कहा कि वे इन उत्पादों में पांच प्रतिशत फलों के रस का सम्मिश्रण करें ताकि किसानों को वित्तीय हानि न हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 

"अगर हम किसानों, कृषि और गांवों को टुकड़ों में देखेंगे तो देश को लाभ नहीं होगा। हमें खेती के कामकाज को सम्पूर्णता के साथ देखना होगा।" 

उन्होंने कहा कि वह यहां सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ इस बात पर विचार विमर्श करने आये हैं कि किस तरह से भारत के कृषि का रूपांतरण किया जा सकता है।

सम्मेलन के मेजबान राज्य सिक्किम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए विकास की नई उंचाइयों को छू रहा है।

इस संदर्भ में उन्होंने जैविक खेती का हवाला दिया जो सिक्किम में सफलता की कहानी कहता है। उन्होंने अन्य राज्यों से अपील की कि वे रणनीतिक स्तर पर :जैविक खेती के लिए: करीब 100 से 150 गांवों को मिलाकर एक जिला अथवा एक ब्लॉक अथवा तालुका को चुनें और वहां इसकी कोशिश करें.. अगर प्रयोग सफल रहता है, तो बाकी जगह के किसान खुद ही इसका अनुपालन करेंगे। किसानों को वैज्ञानिकों के कितने भी व्याख्यान से कोई असर नहीं होगा.. उनके लिए जो दिखेगा वही वे मानेंगे। मोदी ने राज्यों से कहा कि वे फैसला करें कि किस दिशा में जाना है। उन्होंने कहा कि उन्हें विरोध के कारण हतोत्साहित नहीं होना चाहिये।

मोदी ने कहा, 

"जब :सिक्किम में: लगभग एक दशक पहले जैविक खेती के विचार को साझा किया गया होगा, मुझे पूरा यकीन है कि लोगों में इसका विरोध रहा होगा। लेकिन सिक्किम में किसानों ने इसे नहीं छोड़ा.. लगभग एक दशक से वे इसमें लगे रहे। यह कोई छोटी बात नहीं है। सिक्किम ने हमें रास्ता दिखाया है और आज जो कुछ हम देख रहे हैं वह एक विचार के प्रति कठोर श्रम और विश्वास को दर्शाता है।"

राज्यों से जैविक खेती को सफल बनाना सुनिश्चित करने को कहते हुए मोदी ने कहा कि जैविक उत्पादों के लिए दुनिया भर में भारी मांग है और यह खेती किसानों के साथ साथ देश के लिए लाभकारी साबित होगी।

सिक्किम को ‘सुखिस्तान’ बताकर उसका उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने अपने 40 मिनट के संबोधन में कहा, जो कोई अपनी इच्छा अथवा अपने रास्ते का परित्याग नहीं करते, वे अपने जीवन में कुछ जरूर हासिल करते हैं.. छोटे किस्म के प्रयोग बदलाव के अनुभव को नहीं दे सकते। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जैविक खेती की लहर देश भर में फैलेगी।

पूर्व की सरकारों पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कहा कि पहले कृषि के मुद्दे पर दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा होती थी जहां राज्यों के कृषि मंत्रियों को आना, बोलना और जाना होता था।

प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार दिल्ली से बाहर हो रहे इस तरह के सम्मेलन के महत्व को रखांकित करते हुए कहा, 

"यह पहला मौका है कि खेती से संबंधित मुद्दे पर बात करने के लिए कृषि मंत्रीगण दो दिन बैठे हैं तथा प्रौद्योगिकीय उन्नतियों का इस्तेमाल करते हुए अल्पावधिक, दीर्घावधिक समाधान की ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का नतीजा राज्यों के बजटों और कृषि के विकास की रूपरेखा तथा केन्द्र के दृष्टिकोण में परिलक्षित होगा। हाल में घोषित फसल बीमा योजना के बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि पहले के की योजना 20 प्रतिशत से अधिक किसानों को आकषिर्त नहीं कर सकी थी। स्थितियों को बदलना होगा और लक्ष्य कम से कम 50 प्रतिशत :किसानों को इसकी सुरक्षा में लाने का: होना चाहिये। उन्होंने कहा कि यह हमारी कोशिश होनी चाहिये।

उन्होंने कहा कि बीमा के दायरे में विस्तार के कारण सरकार को बोझ तो बढ़ेगा लेकिन इससे किसानों में आशा का संचार होगा।

उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के बारे में बात करते हुए कहा कि किसानों को ऐसे कार्यक्रमों के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य जांचने की प्रयोगशालाओं का संजाल देश भर होना चाहिये तथा इस उद्देश्य के लिए स्कूल की प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल भी गर्मी की छुट्टियों के दौरान किया जाना चाहिये।

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