कोविड के बाद गांव लौटे ईश्वर कृष्ण, शुरू किया आर्टिफिशियल फूलों का बिजनेस
बांदा के मवाई गांव में ईश्वर कृष्ण ने यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक मदद से आर्टिफिशियल फूलों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की. यह कहानी दिखाती है कि कोविड के बाद गांव लौटकर कैसे उन्होंने महिलाओं को घर से काम का मौका दिया और धीरे धीरे एक स्थिर स्थानीय व्यवसाय खड़ा किया.
बांदा जिले के मवाई गांव में एक छोटा सा आर्टिफिशियल (कृत्रिम) फूल बनाने का यूनिट चल रहा है. बाहर से कच्चा माल आता है. मशीन से कटिंग और पंचिंग होती है. इसके बाद यह सामान आसपास के गांवों में घर घर पहुंच जाता है. वहां महिलाएं हाथ से फूलों को आकार देती हैं और सिलाई करती हैं. तैयार फूल वापस यूनिट में आते हैं. यहीं उनका अंतिम संयोजन और पैकिंग होती है.
इस यूनिट को ईश्वर कृष्ण चला रहे हैं. वह कोविड के समय अपने गांव लौटे थे. इससे पहले उनका जीवन बिल्कुल अलग दिशा में चल रहा था. उन्होंने भूगोल में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था और दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. महामारी के कारण उनकी दिनचर्या टूट गई. इसी दौरान निजी नुकसान भी हुआ. ऐसे समय में वह बांदा लौट आए. आगे क्या करना है, यह साफ नहीं था.
ईश्वर किसी कारोबारी परिवार से नहीं आते. गांव लौटने के बाद उन्होंने कई विकल्पों पर विचार किया. कागज से जुड़े उत्पाद, डेयरी और खाद बनाने जैसे काम भी सोचे. लेकिन आर्टिफिशियल फूलों का काम उन्हें अलग लगा. इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. इसे छोटे स्तर से शुरू किया जा सकता है. जगह और जमीन की जरूरत भी ज्यादा नहीं होती.
उन्होंने एक रिश्तेदार के साथ समय बिताया, जो हाथ से फूल बनाने के काम से जुड़ा था. वहीं से उन्होंने इस काम की बुनियादी समझ हासिल की. इसके बाद गांव के हिसाब से एक अर्ध मशीनी मॉडल तैयार किया. जिसमें मशीन और हाथ के काम दोनों का संतुलन है.
शुरुआती पूंजी यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत मिली. इस मदद से मशीनें खरीदी गईं और यूनिट की शुरुआत हुई. बाकी खर्च जैसे किराया, बिजली और रोजमर्रा का संचालन उन्होंने अपनी बचत से संभाला. ईश्वर कहते हैं कि सीएम युवा योजना ने उन्हें शुरुआत का सहारा दिया. लेकिन बाजार में टिके रहना उनकी रोज की मेहनत पर निर्भर है.
इस यूनिट की सबसे खास बात है घर से काम करने वाली महिलाएं. मशीन से कटे हुए अर्ध तैयार फूल उन्हें दिए जाते हैं. महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार घर पर ही सिलाई और आकार देने का काम करती हैं. जब काम पूरा होता है तो या तो यूनिट का व्यक्ति उसे लेकर आता है या महिलाएं खुद जमा कर देती हैं. उसी समय भुगतान भी हो जाता है.
ईश्वर बताते हैं कि यह काम उन महिलाओं के लिए खास है जो रोज बाहर जाकर काम नहीं कर सकतीं. घर से कमाई करना उनके लिए आसान और सम्मानजनक विकल्प है.
यह मॉडल यूनिट को भी मदद करता है. त्योहार और आयोजनों के समय अचानक मांग बढ़ जाती है. ऐसे में पहले से तैयार स्टॉक काम आता है. आर्टिफिशियल फूलों को रखने के लिए ज्यादा जगह नहीं चाहिए. न ही इनके लिए खेती या जमीन की जरूरत होती है. इसी वजह से यह काम एक छोटे कमरे से भी चल सकता है.
चार महीने में काम पूरी तरह आसान नहीं हुआ है. कीमतों को लेकर दबाव रहता है. स्थानीय बाजार में मोल भाव ज्यादा होता है. कभी काम ज्यादा होता है, कभी कम. लोन की किस्तें भी जल्दी शुरू हो जाती हैं. ऐसे में शुरुआती समय में दबाव महसूस होता है. ईश्वर मानते हैं कि अगर कुछ समय की राहत मिले तो नए उद्यमियों के लिए रास्ता और आसान हो सकता है.
फिर भी अब दिनचर्या बनने लगी है. उत्पादन के लक्ष्य तय होते हैं. स्टॉक की योजना बनती है. महिलाओं से तालमेल बैठाना रोज का काम है. ईश्वर कहते हैं कि पहले जीवन अलग था. अब हर दिन जिम्मेदारी से बंधा हुआ है.
आगे वह बहुत तेज बढ़ने की बात नहीं करते. उनके लिए अभी सबसे जरूरी है काम को समझना, बाजार सीखना और धीरे धीरे मजबूत होना. मवाई गांव में यह छोटा सा यूनिट आज सिर्फ एक व्यवसाय नहीं है. यह एक ऐसा प्रयास है, जो स्थानीय जरूरतों, घर से काम और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



