वकालत छोड़ बाराबंकी के लक्ष्मी नारायण ने खड़ा किया फर्नीचर का कारोबार
बाराबंकी के पेशेवर वकील लक्ष्मी नारायण ने सागवान की लकड़ी से फर्नीचर का कारोबार शुरू किया. यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना के तहत मिले ब्याज मुक्त लोन ने उनके बिजनेस को स्थिर रफ्तार दी और साइड जॉब को सफल उद्यम में बदला.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले लक्ष्मी नारायण कभी अदालतों में फाइलें संभालते थे. वह पेशे से वकील थे. लेकिन आज उनके हाथों में लकड़ी के औजार हैं और सामने सागवान (सागौन) की खुशबू से भरी एक फर्नीचर वर्कशॉप है. उन्होंने कानून की दुनिया से निकलकर बढ़ईगीरी को अपना रास्ता बनाया और खुद का कारोबार खड़ा किया.
लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि जब वह वकालत कर रहे थे, तभी उनके मन में फर्नीचर के काम का विचार आया. उनका एक करीबी दोस्त पहले से इस कारोबार में था. उसी को देखकर उन्होंने भी इसे आजमाने का फैसला किया. शुरुआत में उन्होंने अपनी कुछ बचत लगाई. पिता से थोड़ी मदद ली. फिर एक छोटी सी वर्कशॉप शुरू की.
फर्नीचर का काम ऐसा होता है जिसमें पहले पैसा खर्च होता है और मुनाफा बाद में आता है. लकड़ी खरीदनी होती है. कारीगरों को भुगतान करना होता है. दो से तीन महीने में उन्हें समझ आ गया कि बिना नियमित पूंजी के काम आगे बढ़ाना मुश्किल है.
इसी दौरान स्थानीय बैंक मैनेजर ने उन्हें यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में बताया. लक्ष्मी नारायण ने योजना की जानकारी ऑनलाइन देखी. जरूरी कागजात जुटाए और आवेदन किया. वह बताते हैं कि बैंक की ओर से पूरा सहयोग मिला.
करीब बारह से पंद्रह दिनों में लोन मंजूर हो गया. उसके कुछ ही दिनों बाद रकम खाते में आ गई. लगभग तीन हफ्तों में पैसा मिलते ही वर्कशॉप का काम एक तय रफ्तार में चलने लगा. कच्चा माल समय पर आने लगा और ऑर्डर पूरे होने लगे.
आज लक्ष्मी नारायण की वर्कशॉप में अच्छी क्वालिटी के सागवान की लकड़ी से फर्नीचर बनाया जाता है. उनका फोकस ऑर्डर के हिसाब से काम करने पर है. बाराबंकी और आसपास के इलाकों के घरों के लिए फर्नीचर तैयार किया जाता है.
जैसे जैसे लोगों में उनके काम की चर्चा बढ़ी, वैसे वैसे ऑर्डर भी बढ़ने लगे. अब उनके यहां बेड, सोफा और डाइनिंग सेट बनते हैं. ड्रेसिंग यूनिट और स्टोरेज का काम भी होता है. शादी के लिए कस्टम फर्नीचर और कुछ चुनिंदा होम डेकोर आइटम भी बनाए जाते हैं.
लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि फर्नीचर के कारोबार में असली नतीजे आने में समय लगता है. उनके मामले में पांचवें या छठे महीने के बाद स्थिति बेहतर हुई. ऐसे समय में ब्याज मुक्त लोन बहुत काम आया. अगर वह किसी निजी व्यक्ति से ऊंचे ब्याज पर पैसा लेते, तो दबाव बढ़ जाता.
इस योजना के तहत उन्हें न सिर्फ सस्ता फंड मिला, बल्कि मानसिक शांति भी मिली. नकदी का संतुलन बना रहा और काम पर ध्यान देने का मौका मिला.
वह कहते हैं कि जान पहचान वालों से पैसा मांगने में सामाजिक दबाव होता है. ब्याज भी ज्यादा होता है. इसके उलट सरकारी योजना में नियम साफ होते हैं. बैंक की निगरानी रहती है. विभागीय अधिकारी भी समय समय पर हालचाल पूछते हैं.
लक्ष्मी नारायण बताते हैं कि अधिकारियों के फोन आते थे. काम की प्रगति पूछी जाती थी. हाल ही में बाराबंकी में हुए एक कार्यक्रम में उन्हें और दूसरे लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया. उनके लिए यह एक नया हौसला था.
करीब पांच लाख रुपये के शुरुआती लोन से कारोबार को स्थिर करने में मदद मिली. अब लक्ष्मी नारायण आगे बढ़ने की सोच रहे हैं. वह मानते हैं कि अगर दस से पंद्रह लाख रुपये तक का फंड मिले, तो डिजाइन की रेंज बढ़ाई जा सकती है. बेहतर मशीनें खरीदी जा सकती हैं. डिलीवरी का समय भी कम किया जा सकता है.
फिलहाल उनका पूरा ध्यान अच्छी सागवान की लकड़ी की सप्लाई बनाए रखने और कारीगरी की गुणवत्ता पर है. उनका मानना है कि यही चीज ग्राहकों को बार बार लौटकर आने के लिए मजबूर करती है.
लक्ष्मी नारायण की कहानी यह दिखाती है कि सही समय पर मिला सस्ता और भरोसेमंद कर्ज किसी साइड काम को मजबूत कारोबार में बदल सकता है. जैसे वह खुद कहते हैं, पैसा खाते में आते ही काम अपनी लय पकड़ लेता है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



