Techademy: 33 साल पहले दो भाइयों ने शुरू की एडटेक कंपनी, तय किया क्लासरूम से AI तक का सफर
दो भाइयों की सोच से शुरू हुई Techademy आज एडटेक की दुनिया में एक अलग पहचान बना चुकी है. बदलते दौर में कंपनी ने शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी को कम करने, NEP 2020 के बदलावों और टेक्नोलॉजी-समर्थित लर्निंग पर काम किया है.
साल 1992 का दौर था. भारत में तकनीक धीरे-धीरे जगह बना रही थी. कॉलेजों से पढ़कर निकलने वाले छात्र उम्मीदों से भरे होते थे, लेकिन नौकरी की दुनिया में कदम रखते ही उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता था. पढ़ाई और काम के बीच एक बड़ा फासला था. इसी फासले ने डॉ. केशव राजू (Dr. Keshava Raju) और उनके भाई माधव राजू (Madhav Raju) को सोचने पर मजबूर किया.
उन्होंने महसूस किया कि सिर्फ डिग्री काफी नहीं है. असली जरूरत थी समझ की, हाथों से काम करने की और सही दिशा की. इसी सोच से Techademy की शुरुआत हुई. शुरुआत छोटी थी, लेकिन इरादा बड़ा था.
डॉ. केशव राजू कहते हैं, “मैं बार-बार देख रहा था कि अच्छे छात्र नौकरी में जाकर भटक जाते हैं. क्लासरूम की सीख और कंपनियों की जरूरतों में फर्क था. उसी गैप को भरना हमारा मकसद बना.”
आज 33 साल बाद Techademy सिर्फ एक एडटेक कंपनी नहीं, बल्कि शिक्षा और उद्योग के बीच पुल की तरह खड़ी है.
90 के दशक में टेक्नोलॉजी को करियर मानना आसान नहीं था. परिवारों को समझाना मुश्किल था. लोग पारंपरिक डिग्री को ही सुरक्षित मानते थे. ऐसे माहौल में एक टेक-लर्निंग कंपनी बनाना बड़ी चुनौती थी.
इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित था. अच्छे ट्रेनर्स मिलना आसान नहीं था. व्यावसायिक शिक्षा को उतनी अहमियत भी नहीं मिलती थी. Techademy को धीरे-धीरे अपना भरोसा बनाना पड़ा. हर बैच, हर छात्र और हर रिजल्ट के साथ कंपनी आगे बढ़ती गई.
Techademy के को-फाउंडर और सीईओ डॉ. केशव राजू याद करते हैं, “हमने कभी जल्दी में बढ़ने की कोशिश नहीं की. हमने क्वालिटी चुनी. इसलिए सफर लंबा रहा, लेकिन मजबूत रहा.”
यही सोच कंपनी की पहचान बन गई. शिक्षा को उन्होंने व्यापार नहीं, जिम्मेदारी माना. यही वजह रही कि Techademy ने हर कदम सोच-समझकर उठाया.

समय के साथ शिक्षा व्यवस्था बदलने लगी. नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 ने कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को लचीलापन दिया. लेकिन असली चुनौती थी इसे लागू करना. सिलेबस अपडेट करना आसान नहीं था. मंजूरियों की प्रक्रिया लंबी थी. शिक्षक कागजी काम में उलझ जाते थे.
यहीं से Techademy ने एक नया कदम उठाया. भारत का पहला NEP Course Generator बनाया गया. इसका मकसद था शिक्षकों का काम आसान करना और कोर्स डिजाइन को तेज और प्रभावी बनाना.
डॉ. राजू कहते हैं, “कॉलेज बदलना चाहते थे, लेकिन उनके पास सही टूल नहीं थे. हमने ऐसा सिस्टम बनाया जो शिक्षकों का बोझ कम करे, न कि बढ़ाए.”
इसी सोच से HEXp प्लेटफॉर्म का जन्म हुआ. यह सिर्फ कंटेंट देने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है. यह पूरे कोर्स की योजना बनाने में मदद करता है. लर्निंग आउटकम तय करता है. असेसमेंट को सही ढंग से जोड़ता है. यानी शिक्षा को शुरुआत से अंत तक एक स्पष्ट दिशा देता है.
उनके शब्दों में, “हमने HEXp को इस तरह बनाया कि शिक्षक की भूमिका मजबूत हो. तकनीक सिर्फ मदद करे, जगह न ले.”
Techademy की शुरुआत क्लासरूम ट्रेनिंग से हुई थी. धीरे-धीरे दुनिया ऑनलाइन हुई और कंपनी भी बदलती गई. अब यह विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और कॉरपोरेट लर्निंग टीम्स के साथ साझेदारी में काम करती है. फोकस अब भी वही है. सीखना उपयोगी हो. संरचित हो. और वास्तविक दुनिया से जुड़ा हो.
पिछले तीन सालों में कंपनी ने रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में 10 मिलियन डॉलर का निवेश किया. इसका नतीजा ऐसे फ्रेमवर्क के रूप में सामने आया जो जटिल अकादमिक प्रक्रियाओं को आसान बनाते हैं. काम की गति बढ़ी, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं हुआ.
डॉ. राजू कहते हैं, “हमारा लक्ष्य तेज भागना नहीं था. भरोसेमंद सिस्टम बनाना था, जो सालों तक काम करे.”
Techademy की एक खास बात यह भी है कि कंपनी 33 साल से बूटस्ट्रैप्ड है. यानी बिना बाहरी फंडिंग के आगे बढ़ी. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन इसके पीछे साफ सोच थी.
डॉ. राजू कहते हैं, “शिक्षा में धैर्य चाहिए. जब आप स्वतंत्र होते हैं, तब आप लंबी सोच सकते हैं. हर खर्च का मतलब होना चाहिए. सिर्फ कागज पर नहीं, नैतिक रूप से भी.”
आज कंपनी बाहरी निवेश के लिए दरवाजे बंद नहीं करती, लेकिन शर्त साफ है. गुणवत्ता और मूल्यों से समझौता नहीं होगा. आने वाले दो सालों में Techademy का फोकस संस्थानों के साथ गहरी साझेदारी बनाने पर रहेगा. प्लेटफॉर्म को और सरल बनाया जाएगा. नए विषय जोड़े जाएंगे. और शिक्षकों को बदलती जरूरतों के लिए तैयार किया जाएगा.
भारत की शिक्षा व्यवस्था एक बदलाव के दौर से गुजर रही है. NEP 2020 ने नए रास्ते खोले हैं. विषयों को मिलाने की आजादी. प्रैक्टिकल सीखने पर जोर. लेकिन डॉ. राजू मानते हैं कि असली सफलता सिर्फ तकनीक से नहीं आएगी.
उनका कहना है, “रोजगार की दुनिया में सबसे जरूरी चीज है साफ सोच, अच्छी बातचीत और बदलने की क्षमता. टूल मदद करते हैं, लेकिन सीखना हमेशा इंसान के इर्द-गिर्द रहना चाहिए.”
यही सोच Techademy की यात्रा को खास बनाती है. यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जिसमें शिक्षा किताबों से निकलकर जिंदगी से जुड़ रही है.
33 साल का सफर किसी भी कंपनी के लिए छोटा नहीं होता. Techademy की कहानी बताती है कि अगर इरादा साफ हो और काम ईमानदारी से किया जाए, तो बदलाव संभव है. डॉ. केशव राजू ने शिक्षा को सिर्फ करियर बनाने का जरिया नहीं माना, बल्कि आत्मविश्वास और स्पष्ट सोच बनाने का माध्यम समझा.
आज जब शिक्षा तेजी से बदल रही है, Techademy जैसे प्रयास यह याद दिलाते हैं कि तकनीक और इंसान साथ चलें तो सीखना ज्यादा असरदार बनता है. आने वाले सालों में शायद प्लेटफॉर्म बदलें, तरीके बदलें, लेकिन एक बात स्थिर रहेगी. सीखना हमेशा इंसान को बेहतर बनाने की प्रक्रिया रहेगा.



