इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में जो नहीं दिखता, स्टार्टअप KlugKlug वही दिखा रहा है
यह कहानी है स्टार्टअप KlugKlug की, जो डेटा और रिसर्च के जरिए इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को अंदाज़े से निकालकर समझ और पारदर्शिता की ओर ले जा रहा है.
डिजिटल दौर में ब्रांड और ग्राहक के बीच की दूरी कम हुई है. लेकिन इस दूरी को पाटने का तरीका अक्सर धुंधला रहा है. खासकर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में. लाखों फॉलोअर्स, हजारों लाइक्स और चमकते प्रोफाइल के पीछे असली सच्चाई क्या है. क्या सही लोगों तक संदेश पहुंच रहा है. क्या यह निवेश वाकई काम कर रहा है. इन सवालों के जवाब लंबे समय तक सिर्फ अंदाज़े पर टिके रहे.
यहीं पर एंट्री हुई स्टार्टअप KlugKlug की. गुरुग्राम से शुरू हुई यह कंपनी इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को एक नई भाषा देने की कोशिश कर रही है. यह भाषा है डेटा की, पारदर्शिता की, और भरोसे की. कल्याण कुमार (Kalyan Kumar) इसके को-फाउंडर और सीईओ हैं, जबकि वैभव गुप्ता (Vaibhav Gupta) को-फाउंडर और सीपीओ हैं. ये दोनों दो दशकों से ज्यादा समय से मार्केटिंग की दुनिया को करीब से देख रहे हैं.
शुरुआत
कल्याण कुमार ने अपने करियर की शुरुआत एक फाउंडर के तौर पर नहीं की थी. वह एक मार्केटर थे. कॉरपोरेट ब्रांड्स से लेकर स्टार्टअप्स तक उन्होंने कई भूमिकाएं निभाईं. टेक, कंज्यूमर और गेमिंग जैसे अलग अलग सेक्टर में काम किया. इस सफर में उन्होंने यह समझा कि कहानी और प्रभाव किस तरह बिजनेस को आगे बढ़ाते हैं.
2015 में उन्होंने वैभव गुप्ता के साथ एक डिजिटल एजेंसी शुरू की. यहां बड़े ब्रांड्स के लिए इन्फ्लुएंसर कैंपेन चलाए गए. कंटेंट को वायरल करने की रणनीतियां बनीं. लेकिन इसी दौरान एक बात साफ होती गई.
कल्याण कहते हैं, “इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की ताकत असली है. लेकिन इसे मापने का तरीका कमजोर है.” ब्रांड्स पैसे लगा रहे थे. लेकिन यह नहीं जानते थे कि सही ऑडियंस तक पहुंच रही है या नहीं. फैसले भरोसे से ज्यादा आदत पर आधारित थे.
यहीं से एक सवाल पैदा हुआ. क्या इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को भी उसी सख्ती से मापा जा सकता है जैसे बाकी मार्केटिंग चैनल्स को.
2022 में KlugKlug की शुरुआत हुई. मकसद सीधा था. इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग से अंदाज़ा हटाना. और उसकी जगह समझ लाना. प्लेटफॉर्म यह नहीं देखता कि किसी के कितने फॉलोअर्स हैं. यह देखता है कि फॉलोअर्स कौन हैं. वे असली हैं या नहीं. वे ब्रांड के लिए मायने रखते हैं या नहीं.
कल्याण कहते हैं, “हम कंफर्ट मेट्रिक्स से बाहर निकलना चाहते थे.” KlugKlug का सिस्टम ऑडियंस की उम्र, लोकेशन, रुचि और व्यवहार को समझता है. फेक एंगेजमेंट को अलग करता है. और यह साफ दिखाता है कि किसी इन्फ्लुएंसर की पहुंच कितनी असरदार है.
यह प्लेटफॉर्म सिर्फ डेटा नहीं दिखाता. यह फैसले लेने में मदद करता है. शायद यही वजह है कि यह कई इंटरनेशनल टूल्स के सामने टिक पाया. फीचर्स की लंबी लिस्ट के बजाय यहां समझ पर जोर है.
कल्याण मानते हैं, “अगर CXO डेटा नहीं समझ पाए तो वह काम का नहीं.” KlugKlug की कोशिश रही है कि इनसाइट्स ऐसे हों जिन्हें बोर्डरूम में भी रखा जा सके.
ब्रांड और एजेंसी की बदलती सोच
आज KlugKlug एक बीटूबी सास प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है. बड़े ब्रांड्स और एजेंसियां इसका इस्तेमाल करती हैं. डीटूसी और कंज्यूमर ब्रांड्स में इसकी पकड़ मजबूत है. खासकर ब्यूटी और पर्सनल केयर जैसे सेक्टर में.
इन सेक्टर्स में सोशल मीडिया पर शोर ज्यादा है. लेकिन KlugKlug उस शोर के भीतर से मतलब की आवाज़ निकालने की कोशिश करता है. एजेंसियों के लिए यह समय बचाने का तरीका बना है. ब्रांड्स के लिए जोखिम कम करने का.
कल्याण कहते हैं, “हमारा काम इन्फ्लुएंसर को जज करना नहीं है. हमारा काम ब्रांड को सच दिखाना है.” इसी वजह से प्लेटफॉर्म में पारदर्शिता पर जोर है. हर आंकड़े के पीछे उसका तरीका बताया जाता है.
टेक्नोलॉजी के साथ भरोसा
इन्फ्लुएंसर इकोसिस्टम तेजी से बदलता है. नए प्लेटफॉर्म आते हैं. एल्गोरिदम बदलते हैं. फेक अकाउंट्स भी नए तरीके ढूंढते हैं. ऐसे में डेटा की शुद्धता सबसे बड़ी चुनौती है.
KlugKlug का सिस्टम लाखों प्रोफाइल्स को लगातार स्कैन करता है. संदिग्ध पैटर्न पकड़ता है. ऑडियंस की सच्चाई को परखता है. लेकिन यहां भी तकनीक अकेली नहीं है.
कल्याण कहते हैं, “AI मदद करता है. लेकिन सोच इंसान की होती है.” टीम का अनुभव तय करता है कि कौन सा डेटा मायने रखता है. यही संतुलन KlugKlug की पहचान बनता है.
भविष्य की योजनाएं
हाल ही में कंपनी ने रणनीतिक निवेश जुटाया है. निवेशकों में मार्केटिंग और स्टार्टअप दुनिया के अनुभवी नाम हैं. लेकिन कंपनी का फोकस सिर्फ विस्तार पर नहीं है.
KlugKlug अब इन्फ्लुएंसर एक्टिविटी को ई कॉमर्स असर से जोड़ रहा है. यानी कंटेंट से लेकर खरीद तक की दूरी को समझना. यह रिसर्च की दुनिया को सैंपल से निकालकर पूरे डेटा यूनिवर्स तक ले जाने की कोशिश है.
कल्याण कहते हैं, “अगर डेटा बिक्री तक नहीं पहुंचता तो वह अधूरा है.” आने वाले समय में कंपनी साउथ ईस्ट एशिया, मिडल ईस्ट और दूसरे बाजारों में गहराई से काम करना चाहती है.
KlugKlug की कहानी किसी चमकदार ट्रेंड की नहीं है. यह एक इंडस्ट्री को आईना दिखाने की कहानी है. जहां लंबे समय तक भरोसा अंदाज़े पर टिका रहा. वहां अब सवाल पूछे जा रहे हैं. कौन देख रहा है. क्यों देख रहा है. और इसका असर क्या है.
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का भविष्य शायद और ज्यादा डेटा आधारित होगा. लेकिन उसका मतलब ठंडा या बेजान होना नहीं है. KlugKlug यही दिखाने की कोशिश कर रहा है कि जब समझ और तकनीक साथ चलें तो फैसले बेहतर होते हैं. और मार्केटिंग सच के करीब आती है.



