ODF Plus से डिजिटल पंचायत और राष्ट्रीय पुरस्कार तक, जानिए कैसे मुखिया सुषुमलता कुशवाहा ने बदली बिहार के गांव की तस्वीर
भोजपुर की दावां पंचायत की मुखिया सुषुमलता कुशवाहा ने कैसे डिजिटल गवर्नेंस, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए अपने गांव की तस्वीर बदल दी. जानिए बिहार की इस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मॉडल पंचायत की सफलता की कहानी...
बिहार (Bihar) की पहचान अब केवल इतिहास, संस्कृति और विरासत तक सीमित नहीं है. राज्य के कई गांव सुशासन, डिजिटल बदलाव और स्थानीय नेतृत्व की नई मिसाल बन रहे हैं. भोजपुर जिले (Bhojpur district) के जगदीशपुर प्रखंड (Jagdishpur block) की दावां पंचायत (Dawa Panchayat) भी ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है.
करीब 14 हजार की आबादी वाली इस पंचायत ने ई-गवर्नेंस, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किए हैं. इन्हीं प्रयासों के लिए इसे केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ओर से ‘दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार’ मिल चुका है. दावां पंचायत बिहार की पहली डिजिटल पंचायत सरकार भवन वाली पंचायत और भोजपुर जिले की पहली ODF Plus पंचायत भी है.
इस सराहनीय बदलाव का श्रेय जाता है पंचायत की मुखिया सुषुमलता कुशवाहा को, जिन्होंने पिछले एक दशक में अपने अथक प्रयासों से पूरी पंचायत का कायाकल्प कर दिया.
बचपन का सपना बना संकल्प
सुषुमलता कुशवाहा (Shushumalata Kushwaha) का बचपन देश के अलग-अलग राज्यों में बीता. उनके पिता भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) थे. लगातार स्थानांतरण के कारण उन्हें विभिन्न राज्यों की संस्कृति और समाज को करीब से देखने का अवसर मिला. उनकी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई और बाद में उन्होंने मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) की डिग्री हासिल की.
शादी के बाद वह भोजपुर के ग्रामीण परिवेश में आईं. वर्ष 2016 में महिला आरक्षण के तहत अपने पति और परिवार के प्रोत्साहन से पंचायत चुनाव लड़ा और पहली बार मुखिया चुनी गईं.
बचपन में दूसरे राज्यों में रहते हुए उन्होंने बिहार और बिहारियों को लेकर बनी नकारात्मक धारणाएं देखीं. उसी अनुभव ने उनके भीतर अपने राज्य के लिए कुछ करने का संकल्प जगाया.
YourStory से हुई बातचीत में दावां पंचायत की मुखिया सुषुमलता कुशवाहा बताती हैं, “जब मैं अपने पिता के साथ देश के अलग-अलग राज्यों में रहती थी, तब अक्सर बिहार और बिहारियों को अलग नजर से देखा जाता था. उसी समय मैंने मन में ठान लिया था कि अगर जीवन में कुछ करना है तो अपने राज्य के लिए करना है. आज जब किसी मंच पर बिहार का प्रतिनिधित्व करती हूं तो गर्व महसूस होता है कि मैं अपने गांव और अपने राज्य की पहचान दुनिया के सामने रख पा रही हूं.”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (बीच में) का स्वागत करतीं दावां पंचायत की मुखिया सुषुमलता कुशवाहा (दाएं) और अन्य।
गंदे रास्ते से शुरू हुई बदलाव की कहानी
मुखिया बनने के बाद उनके सामने पहली बड़ी चुनौती पंचायत सरकार भवन तक जाने वाला रास्ता था. खुले में शौच के कारण यह रास्ता बेहद गंदा रहता था. लोगों की आदत बदलना आसान नहीं था. कई बार विरोध भी झेलना पड़ा.
लगातार संवाद, जनजागरूकता और लोगों की भागीदारी के बाद 31 दिसंबर 2016 को दावां पंचायत खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित हुई. इसके बाद पंचायत ने ODF Plus का दर्जा भी हासिल किया.
सुषुमलता बताती हैं, “जब मैंने काम शुरू किया तो सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सोच बदलना था. पंचायत सरकार भवन तक जाने वाला रास्ता ही लोगों के लिए शौच का स्थान बन गया था. लोगों को समझाना आसान नहीं था. कई बार विरोध भी हुआ. लेकिन हमने हार नहीं मानी. जब पूरा गांव साथ आया तो वही पंचायत आज स्वच्छता और डिजिटल व्यवस्था के लिए पूरे देश में पहचानी जाती है.”
डिजिटल पंचायत बनी नई पहचान
स्वच्छता अभियान के बाद पंचायत ने डिजिटल सेवाओं पर फोकस किया. पंचायत सरकार भवन में एक ही छत के नीचे कई सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं. यहां आरटीपीएस (RTPS) की सेवाएं भी दी जा रही हैं, जिससे लोगों को प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय नहीं जाना पड़ता.
पंचायत ने अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए. हाट-बाजार के बेहतर संचालन से हर साल करीब 1.30 लाख रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हो रहा है, जिसे पंचायत के विकास कार्यों में लगाया जा रहा है.

मुखिया सुषुमलता कुशवाहा के प्रयासों की बदौलत दावां पंचायत बिहार की पहली डिजिटल पंचायत सरकार भवन वाली पंचायत और भोजपुर जिले की पहली ODF Plus पंचायत बनी. इस पंचायत को केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ओर से ‘दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार’ मिल चुका है.
शिक्षा और स्वास्थ्य में दिखा बदलाव
दावां पंचायत में हर घर नल का जल योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन हुआ है. प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के साथ पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच भी की जाती है.
शिक्षा के क्षेत्र में बाल सभा और बालिका सभा जैसी पहल शुरू की गई. पंचायत की मुखिया सुषुमलता कुशवाहा के अनुसार, इन प्रयासों से स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या लगभग शून्य तक पहुंच गई है. बाल विवाह रोकने के लिए भी लगातार जागरूकता अभियान चलाए गए.
महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुलकर हुई बात
पंचायत की सबसे उल्लेखनीय पहलों में से एक मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर किया गया काम है.
एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सुषुमलता को सैनिटरी पैड निर्माण की जानकारी मिली. गांव लौटने पर उन्होंने पाया कि अधिकांश महिलाएं अब भी पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं. इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से 'संगिनी' सैनिटरी पैड निर्माण इकाई शुरू की गई.
इस पहल से महिलाओं में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी और कई महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला.
सुषुमलता कुशवाहा बताती हैं, “मासिक धर्म पर बात करना गांव में सबसे कठिन काम था. शुरुआत में महिलाएं खुलकर बोलने से डरती थीं और पुरुष इसे चर्चा का विषय ही नहीं मानते थे. हमने स्कूलों, स्वयं सहायता समूहों और बैठकों के जरिए लगातार संवाद किया. आज वही महिलाएं खुले मन से स्वास्थ्य और स्वच्छता पर बात करती हैं. यह बदलाव मेरे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है.”
लोगों की भागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत
दावां पंचायत की सफलता केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं है. पंचायत ने स्वास्थ्य समितियों का गठन किया, नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित कीं और फिलेरिया जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता अभियान चलाए.
पंचायत के कार्यों का मूल्यांकन विभिन्न संस्थाओं ने किया. विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भी यहां के मॉडल का अध्ययन कर इसकी सराहना की.
सुषुमलता मानती हैं कि किसी भी पंचायत का विकास केवल मुखिया के भरोसे संभव नहीं है.
सुषुमलता कहती हैं, “किसी पंचायत को मॉडल पंचायत केवल योजनाएं नहीं बनातीं. असली ताकत वहां के लोग होते हैं. हमने हर फैसले में गांव के लोगों को साथ लिया. महिलाओं, युवाओं और बच्चों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया. जब समाज खुद बदलाव का हिस्सा बन जाता है तो विकास अपने आप तेज हो जाता है और उसकी पहचान दूर तक पहुंचती है.”

बिहार सरकार की योजनाओं, नीतियों और पंचायत मुखिया सुषुमलता की अगुवाई में स्वच्छता से लेकर डिजिटल गवर्नेंस, शिक्षा से लेकर महिला स्वास्थ्य और स्थानीय आय बढ़ाने तक, दावां पंचायत ने ऐसे कई प्रयोग किए हैं, जिनसे अन्य ग्रामीण क्षेत्र भी सीख ले सकते हैं.
अब रोजगार पर है फोकस
राष्ट्रीय पुरस्कार और कई सम्मान मिलने के बावजूद सुषुमलता खुद को आज भी सीखने वाली जनप्रतिनिधि मानती हैं.
उनका अगला लक्ष्य पंचायत में स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाना है. वह चाहती हैं कि छोटे उद्योगों और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को गांव में ही सम्मानजनक रोजगार मिले.
सुषुमलता कुशवाहा कहती हैं, “अगर आपकी इच्छाशक्ति मजबूत है तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती. इस सफर में परिवार, गांव और साथियों का सहयोग हमेशा मिला. आज मेरा सपना है कि हमारी पंचायत रोजगार के नए अवसर पैदा करे. महिलाएं और युवा अपने गांव में ही सम्मान के साथ काम करें. यही असली विकास होगा और यही हमारी अगली मंजिल है.”
क्यों खास है दावां पंचायत की कहानी
दावां पंचायत यह साबित करती है कि बदलाव केवल बड़े शहरों में नहीं होता. दूरदर्शी नेतृत्व, जनभागीदारी और लगातार प्रयासों से एक गांव भी पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है.
स्वच्छता से लेकर डिजिटल गवर्नेंस, शिक्षा से लेकर महिला स्वास्थ्य और स्थानीय आय बढ़ाने तक, इस पंचायत ने ऐसे कई प्रयोग किए हैं, जिनसे अन्य ग्रामीण क्षेत्र भी सीख ले सकते हैं.
सुषुमलता कुशवाहा के सफर की यह कहानी बताती है कि जब शिक्षा, संवेदनशीलता और सेवा का भाव नेतृत्व के साथ जुड़ता है, तब पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं रहती, बल्कि सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम बन जाती है. बिहार सरकार की योजनाओं, नीतियों और पंचायत मुखिया सुषुमलता की अगुवाई में दावां पंचायत आज उसी सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त पहचान है.



