बिहार के IIIT भागलपुर ने डिजाइन की 32-बिट समीकंडक्टर चिप, क्यों है खास? जानिए
IIIT भागलपुर ने चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम के तहत दुनिया की सबसे छोटी 32-बिट सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन की है. यह ऊर्जा दक्ष और किफायती चिप स्मार्टफोन, हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. यह उपलब्धि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की राह दिखाती है.
बिहार के भागलपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT Bhagalpur) ने तकनीकी अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है. संस्थान ने 32-बिट सेमीकंडक्टर चिप (32 Bit Semiconductor Chip) का सफलतापूर्वक डिज़ाइन तैयार किया है. इसे दुनिया की सबसे छोटी सेमीकंडक्टर चिप बताया जा रहा है.
यह काम भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित ‘चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम’ के तहत किया गया है. यह प्रोग्राम देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण क्षमताओं को विकसित करने तथा शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया था.
लाइव हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब डिजाइन के आधार पर एचसीएल चंडीगढ़ (HCL Chandigarh) में एआई बेस्ड चिप को तैयार किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मंत्रालय से ट्रिपल आईटी भागलपुर को करीब 98 लाख रुपये की फंडिंग मिली है. सेमीकंडक्टर चिप का डिजाइन तैयार करने के लिए मंत्रालय से पांच वर्ष का समय मिला है. जबकि यह कार्य दो वर्ष में ही पूरा कर दिया गया. अब डिजाइन के आधार पर तीन माह में चिप का निर्माण एचसीएल चंडीगढ़ में पूरा होगा. इस माह चिप डिजाइन का रिसर्च पेपर, पेटेंट व डिजाइन को एचसीएल को सौंप दिया जाएगा.
क्या है 32-बिट सेमीकंडक्टर चिप?
32-बिट सेमीकंडक्टर चिप मूल रूप से एक माइक्रोप्रोसेसर आर्किटेक्चर पर बनी होती है, जो एक साथ बड़ी मात्रा में डेटा को तेज़ी और सटीकता के साथ प्रोसेस कर सकती है. ऐसी चिप का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल्स, हेल्थकेयर उपकरणों और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से जुड़े डिवाइसों में रूप से होता है.
IIIT भागलपुर द्वारा विकसित की गई इस चिप को ऊर्जा दक्षता और लागत प्रभावशीलता को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह तकनीक छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि आज की दुनिया में डिजिटल उपकरणों की रीढ़ सेमीकंडक्टर चिप ही है, और भारत अभी तक अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है.
चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम का महत्व
भारत सरकार का चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम देश को वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है. इस योजना के तहत न केवल चिप डिजाइन के क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, बल्कि छात्रों और युवा उद्यमियों को भी चिप डिजाइन और वीएलएसआई (VLSI) टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित किया जा रहा है. इससे भारत की निर्भरता विदेशी कंपनियों पर घटेगी और घरेलू स्तर पर ही उच्च स्तरीय तकनीकी समाधान उपलब्ध हो पाएंगे.
वर्तमान में भारत अपने सेमीकंडक्टर की अधिकांश जरूरतें चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से पूरी करता है. ऐसे में C2S प्रोग्राम का मकसद इस आयात निर्भरता को धीरे-धीरे समाप्त करना और देश में आत्मनिर्भरता स्थापित करना है.
IIIT भागलपुर का योगदान
IIIT भागलपुर की इस उपलब्धि को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह संस्थान अपेक्षाकृत नया है, फिर भी इसने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है. संस्थान के संकाय सदस्यों और शोधार्थियों का कहना है कि इस 32-बिट चिप का प्रयोग भविष्य में स्मार्ट डिवाइस, रक्षा क्षेत्र की तकनीकों, कृषि उपकरणों के ऑटोमेशन और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में किया जा सकता है.
इससे न केवल उद्योगों को उन्नत समाधान मिलेंगे, बल्कि छात्रों को भी चिप डिजाइनिंग और उभरती हुई तकनीकों में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा.
IIIT भागलपुर का यह प्रयास बिहार के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, क्योंकि अब वे अपने ही राज्य में उच्च स्तरीय अनुसंधान और तकनीकी नवाचार का हिस्सा बन सकते हैं.
क्यों खास है यह उपलब्धि?
दुनिया की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री इस समय 500 बिलियन डॉलर से अधिक की है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह एक ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगी. भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन सेमीकंडक्टर की मांग पूरी करने के लिए अब भी देश को भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है. इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और घरेलू उद्योग सीमित विकल्पों में बंधा रहता है.
IIIT भागलपुर द्वारा विकसित यह 32-बिट चिप इस दिशा में एक नई शुरुआत है, जो आने वाले समय में भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
गौरतलब हो कि हाल ही में Semicon India 2025 में ISRO का पहला स्वदेशी 32-बिट स्पेस प्रोसेसर Vikram-32 केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पीएम मोदी को सौंपा. यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का बड़ा कदम है, जो सैटेलाइट और स्पेस मिशनों को नई रफ्तार देगा. भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के प्रयास कर रहा है. Vikram-32 की लॉन्चिंग उस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
आगे की राह
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संस्थान का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में और भी उन्नत वर्जन पर काम किया जाएगा. यदि इस चिप का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू हो सका तो बिहार और विशेषकर पूर्वी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम का नया केंद्र बन सकता है. यह न केवल उद्योगों के लिए लाभकारी होगा बल्कि रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में भी नए अवसर खोलेगा.

