1.5 लाख रु से शुरू की UPS बनाने वाली कंपनी, अब 20 देशों में 500 करोड़ का कारोबार
1.5 लाख रु से 500 करोड़ तक का सफर: जानिए कैसे अमितांशु सत्तापति ने Best Power Equipments (BPE) को भारत और विश्व में UPS, बैटरी और डेटा सेंटर समाधान में ग्लोबल पहचान दिलाई. इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और Make in India की प्रेरक कहानी, पढ़िए...
भारत में बिजली की समस्याएँ हमेशा ही आम आदमी और उद्योगों दोनों के लिए बड़ी चुनौती रही हैं. अचानक बिजली कटौती, निरंतर आउटेज और अलग-अलग इलाकों में बदलती बिजली की गुणवत्ता ने उद्योगों, दफ्तरों और घरों की दिनचर्या को प्रभावित किया है. ऐसे समय में जब दुनियाभर में टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही थी, भारत में पावर बैकअप और UPS समाधान हमेशा किसी भरोसेमंद और कस्टमाइज्ड विकल्प की कमी महसूस करते थे.
यहीं से Best Power Equipments (BPE) की शुरुआत हुई. साल 2000 में, मात्र ₹1.5 लाख के छोटे निवेश के साथ, अमितांशु सत्तापति (Amitansu Satpathy) ने BPE की नींव रखी. उनका उद्देश्य सिर्फ एक कंपनी बनाना नहीं था, बल्कि भारत में बनी विश्वसनीय पावर टेक्नोलॉजी को भारतीय उद्योगों तक पहुँचाना और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना था.
शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई, लेकिन अमितांशु के पास था एक बड़ा सपना — भारत की विशिष्ट पावर जरूरतों के लिए कस्टमाइज्ड समाधान देना. उनका मानना था कि “सिर्फ बड़े निवेश से सफलता नहीं आती, बल्कि सही दृष्टि, मेहनत और ग्राहक के प्रति ईमानदारी से ही बड़े सपने पूरे होते हैं.”
BPE की कहानी किसी साधारण कंपनी की कहानी नहीं है. यह कहानी है छोटे से निवेश से शुरू होकर, भारत के उद्योगों में विश्वास और नवाचार की मिसाल कायम करने की, और फिर उसे दुनिया भर में पहचान दिलाने की.
BPE के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, अमितांशु सत्तापति, पावर टेक्नोलॉजी के अनुभवी पेशेवर हैं. NIT कुरुक्षेत्र के छात्र रहे अमितांशु ने अपनी पेशेवर यात्रा Crompton Greaves से शुरू की, जहाँ उन्होंने पावर सॉल्यूशंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में गहरी विशेषज्ञता हासिल की.
उनके लिए सफलता केवल व्यवसायिक वृद्धि तक सीमित नहीं थी. वे समाज के प्रति भी जिम्मेदार हैं. Omkar Gadi Foundation और Rotary Ananta के माध्यम से वे कई सामाजिक पहलों का हिस्सा बने. उनका मानना है कि असली सफलता वही है जो समाज और समुदाय को भी लाभ पहुँचाए.
साल 2000 में BPE की शुरुआत के समय सबसे बड़ी चुनौती थी पूंजी जुटाना. सीमित संसाधनों में हर निर्णय सोच-समझकर लेना पड़ता था. लेकिन अमितांशु का विजन स्पष्ट था: ग्राहक के लिए भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाला समाधान देना.
धीरे-धीरे यह भरोसा BPE की सबसे बड़ी पूंजी बन गया. यही विश्वास कंपनी को स्थिर और निरंतर वृद्धि की ओर ले गया. आज, BPE ₹500 करोड़ का वार्षिक कारोबार करने वाली और 20 देशों में मौजूद वैश्विक पावर सॉल्यूशंस कंपनी बन चुकी है.
BPE की सफलता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही. 'Made in India' ब्रांड की बढ़ती स्वीकार्यता और गुणवत्ता में विश्वास ने कंपनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. BPE ने विभिन्न उद्योगों और पावर परिस्थितियों के लिए कस्टमाइज्ड समाधान पेश किए.

BPE की टीम
कंपनी की प्रमुख मील के पत्थर की बात करें तो 2010 में BPE ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए UPS सप्लाई की, जो वैश्विक स्तर पर उनकी विश्वसनीयता का प्रतीक बन गया. उसी वर्ष उन्होंने 1 मिलियन UPS यूनिट्स का आंकड़ा पार किया. 2014 में BPE ने 1 बिलियन रुपये की बिक्री हासिल की और 2022 में डेटा सेंटर निर्माण व बिक्री के क्षेत्र में कदम रखा. 2024 तक उनके पास 1 मिलियन वर्ग फुट का निर्माण क्षेत्र और 3,500 से अधिक वैश्विक पार्टनर नेटवर्क था.
BPE के 500+ विशेषज्ञ इंजीनियर्स लगातार तकनीक की सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं. कंपनी की नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है कि इसके CTO को "CTO ऑफ द ईयर" का सम्मान मिल चुका है. BPE को Jubilant (Domino’s) से "Innovative Partnership Award" भी मिला, जब उन्होंने 300 से अधिक जनरेटर की जगह बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से सप्लाई की.
सभी प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों पर होती है. ISO, CE और TÜV जैसी मान्यताएँ BPE की गुणवत्ता और भरोसे का प्रमाण हैं.
BPE ने Jubilant FoodWorks (Domino’s) के साथ साझेदारी की है. इसके आउटलेट्स में डीज़ल जनरेटर के उच्च लागत और पर्यावरणीय चिंता के चलते BPE ने BESS समाधान दिया. 300+ DG सेट्स को हरित, प्रभावशाली बैकअप पावर सिस्टम से बदलकर, कंपनी ने उनके संचालन लागत को घटाया और पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहतर कदम उठाया.
BPE के लिए सस्टेनेबिलिटी कोई विकल्प नहीं बल्कि जिम्मेदारी है. डीज़ल जनरेटर पर निर्भरता घटाकर, कंपनी BESS और लिथियम बैटरी समाधान प्रदान कर रही है. यह कंपनियों को उनके पर्यावरणीय लक्ष्य हासिल करने में मदद करता है. Domino’s प्रोजेक्ट इसका जीवंत उदाहरण है.
BPE की सभी प्रोडक्ट्स भारत में बनाए जाते हैं और देशभर में उनके सर्विस नेटवर्क का समर्थन है. छह आधुनिक निर्माण इकाइयों में फैले उनके 100,000+ वर्ग फुट क्षेत्र ने इसे पूरी तरह Make in India कंपनी बना दिया. कंपनी का उद्देश्य सिर्फ भारत में निर्माण नहीं, बल्कि भारतीय पावर टेक्नोलॉजी को वैश्विक मंच पर ले जाना है.
अगले पांच वर्षों में BPE का लक्ष्य डेटा सेंटर समाधानों और BESS में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करना है. यूरोप में विस्तार और तकनीकी नवाचार के जरिए कंपनी बाजार की गति से आगे बढ़ना चाहती है. AI और ऊर्जा भंडारण जैसे उभरते रुझानों के लिए BPE तैयार है, जो डिजिटल और हरित ऊर्जा क्रांति का हिस्सा बनेंगे.
अमितांशु सत्तापति का संदेश सरल और स्पष्ट है: “एक विजन रखें. अपने शहर या देश को सीमा न समझें. पूरी दुनिया को अपना बाजार समझें. यही तरीका है सच्ची वृद्धि और सफलता का.”



