बजट 2026: एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग को मिला बूस्ट, कस्टम ड्यूटी पर सरकार का बड़ा फैसला
बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीमा शुल्क सरल करने, घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े ऐलान किए. कस्टम्स में AI, ऊर्जा, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स निर्यात को राहत देकर भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है.
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क से जुड़े कई बड़े सुधारों की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का मकसद टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाना, घरेलू विनिर्माण को मजबूती देना और निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है. सरकार लंबे समय से चली आ रही अनावश्यक सीमा शुल्क छूट को धीरे धीरे समाप्त कर रही है. अब उन वस्तुओं पर ही छूट दी जाएगी, जिनका निर्माण देश में होता है या जिनका उत्पादन बहुत कम है.
वित्त मंत्री ने कहा कि शुल्क दर तय करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया जाएगा. इसके लिए प्रभावी सीमा शुल्क दरों को सीधे टैरिफ शेड्यूल में शामिल किया जाएगा, ताकि व्यापार और उद्योग को स्पष्टता मिले. निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समुद्री खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाली विशिष्ट वस्तुओं के शुल्क मुक्त आयात की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है. जूतों, चमड़े और वस्त्र से जुड़े उत्पादों के निर्यातकों को भी राहत दी गई है. अब अंतिम उत्पाद के निर्यात की समयसीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष किया जाएगा.
ऊर्जा परिवर्तन और सुरक्षा पर भी बजट में खास ध्यान दिया गया है. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और लिथियम आयन सेल से जुड़े पूंजीगत सामान पर सीमा शुल्क छूट का दायरा बढ़ाया जाएगा. सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर ग्लास के निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के आयात पर भी छूट दी जाएगी. नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जरूरी वस्तुओं पर सीमा शुल्क छूट को वर्ष 2035 तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है.
घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए विमान, रक्षा उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कई पुर्जों पर भी सीमा शुल्क में राहत दी गई है. इससे भारत में उत्पादन बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है. विशेष आर्थिक क्षेत्रों में काम कर रही इकाइयों को भी राहत दी गई है. अब वे सीमित मात्रा में घरेलू बाजार में किफायती दरों पर बिक्री कर सकेंगी. सरकार ने कहा कि इससे वैश्विक व्यापार में आ रहे उतार चढ़ाव के असर को कम करने में मदद मिलेगी.
सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के लिए एक एकीकृत डिजिटल सिस्टम शुरू किया जाएगा. अगले दो वर्षों में कस्टम्स इंटीग्रेटेड सिस्टम लागू किया जाएगा. प्रमुख बंदरगाहों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्कैनिंग और जोखिम आकलन की व्यवस्था की जाएगी, ताकि हर कंटेनर की जांच तेज और पारदर्शी हो सके.
निर्यात के नए अवसर खोलते हुए वित्त मंत्री ने मछुआरों के लिए भी बड़े कदमों की घोषणा की. विशेष आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में पकड़ी गई मछलियों को शुल्क मुक्त किया जाएगा. विदेशी बंदरगाहों पर भेजी गई ऐसी मछलियों को निर्यात की श्रेणी में रखा जाएगा. सरकार ने छोटे कारोबारियों और कारीगरों को भी राहत दी है. ई-कॉमर्स के जरिए भेजी जाने वाली कुरियर निर्यात खेपों की मूल्य सीमा को पूरी तरह हटा दिया गया है. इससे छोटे व्यवसायों को वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान होगी.
वित्त मंत्री ने ईमानदार करदाताओं को भी बड़ी राहत दी. अब वे दंड के डर के बिना अतिरिक्त राशि का भुगतान कर अपने पुराने विवादों का निपटान कर सकेंगे. सरकार का कहना है कि इन सुधारों से व्यापार में विश्वास बढ़ेगा और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी.



