चंडीगढ़ में Uber और Rapido के लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई — रिपोर्ट
चंडीगढ़ में नियमों के उल्लंघन पर Uber और Rapido के एग्रीगेटर लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड कर दिए गए हैं. स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने इंश्योरेंस, ड्राइवर ट्रेनिंग, किराए और अन्य नियमों का पालन नहीं करने पर यह बड़ी कार्रवाई की.
चंडीगढ़ प्रशासन ने Uber और Rapido के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) दोनों कंपनियों के एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिए हैं.
यह कार्रवाई चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स रूल्स, 2025 का पालन नहीं करने के आरोप में की गई है. द इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि दोनों कंपनियां बार बार निर्देश दिए जाने के बावजूद नियमों का पूरी तरह पालन करने में नाकाम रहीं. यह आदेश 8 सितंबर 2026 को जारी किया गया.
एक साल से चल रही थी कार्रवाई
रिपोर्ट में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के आदेश का हवाला देते हुए बताया गया है कि कंपनियों के खिलाफ शिकायतों और नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई पिछले एक साल से चल रही थी. कैब ड्राइवर्स ने हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस, ड्राइवर्स की ट्रेनिंग और किराया तय करने के नियमों का पालन नहीं होने की शिकायत की थी.
इसके बाद जुलाई 2025 में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने कंपनियों से कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी थी. अगस्त में रिमाइंडर भी भेजा गया. कंपनियों की ओर से जवाब मिला, लेकिन अथॉरिटी ने उसे नियमों के अनुरूप नहीं पाया.
अगस्त 2025 में एक कमेटी बनाई गई. इस कमेटी ने सितंबर 2025 में कंपनी के लोकल ऑफिस का निरीक्षण किया. जांच में पाया गया कि कई नियमों का पालन नहीं किया गया था.
इसके बाद अक्टूबर 2025 में शो कॉज नोटिस जारी किया गया. कंपनियों ने जवाब भी दिया, लेकिन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक वे जवाब भी नियमों के अनुरूप नहीं थे.
इंश्योरेंस, ट्रेनिंग और किराए को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 8 जनवरी और 7 मई को सेक्रेटरी, स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की अध्यक्षता में बैठकें भी हुईं. इन बैठकों में कंपनियों को इंश्योरेंस, ड्राइवर्स की ट्रेनिंग और चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तय किए गए किराए को लागू करने के निर्देश दिए गए.
कंपनियों से 15 दिनों के भीतर कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था. आदेश के मुताबिक, इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला.
ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने यह भी कहा कि कंपनी के लोकल ऑफिस का कई बार दौरा किया गया. कमेटी ने 1 मई, 8 मई और 19 मई 2026 को दिए गए पते पर जांच की. हर बार ऑफिस बंद या लॉक मिला. अथॉरिटी ने इसे भी नियमों का उल्लंघन माना है.
सब्सक्रिप्शन और रिचार्ज मॉडल पर भी सवाल
जुलाई 2026 में कंपनियों ने कंप्लायंस रिपोर्ट, फोटोग्राफ्स और अन्य डॉक्यूमेंट्स जमा किए थे. ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने इनकी जांच की, लेकिन पाया कि कई नियमों का पालन अब भी नहीं किया गया था. मामले में सब्सक्रिप्शन और प्रीपेड रिचार्ज मॉडल का मुद्दा भी सामने आया.
ट्राइसिटी कैब ड्राइवर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 3 सितंबर 2026 को ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से शिकायत की थी. एसोसिएशन का आरोप था कि प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवर्स को प्रीपेड रिचार्ज कराने या सब्सक्रिप्शन लेने के लिए कहा जा रहा था. ट्रांसपोर्ट यूनियन के सदस्यों ने भी उसी दिन सेक्रेटरी, स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से मुलाकात की. उन्होंने किराए से जुड़े कुछ रिकॉर्ड्स जमा किए.
अथॉरिटी का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स से सब्सक्रिप्शन और रिचार्ज मॉडल के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं. साथ ही, कुछ मामलों में तय सीमा से ज्यादा किराया वसूलने की बात भी सामने आई.
चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स रूल्स, 2025 के तहत एग्रीगेटर तय टैक्सी फेयर से ज्यादा किराया नहीं ले सकता. हालांकि, तय किराए से 20 प्रतिशत तक कम फेयर लिया जा सकता है, जिसकी जानकारी STA को देनी होती है.
इंश्योरेंस को भी नियमों के मुताबिक नहीं माना गया
इंश्योरेंस को लेकर भी स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने कंपनियों के जवाब पर सवाल उठाए. कंपनी का कहना था कि बाइक टैक्सी कैप्टन्स के लिए इंश्योरेंस हर राइड के दौरान अपने आप एक्टिव हो जाता है. लेकिन जांच के बाद अथॉरिटी ने पाया कि यह कवर केवल एक्सीडेंटल डेथ और इंजरी इंश्योरेंस तक सीमित था. अथॉरिटी के मुताबिक, यह रूल्स में तय की गई इंश्योरेंस रिक्वायरमेंट्स को पूरा नहीं करता.
आदेश में यह भी कहा गया कि कंपनियों ने नियमों का पालन करने के बजाय चंडीगढ़ में मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 को अपनाने की मांग करते हुए रिप्रेजेंटेशंस दिए.
जुलाई 2026 में मांगी गई अटैच्ड व्हीकल्स की सूची में कुछ नॉन कमर्शियल व्हीकल्स भी प्लेटफॉर्म से जुड़े पाए गए. चंडीगढ़ में इसकी अनुमति नहीं है.
पहले Ola और inDrive पर हुई थी कार्रवाई
STA ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय और कई मौके दिए गए थे. इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया. Uber और Rapido पर हुई यह कार्रवाई चंडीगढ़ में इस साल एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ तीसरी बड़ी कार्रवाई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ANI Technologies, जो Ola को ऑपरेट करती है, और Indsystems IT, जो inDrive चलाती है, के एग्रीगेटर लाइसेंस भी छह महीने के लिए सस्पेंड कर चुकी है.
चारों प्लेटफॉर्म्स को उनके चंडीगढ़ ऑफिसेज की इंस्पेक्शन के बाद शो कॉज नोटिस जारी किए गए थे.
अब Uber और Rapido के लाइसेंस भी छह महीने के लिए सस्पेंड होने से चंडीगढ़ में ऐप बेस्ड कैब और बाइक टैक्सी सर्विसेज को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
(feature image: AI generated)



