अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जॉब छोड़ी, भारत लौटे और खड़ा किया Made In India ब्रांड Ruhe
अमेरिका की सिलिकॉन वैली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर कपिल गुप्ता भारत लौटे. उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में कदम रखा और किचन व बाथरूम फिटिंग्स की समस्याओं में बड़ा अवसर देखा. जानिए कैसे उनके अनुभव ने Made In India ब्रांड Ruhe की नींव रखी और इसे आगे बढ़ाया.
भारत के घरों में किचन और बाथरूम की फिटिंग्स पर अक्सर तब ध्यान जाता है, जब कोई परेशानी सामने आती है. टपकता नल, जंग लगी फिटिंग या खराब ड्रेनेज जैसी समस्याएं आम हैं. लेकिन इन्हीं रोजमर्रा की दिक्कतों में कपिल गुप्ता ने एक बड़ी बिजनेस अपॉर्च्युनिटी देखी.
कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सिलिकॉन वैली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया. वहां एक आरामदायक करियर उनका इंतजार कर रहा था. फिर भी उन्होंने भारत लौटने और मैन्युफैक्चरिंग की राह चुनने का फैसला किया. इसी सफर ने आगे चलकर किचन और बाथरूम फिटिंग्स ब्रांड Ruhe की नींव रखी.
YourStory ने हाल ही में Ruhe के फाउंडर कपिल गुप्ता से बातचीत की. उन्होंने अपने शुरुआती सफर, मैन्युफैक्चरिंग अनुभव, ऑनलाइन बिक्री की चुनौतियों और कंपनी के आगे के विजन के बारे में विस्तार से बताया.
सिलिकॉन वैली से भारत लौटने का फैसला
कपिल गुप्ता ने 2005 में University of Southern California (USC) से कंप्यूटर साइंस की डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने पालो आल्टो स्थित SAP Labs में सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम शुरू किया. टेक्नोलॉजी की दुनिया में उनका करियर अच्छी दिशा में आगे बढ़ रहा था.
लेकिन उनका झुकाव हमेशा वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने की ओर था. 2009 में भारत लौटने के बाद उन्होंने महसूस किया कि देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर और घरेलू जरूरतों से जुड़े क्षेत्रों में सुधार की काफी गुंजाइश है.
कपिल गुप्ता कहते हैं, “मैंने हमेशा समस्याओं को करीब से देखने और उनका व्यावहारिक समाधान खोजने की कोशिश की है. भारत लौटने के बाद मुझे लगा कि केवल डिजिटल दुनिया ही नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों में भी बड़ी समस्याएं हैं, जिन्हें बेहतर इंजीनियरिंग से हल किया जा सकता है.”
सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस तक
भारत लौटने के बाद कपिल ने सॉफ्टवेयर के बजाय मैन्युफैक्चरिंग को चुना. 2010 में फ्लोर ड्रेन बनाना शुरू किया गया. 2013 में दूसरी फैक्ट्री के साथ किचन सिंक का प्रोडक्शन भी शुरू हुआ. अगले करीब दस साल उनके लिए फैक्ट्री और प्रोडक्शन को समझने का दौर रहा.
इस दौरान कंपनी ने OEM (Original Equipment Manufacturer) पार्टनर्स, होटल चेन, सरकारी परियोजनाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए काम किया. इस अनुभव ने प्रोडक्शन, सप्लाई चेन, लागत नियंत्रण और प्रोडक्ट की क्वालिटी को समझने में मदद की. 2019 तक यह मैन्युफैक्चरिंग आधार काफी मजबूत हो चुका था.
कपिल कहते हैं, “फैक्ट्री के उन वर्षों ने मुझे किताबों से अलग असली बिजनेस सिखाया. मैंने जाना कि क्वालिटी कैसे कंट्रोल होती है और लागत कहां बढ़ती है. यही अनुभव बाद में Ruhe के लिए सबसे बड़ी ताकत बना, क्योंकि हमें प्रोडक्शन की पूरी प्रक्रिया की गहरी समझ थी.”

Ruhe की शुरुआत
कपिल ने देखा कि किचन और बाथरूम फिटिंग्स का बाजार काफी हद तक बिखरा हुआ था. कई जगह गुणवत्ता में एकरूपता नहीं थी. कीमतों को लेकर पारदर्शिता भी कम थी. ग्राहकों के पास अक्सर सही जानकारी और भरोसेमंद विकल्पों की कमी रहती थी.
2020 में जब Ruhe को कंज्यूमर ब्रांड के रूप में लॉन्च किया गया, तब एक और बड़ी चुनौती सामने थी. आम धारणा थी कि नल, सिंक और अन्य फिटिंग्स जैसी चीजें ऑनलाइन नहीं बिक सकतीं. ग्राहक उन्हें छूकर और देखकर खरीदना चाहते हैं.
कपिल गुप्ता कहते हैं, “सबसे बड़ी चुनौती ग्राहक का भरोसा जीतना था. उन्हें प्रोडक्ट का आकार, सामग्री और इंस्टॉलेशन समझना जरूरी था. हमने वीडियो, वास्तविक परीक्षण और साफ जानकारी पर जोर दिया. साथ ही रिटर्न और लंबी वारंटी देकर खरीदारी के जोखिम को कम करने की कोशिश की.”
आज Ruhe के प्रोडक्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अपनी वेबसाइट के साथ ऑफलाइन बाजार में भी उपलब्ध हैं. कंपनी के अनुसार, उसके 3,000 से अधिक SKU (Stock Keeping Unit) हैं और वह 5 लाख से ज्यादा घरों तक पहुंच चुकी है.
ऑनलाइन से ऑफलाइन तक बढ़ता नेटवर्क
Ruhe का मॉडल केवल ऑनलाइन बिक्री तक सीमित नहीं रहा. डिजिटल माध्यम से ब्रांड की जानकारी बढ़ी तो कई ग्राहक स्थानीय दुकानों पर भी इसके प्रोडक्ट्स के बारे में पूछने लगे. इस मांग ने कंपनी के ऑफलाइन विस्तार को भी गति दी.
कंपनी के मुताबिक, आज उसके 1,200 से अधिक रिटेल पार्टनर हैं और 9 एक्सक्लूसिव स्टोर चल रहे हैं. कंपनी दिसंबर 2026 तक 50 आउटलेट्स और 2027 तक 100 से अधिक एक्सक्लूसिव स्टोर तक पहुंचने की योजना पर काम कर रही है.
Ruhe संस्थागत ग्राहकों और बड़े प्रोजेक्ट्स को भी सप्लाई करती है. इसके ग्राहकों में रेलवे, मेट्रो, होटल और रियल एस्टेट से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं. कंपनी का कहना है कि उसके 200 से अधिक कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है.
कपिल कहते हैं, “मेरी सबसे बड़ी सीख यह रही कि लंबे समय में प्रोडक्ट की सच्चाई ही काम आती है. ग्राहक केवल चमकदार दावों से प्रभावित नहीं होता. अगर प्रोडक्ट उसकी समस्या हल करता है और खरीदने के बाद उसे सही सहयोग मिलता है, तो भरोसा धीरे धीरे मजबूत होता है.”
अब क्विक कॉमर्स और जीरो इन्वेंट्री पर नजर
Ruhe अब क्विक कॉमर्स के जरिए उपभोक्ताओं के साथ रिटेल व्यापारियों के लिए भी नया मॉडल तैयार कर रही है. कंपनी का लक्ष्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जिसमें डीलरों को बड़ी मात्रा में स्टॉक रखकर अपनी वर्किंग कैपिटल फंसानी न पड़े.
कंपनी के मुताबिक, डीलर Ruhe ऐप के जरिए ऑर्डर कर सकेंगे और स्थानीय वेयरहाउस से उन्हें कम समय में प्रोडक्ट पहुंचाया जाएगा. इसके साथ ही कंपनी स्मार्ट होम फिटिंग्स, सेंसर वाले नल और किचन यूटिलिटी सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार देख रही है.
कपिल कहते हैं, “जब मैंने इस इंडस्ट्री को समझना शुरू किया, तो देखा कि कई डीलरों का पैसा धीमी गति से बिकने वाले स्टॉक में फंसा रहता है. मेरा मकसद इस परेशानी को कम करना है. टेक्नोलॉजी और तेज सप्लाई के जरिए बिजनेस को ज्यादा आसान और कुशल बनाया जा सकता है.”
Ruhe अब तक पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड रही है. कंपनी ने किसी भी बाहरी निवेशक से इक्विटी फंडिंग नहीं ली है और अपने विस्तार के लिए आंतरिक संसाधनों तथा कारोबार से मिलने वाली आय पर भरोसा किया है. कपिल भविष्य में रणनीतिक साझेदारी की संभावना से इनकार नहीं करते.
सिलिकॉन वैली से फैक्ट्री तक का कपिल गुप्ता का सफर एक अलग रास्ता चुनने की कहानी है. उनका मानना है कि बड़ा असर हमेशा बड़े दावों से नहीं आता. कई बार रोजमर्रा की छोटी समस्याओं का ईमानदार समाधान ही लंबे समय तक टिकने वाला बदलाव पैदा करता है.



