कोविड-19 टीकाकरण अभियान एक जनांदोलन बनना चाहिए: उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

By रविकांत पारीक
September 07, 2021, Updated on : Tue Sep 07 2021 14:04:34 GMT+0000
कोविड-19 टीकाकरण अभियान एक जनांदोलन बनना चाहिए: उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
उपराष्ट्रपति ने जनप्रतिनिधियों, फिल्म और खेल जगत की हस्तियों से लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत को कोविड के विरुद्ध अपनी महत्‍वपूर्ण और सामूहिक लड़ाई में गति नहीं खोनी चाहिए।
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उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 टीकाकरण अभियान एक जनांदोलन बन जाना चाहिए और उन्‍होंने प्रत्येक पात्र व्यक्ति से बिना किसी डर या झिझक के आवश्यक खुराक लेने की अपील की।


भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड और मेडिसिटी हॉस्पिटल्स के सहयोग से हैदराबाद में स्वर्ण भारत ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए, नायडू ने कहा कि वैक्सीन लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है


टीकों के बारे में अफवाह का विरोध करने का आह्वान करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों, फिल्म और खेल जगत की हस्तियों से कोविड-19 टीकाकरण पर मिथकों और आशंकाओं को दूर करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया।


जागरूकता पैदा करने और कोविड के प्रति समुचित व्यवहार को प्रोत्साहित करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि टीकाकरण के लिए पात्र प्रत्येक नागरिक को टीके की आवश्यक खुराक लेना अपना कर्तव्य समझना चाहिए।


उपराष्‍ट्रपति ने प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि 6 सितम्‍बर, 2021 तक देश में 71 करोड़ से अधिक खुराकें दी गईं, जो इस बात का सूचक है कि 50 प्रतिशत से अधिक पात्र लोगों को कम-से-कम टीके की एक खुराक दी जा चुकी है।

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उपराष्ट्रपति ने इसे टीम इंडिया की भावना से केन्‍द्र और राज्यों का सामूहिक और उल्लेखनीय प्रयास बताते हुए जोर देकर कहा कि प्रत्‍येक नागरिक का टीकाकरण हो जाने तक टीकाकरण मिशन को अपनी गति नहीं खोनी चाहिए।


नायडू ने कहा कि ऐसे समय में जब विकसित देशों ने भी महामारी से निपटने के लिए संघर्ष किया, भारत ने न केवल स्वदेशी रूप से टीकों का सफलतापूर्वक उत्‍पादन किया है, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम भी चला रहा है। उन्‍होंने कहा कि इसके अलावा 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना से भारत ने दुनिया भर में टीकों का निर्यात किया है।


उपराष्ट्रपति ने महामारी से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए टीकाकरण के बाद भी कोविड के प्रति समुचित व्यवहार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करने, मास्क पहनने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने में व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेनी चाहिए।


नायडू ने लोगों को स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए स्वस्थ जीवन शैली के विकल्पों को अपनाने का सुझाव दिया, जैसे कि योग का अभ्यास करना, शारीरिक फिटनेस बनाए रखना और स्वस्थ भोजन करना।


उन्होंने मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम के आयोजकों- स्वर्ण भारत ट्रस्ट, भारत बायोटेक, मुप्पावरापु फाउंडेशन, मेडिसिटी हॉस्पिटल्स (हैदराबाद), सिंहपुरी वैद्य सेवा समिति (नेल्लोर), पिन्नामनेनी सिद्धार्थ हॉस्पिटल्स (विजयवाड़ा) को उनकी पहल और प्रयासों के लिए बधाई दी। मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम एक साथ तीन केन्‍द्रों- हैदराबाद, विजयवाड़ा और नेल्लोर में एक साथ शुरू किया गया था।


उपराष्ट्रपति की धर्मपत्नी उषा नायडू, भारत बायोटेक लिमिटेड की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एला, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान एन. मुकेश कुमार और स्वर्ण भारत ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. कामिनेनी श्रीनिवास उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने हैदराबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लिया।


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