Prana Air: दिल्ली की धुंध से निकला आइडिया, जिसने बदल दी एयर क्वालिटी की समझ
Prana Air और AQI.in की स्टार्टअप कहानी, जहां रोहित बंसल ने हाइपरलोकल और रियल टाइम एयर क्वालिटी डेटा से क्लाइमेट टेक में नया मॉडल खड़ा किया. बिना VC फंडिंग, सेंसर और डेटा के दम पर यह स्टार्टअप भारत के साथ-साथ दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ रहा है.
भारत में वायु प्रदूषण आज सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, यह स्वास्थ्य, उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता से सीधा जुड़ चुका है. हर साल करोड़ों लोग खराब हवा के असर को महसूस करते हैं, लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर लोगों के पास यह जानने का सही तरीका नहीं होता कि वे जिस जगह सांस ले रहे हैं, वहां हवा की असली स्थिति क्या है.
ऐसे में दिल्ली की हवा में पला बढ़ा एक बच्चा, जिसने शहर की तेज रफ्तार तरक्की के साथ उसके साइड इफेक्ट भी बहुत करीब से देखे. धुआं, धूल और सांस लेने में दिक्कत. यही अनुभव आगे चलकर रोहित बंसल के जीवन की दिशा तय करता है.
आज रोहित बंसल Prana Air के फाउंडर और सीईओ हैं और AQI.in जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भारत ही नहीं, दुनिया को हवा की सच्ची तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
नई दिल्ली स्थित क्लाइमेट टेक स्टार्टअप Prana Air और उसका पब्लिक प्लेटफॉर्म AQI.in आज देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले एयर क्वालिटी डेटा प्लेटफॉर्म्स में शामिल है. यह प्लेटफॉर्म रियल टाइम और हाइपरलोकल स्तर पर हवा की जानकारी देता है, जिसे आम नागरिक, स्कूल, कंपनियां और यहां तक कि सरकारी संस्थाएं भी इस्तेमाल कर रही हैं. खास बात यह है कि AQI.in पूरी तरह मुफ्त है और अब तक इसे बिना किसी विज्ञापन या सब्सक्रिप्शन मॉडल के चलाया जा रहा है.
Prana Air की शुरुआत साल 2017 में हुई. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है. लेकिन इसकी सोच और पहुंच सीमाओं से कहीं आगे जाती है.
पढ़ाई ने बदली सोच
रोहित बंसल की पढ़ाई भारत तक सीमित नहीं रही. उन्होंने अपनी हायर स्कूलिंग अमेरिका में की और इसके बाद बीजिंग में पढ़ाई की. अलग अलग देशों में रहना उनके लिए सिर्फ एक शैक्षणिक अनुभव नहीं था. यह शासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्रबंधन को समझने का मौका भी था.
बीजिंग ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. वहां उन्होंने कई साल बिताए. उन्होंने देखा कि कैसे एक शहर ने भयंकर वायु प्रदूषण के दौर से निकलकर नीति, तकनीक और डेटा की मदद से हालात सुधारे. रोहित कहते हैं, “मैंने बीजिंग में यह देखा कि जब डेटा साफ और भरोसेमंद हो, तो बदलाव मुमकिन होता है.”
यहीं से उनके मन में यह सवाल पक्का हुआ कि भारत जैसे देश में हवा को लेकर भरोसेमंद जानकारी आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंचती.
रोहित का शुरुआती करियर तकनीक से जुड़ा रहा. इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और डेटा सिस्टम हमेशा उनकी रुचि का हिस्सा रहे. एक समय उनके पास प्राइवेट पायलट लाइसेंस भी था. लेकिन उन्हें यह खलता रहा कि पर्यावरण से जुड़ा डेटा, खासकर एयर क्वालिटी डेटा, आम लोगों के लिए या तो बहुत देर से आता है या फिर बहुत सामान्य होता है.
वह कहते हैं, “अगर लोग डेटा देख नहीं सकते और उस पर भरोसा नहीं कर सकते, तो वे कोई कदम भी नहीं उठाएंगे.” यही सोच AQI.in की नींव बनी.

AQI मॉनिटर
AQI.in की शुरुआत
साल 2017 में AQI.in एक प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ. मकसद साफ था. लोगों को रियल टाइम और हाइपरलोकल एयर क्वालिटी डेटा देना. रोहित और उनकी टीम ने खुद के कम लागत लेकिन सटीक सेंसर तैनात किए. सरकारी डेटा को निजी सेंसर नेटवर्क के साथ जोड़ा गया.
आज AQI.in भारत के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एयर क्वालिटी प्लेटफॉर्म्स में से एक है. यहां डेटा हर कुछ मिनट में अपडेट होता है. कई जगहों पर यह अपडेट तीन मिनट में भी हो जाता है.
रोहित कहते हैं, “प्रदूषण कुछ सौ मीटर में भी बदल सकता है. अगर आप किलोमीटर दूर के डेटा पर निर्भर हैं, तो असल तस्वीर छूट जाती है.”
बिजनेस मॉडल
Prana Air हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेटा तीनों स्तरों पर काम करता है. इसके ग्राहक कॉरपोरेट्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, इंडस्ट्रियल यूनिट्स, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हैं.
AQI.in को जानबूझकर एक पब्लिक प्लेटफॉर्म रखा गया है. यहां न विज्ञापन हैं और न सब्सक्रिप्शन. कमाई हार्डवेयर डिप्लॉयमेंट, एंटरप्राइज डैशबोर्ड और लॉन्ग टर्म मॉनिटरिंग कॉन्ट्रैक्ट्स से होती है.
रोहित साफ कहते हैं, “AQI.in हमारे लिए पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसा है. इसका मकसद कमाई नहीं, असर पैदा करना है.”
बिना फंडिंग के आगे बढ़ता सफर
Prana Air पूरी तरह से सेल्फ फंडेड कंपनी है. अब तक किसी बाहरी निवेशक से फंडिंग नहीं ली गई. यह रास्ता आसान नहीं था. खासकर क्लाइमेट टेक जैसे सेक्टर में, जहां धैर्य और समय दोनों चाहिए.
रोहित मानते हैं, “क्लाइमेट टेक में जल्दी मुनाफा नहीं दिखता. यहां भरोसा और डेटा बनाने में सालों लगते हैं.” हालांकि इस फैसले ने उन्हें लंबी सोच और डेटा की शुद्धता पर समझौता न करने की आजादी दी.
साल 2024 में Prana Air की बिक्री करीब 1.2 मिलियन डॉलर रही और कंपनी मुनाफे में रही. AQI.in पर हर साल 120 मिलियन से ज्यादा सेशन होते हैं, वो भी बिना किसी मार्केटिंग खर्च के.

Prana Air की टीम
जमीनी चुनौतियां और समाधान
भारत में काम करते हुए कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आईं. बिजली की समस्या, नेटवर्क कनेक्टिविटी और खराब मौसम में सेंसर की देखभाल आसान नहीं थी. साथ ही निजी सेंसर नेटवर्क को लेकर रेगुलेटरी स्पष्टता भी धीरे धीरे बनी.
रोहित कहते हैं, “डेटा पर भरोसा हमारे लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता.” इसके लिए मल्टी लेवल कैलिब्रेशन और लगातार जांच की जाती है.
आगे की राह
निकट भविष्य में Prana Air भारत के शहरों में सेंसर नेटवर्क को और घना करना चाहता है. कम्युनिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम्स को बढ़ाया जा रहा है. लंबी अवधि में कंपनी एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में विस्तार की तैयारी कर रही है.
AQI.in आने वाले तीन से पांच सालों में सिर्फ डेटा दिखाने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रहेगा. यह एक एनवायरनमेंटल इंटेलिजेंस सिस्टम बनेगा. इसमें फोरकास्टिंग, प्रदूषण के स्रोत की पहचान और नीति से जुड़े इनसाइट्स शामिल होंगे.
रोहित कहते हैं, “हम जागरूकता नहीं, असर चाहते हैं.”
रोहित बंसल का मानना है कि असर पैदा करने वाले स्टार्टअप्स को धैर्य रखना चाहिए. वह कहते हैं, “फंडिंग के लिए नहीं, समस्या के लिए बनाइए. डेटा, यूजर और नतीजे सबसे अहम हैं.”
Prana Air और AQI.in की कहानी दिखाती है कि जब तकनीक, ईमानदारी और धैर्य साथ हों, तो अदृश्य समस्याएं भी दिखाई देने लगती हैं.



